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चैत्र मास में आने वाली पूर्णिमा को चैत्र पूर्णिमा कहा जाता है। चैत्र पूर्णिमा को चैती पूनम के नाम से भी जाना जाता है। चूंकि चैत्र मास हिन्दू वर्ष का प्रथम मास होता है इसलिए चैत्र पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान सत्य नारायण की पूजा कर उनकी कृपा पाने के लिये भी पूर्णिमा का उपवास रखते हैं। वहीं रात्रि के समय चंद्रमा की पूजा की जाती है। उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती भी मनाई जाती है। चैत्र पूर्णिमा पर नदी, तीर्थ, सरोवर और पवित्र जलकुंड में स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। चैत्र पूर्णिमा को चैती पूनम भी कहा जाता है। इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने ब्रज में रास उत्सव रचाया था, जिसे महारास के नाम से जाना जाता है। इस महारास में हजारों गोपियों ने भाग लिया था और प्रत्येक गोपी के साथ भगवान श्रीकृष्ण रातभर नाचे थे। उन्होंने यह कार्य अपनी योगमाया के द्वारा किया था। तमिल और अन्य कई राज्यों में इसे विशेष पर्व माना जाता है। पूर्णिमा का दिन बहुत भगवान श्री हरि को समर्पित होता है, जिसमें सत्यनारायण के पूजा पाठ को बहुत फलदायी माना गया है। चैत्र माह को हिंदुओं का प्रथम माह माना जाता है। #शुभ कामनाएँ 🙏
शुभ कामनाएँ 🙏 - २ अप्रैल २०२६ गुरुवार चैत्र पूर्णिसा को हार्दिक शुभकामनाएं। sk २ अप्रैल २०२६ गुरुवार चैत्र पूर्णिसा को हार्दिक शुभकामनाएं। sk - ShareChat