“मैं मर नहीं रहा हूँ, बल्कि स्वतंत्र भारत में पुनर्जन्म लेने जा रहा हूँ!”
भारतीय स्वाधीनता संग्राम के अमर क्रांतिकारी राजेंद्र नाथ लाहिड़ी जी ने काकोरी ट्रेन एक्शन के माध्यम से ब्रिटिश सत्ता की जड़ों को हिला दिया और यह स्पष्ट किया कि आज़ादी की राह में सबसे बड़ा अस्त्र निःस्वार्थ त्याग और निर्भीक साहस होता है।
रामप्रसाद बिस्मिल जी के नेतृत्व में संचालित क्रांतिकारी आंदोलन के सशक्त स्तंभ के रूप में लाहिड़ी जी ने संगठन, संसाधन और संकल्प, तीनों स्तरों पर स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा और गति प्रदान की।
17 दिसंबर 1927 को उन्होंने हँसते-हँसते फांसी का वरण कर अपने जीवन को राष्ट्र के नाम समर्पित कर दिया।
उनके विचार, उनका साहस और उनका बलिदान भारत की आत्मा में सदैव जीवित रहेगा और प्रत्येक पीढ़ी को बलिदान की प्रेरणा देता रहेगा।
जय हिंद 🇮🇳
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