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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🙏 माँ वैष्णो देवी #माता वैष्णोदेवी #🪔जय मां दुर्गा शक्ति,जय माता दी। #देश भक्ति
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश मानव परमात्मा स्वरुूप नहीं परमात्मा का ही रूप है। सगुण परब्रह्म के अलावा सम्पूर्ण सृष्टि में एक दूसरा कोई भी जीव - जीवात्मा नहीं है। कल्कि साधक  फलाश माहन में एक  निर्गुण परमब्रह्म ही परम सत्य  जिस प्रकार ब्रह्माण्ड सम्पूर्ण  में एक हैं, उसी प्रकार सगुण परब्रह्म ही परम सत्य हैं , सृष्टि সম্পুতা : सृष्टि के सभी जीव-्जीवात्मा एक ही परब्रह्म के अनेक मायावी रूप है, सृष्टि में एक परब्रह्म ही सभी जीव ्जीवात्माओं के रूप में ज्ञात रहे कर्मभूमि पर मानव कर्ता, भरता, हरता बना हुआ है दिखने में जीवात्मस्वरूप में भिन्न-भिन्न हो सकते है, किन्तु आत्मस्वरूप में सभी एक समान है बस जरूरत है मानव अपने भौतिक शरीर से परे विदेही भाव में विराट आत्मस्वरूप निष्काम कर्मयोगी बनकर अपने सत्यस्वरूप को जान ले।तो उसका संसारी अस्तित्व मिट जाएगा , मानव अपने विराट आत्मस्वरूप में लीन हो ब्रह्माण्ड एक दिव्य महाशक्ति से प्रकट हुआ है, ಗಾuf எழ निर्गुण परमब्रह्म स्वरूप है व मानव आत्मस्वरूपता में परम सत्य जीवात्मस्वरूपता में सत-्असत परब्रह्म स्वरूप है।ज्ञात रहे मानव परमात्मा स्वरूप नहीं परमात्मा का ही रूप है मानव-्मात्र को अपने सत्यस्वरूप को जानकर, मायावी जीवात्मस्वरूप का अपना मानव जीवन सार्थक बनाना चाहिए। त्यागकर, अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश मानव परमात्मा स्वरुूप नहीं परमात्मा का ही रूप है। सगुण परब्रह्म के अलावा सम्पूर्ण सृष्टि में एक दूसरा कोई भी जीव - जीवात्मा नहीं है। कल्कि साधक  फलाश माहन में एक  निर्गुण परमब्रह्म ही परम सत्य  जिस प्रकार ब्रह्माण्ड सम्पूर्ण  में एक हैं, उसी प्रकार सगुण परब्रह्म ही परम सत्य हैं , सृष्टि সম্পুতা : सृष्टि के सभी जीव-्जीवात्मा एक ही परब्रह्म के अनेक मायावी रूप है, सृष्टि में एक परब्रह्म ही सभी जीव ्जीवात्माओं के रूप में ज्ञात रहे कर्मभूमि पर मानव कर्ता, भरता, हरता बना हुआ है दिखने में जीवात्मस्वरूप में भिन्न-भिन्न हो सकते है, किन्तु आत्मस्वरूप में सभी एक समान है बस जरूरत है मानव अपने भौतिक शरीर से परे विदेही भाव में विराट आत्मस्वरूप निष्काम कर्मयोगी बनकर अपने सत्यस्वरूप को जान ले।तो उसका संसारी अस्तित्व मिट जाएगा , मानव अपने विराट आत्मस्वरूप में लीन हो ब्रह्माण्ड एक दिव्य महाशक्ति से प्रकट हुआ है, ಗಾuf எழ निर्गुण परमब्रह्म स्वरूप है व मानव आत्मस्वरूपता में परम सत्य जीवात्मस्वरूपता में सत-्असत परब्रह्म स्वरूप है।ज्ञात रहे मानव परमात्मा स्वरूप नहीं परमात्मा का ही रूप है मानव-्मात्र को अपने सत्यस्वरूप को जानकर, मायावी जीवात्मस्वरूप का अपना मानव जीवन सार्थक बनाना चाहिए। त्यागकर, अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें - ShareChat