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#❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #मेरे विचार ##भगवद गीता🙏🕉️
❤️जीवन की सीख - छेत्तुमर्हस्यशेषतः | संशयं एतन्मे कृष्ण त्वदन्यः संशयस्यास्य छेत्ता न ह्युपपद्यते १। हे श्रीकृष्ण ! मेरे इस संशयको सम्पूर्णरूपसे छेदन करनेके लिये आप ही योग्य हैं, क्योंकि आपके सिवा दूसरा इस संशयका छेदन करनेवाला मिलना सम्भव नहीं है।l ३९ ।। श्रीभगवानुवाच नैवेह पार्थ नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते। न हि कल्याणकृत्कश्चिद्दुर्गतिं तात गच्छति ११ श्रीभगवान् बोले- हे पार्थ ! उस पुरुषका न तो इस लोकमें नाश होता है और न परलोकमें ही। प्यारे ! आत्मोद्धारके   लिये क्योंकि अर्थात् چ भगवत्प्राप्तिके लिये कर्म करनेवाला कोई भी मनुष्य दुर्गतिको प्राप्त नहीं होता I१ ४० Il पुण्यकृतां लोकानुषित्वा शाश्वतीः समाः 1 प्राप्य शुचीनां श्रीमतां गेहे योगभ्रष्टोउभिजायते ११ योगभ्रष्ट  पुरुष पुण्यवानोंके लोकोंको अर्थात् स्वर्गादि उत्तम लोकोंको प्राप्त होकर, उनमें बहुत वर्षोंतक निवास करके फिर शुद्ध आचरणवाले স্বীসানূ  সংনে ভন্স লনা ই Il ৫? I1 पुरुषोंके श्रीमदभगवदगीता अध्याय 6 प्रेस , गोरखपुर से साभार गीता छेत्तुमर्हस्यशेषतः | संशयं एतन्मे कृष्ण त्वदन्यः संशयस्यास्य छेत्ता न ह्युपपद्यते १। हे श्रीकृष्ण ! मेरे इस संशयको सम्पूर्णरूपसे छेदन करनेके लिये आप ही योग्य हैं, क्योंकि आपके सिवा दूसरा इस संशयका छेदन करनेवाला मिलना सम्भव नहीं है।l ३९ ।। श्रीभगवानुवाच नैवेह पार्थ नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते। न हि कल्याणकृत्कश्चिद्दुर्गतिं तात गच्छति ११ श्रीभगवान् बोले- हे पार्थ ! उस पुरुषका न तो इस लोकमें नाश होता है और न परलोकमें ही। प्यारे ! आत्मोद्धारके   लिये क्योंकि अर्थात् چ भगवत्प्राप्तिके लिये कर्म करनेवाला कोई भी मनुष्य दुर्गतिको प्राप्त नहीं होता I१ ४० Il पुण्यकृतां लोकानुषित्वा शाश्वतीः समाः 1 प्राप्य शुचीनां श्रीमतां गेहे योगभ्रष्टोउभिजायते ११ योगभ्रष्ट  पुरुष पुण्यवानोंके लोकोंको अर्थात् स्वर्गादि उत्तम लोकोंको प्राप्त होकर, उनमें बहुत वर्षोंतक निवास करके फिर शुद्ध आचरणवाले স্বীসানূ  সংনে ভন্স লনা ই Il ৫? I1 पुरुषोंके श्रीमदभगवदगीता अध्याय 6 प्रेस , गोरखपुर से साभार गीता - ShareChat