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#माता वैष्णोदेवी #🙏 माँ वैष्णो देवी #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🪔जय मां दुर्गा शक्ति,जय माता दी। #देश भक्ति
माता वैष्णोदेवी - ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश कर्मभूमि पर अपना आत्मकल्पाण करने केलिए विदेही भाव मेंनिष्काम कर्मयोगी वनना जररीहै। कल्कि साधक  फलाश माहन जीवन में धर्म को धारण करो , ईमान से करो अर्थ को अर्जित | सर्व मनोकामनाएं पहले पूर्ण करों , फिर मोक्ष के लिए विदेही भाव में निष्काम कर्मयोगी बनकर बनों महावीर | अद्भुत रहस्मय सृष्टि सृजन के रहस्यमय ईश्वरीय ज्ञानानुसार सृष्टि में ८४ लाख योनियों के जीव -्जीवात्मा विचरण करते है , जिसमें एक मानव ही ऐसा प्राणी है, जिसे सगुण परमात्मा परब्रह्म की सर्वश्रेष्ठ कृति , सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी माना जाता है। ज्ञात रहे सृष्टि के सभी देवी -्देवता व मानव निर्गुण  ईश्वर का सगुण स्वरूप है।जिस प्रकार देवी - देवता व मानव एक ही सिक्के के दो पहलु है, उसी प्रकार सगुण मानव व निर्गुण ईश्वर भी एक ही सिक्के के दो पहलु है। देवलोक से कर्मभूमि पर सगुण परब्रह्म स्वरूप मनुष्यरूपी जीवात्मा का अवतरण कर्मभूमि पर सत्कर्मी बनकर स्वर्ग सुख का आनन्द ন লিব; लेते हुए सृष्टि की महामाया = को पराजित करने  अपने सगुण मायावी  जीवात्मस्वरूप को त्यागकर विदेही भाव में विराट आत्मस्वरूप निष्काम के लिए हुआ हैं ।स्वयं के सत्यस्वरूप कर्मयोगी बनकर आत्मकल्याण करने  को जानों अपना मानव जीवन सार्थक बनाओं अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश कर्मभूमि पर अपना आत्मकल्पाण करने केलिए विदेही भाव मेंनिष्काम कर्मयोगी वनना जररीहै। कल्कि साधक  फलाश माहन जीवन में धर्म को धारण करो , ईमान से करो अर्थ को अर्जित | सर्व मनोकामनाएं पहले पूर्ण करों , फिर मोक्ष के लिए विदेही भाव में निष्काम कर्मयोगी बनकर बनों महावीर | अद्भुत रहस्मय सृष्टि सृजन के रहस्यमय ईश्वरीय ज्ञानानुसार सृष्टि में ८४ लाख योनियों के जीव -्जीवात्मा विचरण करते है , जिसमें एक मानव ही ऐसा प्राणी है, जिसे सगुण परमात्मा परब्रह्म की सर्वश्रेष्ठ कृति , सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी माना जाता है। ज्ञात रहे सृष्टि के सभी देवी -्देवता व मानव निर्गुण  ईश्वर का सगुण स्वरूप है।जिस प्रकार देवी - देवता व मानव एक ही सिक्के के दो पहलु है, उसी प्रकार सगुण मानव व निर्गुण ईश्वर भी एक ही सिक्के के दो पहलु है। देवलोक से कर्मभूमि पर सगुण परब्रह्म स्वरूप मनुष्यरूपी जीवात्मा का अवतरण कर्मभूमि पर सत्कर्मी बनकर स्वर्ग सुख का आनन्द ন লিব; लेते हुए सृष्टि की महामाया = को पराजित करने  अपने सगुण मायावी  जीवात्मस्वरूप को त्यागकर विदेही भाव में विराट आत्मस्वरूप निष्काम के लिए हुआ हैं ।स्वयं के सत्यस्वरूप कर्मयोगी बनकर आत्मकल्याण करने  को जानों अपना मानव जीवन सार्थक बनाओं अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें - ShareChat
#🪔जय मां दुर्गा शक्ति,जय माता दी। #🙏 माँ वैष्णो देवी #देश भक्ति #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
🪔जय मां दुर्गा शक्ति,जय माता दी। - ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश कर्भूनिपर ागुण पर्रह्मका अवतार हेने केवाद  हृवपनेंनिर्गुण परमव्रह्मल कर्मपोगीक का अवतरण होताहै| कल्कि साधक  फलाश माहन कर्मभूमि पर जब कोई कर्मयोगी राम, रहीम, ईसा, गुरूनानक, बौद्ध, লিব  विदेही महावीर , मोहम्मद, कृष्ण , कबीर की तरह जन कल्याण के भाव में विराट आत्मस्वरूप निष्काम कर्मयोगी बन जाता है, तब उस कर्मयोगी जीवात्मा के भीतर सगुण परब्रह्म का अवतार स्वरूप प्राकट्य  निर्गुण आत्मा के भीतर निर्गुण होता है, बाद उस साधक की इसके परमब्रह्म का ज्ञान व आत्मशक्ति स्वरुप भव्य अवतरण होता है ।निष्काम कर्मयोगी साधक के भीतर जब निर्गुण आत्मा व सगुण जीवात्मा का एकाकार हो जाता है, उस साधक के भीतर निर्गुण -सगुण का भेद मिटकर  वो साधक परमसत्य बन जाता है, तब उस निष्काम कर्मयोगी साधक के भीतर निर्गुण परमब्रह्म अपने स्वरूप को रचते है সানন অান ঊ লীযা निर्गुण परमब्रह्म को ईश्वर व सगुण परब्रह्म को अवतार मान सकते है ईश्वर एकही सिक्के के दो पहलू है जिसका प्राकट्य मानव तन अवतारव के भीतर आत्मा व जीवात्मा के अंदर होता है, उनके लिए मानव तन एक रथ के समान है तो भला मानव के नश्वर तन को भगवान मानकर नश्वरता की पूजा करना कैसे सार्थक हो सकता है ? पूजा उस सगुण  परब्रह्म के प्रतिक शिवलिंग की करो और साधना उस निर्गुण परमब्रह्म की करों , जिसकी राम -कृष्ण समेत सभी निष्काम कर्मयोगी किया करते थे सत्यको जानों , सत्यवादी बनों , अपना मानव जीवन सार्थकबनाओं अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश कर्भूनिपर ागुण पर्रह्मका अवतार हेने केवाद  हृवपनेंनिर्गुण परमव्रह्मल कर्मपोगीक का अवतरण होताहै| कल्कि साधक  फलाश माहन कर्मभूमि पर जब कोई कर्मयोगी राम, रहीम, ईसा, गुरूनानक, बौद्ध, লিব  विदेही महावीर , मोहम्मद, कृष्ण , कबीर की तरह जन कल्याण के भाव में विराट आत्मस्वरूप निष्काम कर्मयोगी बन जाता है, तब उस कर्मयोगी जीवात्मा के भीतर सगुण परब्रह्म का अवतार स्वरूप प्राकट्य  निर्गुण आत्मा के भीतर निर्गुण होता है, बाद उस साधक की इसके परमब्रह्म का ज्ञान व आत्मशक्ति स्वरुप भव्य अवतरण होता है ।निष्काम कर्मयोगी साधक के भीतर जब निर्गुण आत्मा व सगुण जीवात्मा का एकाकार हो जाता है, उस साधक के भीतर निर्गुण -सगुण का भेद मिटकर  वो साधक परमसत्य बन जाता है, तब उस निष्काम कर्मयोगी साधक के भीतर निर्गुण परमब्रह्म अपने स्वरूप को रचते है সানন অান ঊ লীযা निर्गुण परमब्रह्म को ईश्वर व सगुण परब्रह्म को अवतार मान सकते है ईश्वर एकही सिक्के के दो पहलू है जिसका प्राकट्य मानव तन अवतारव के भीतर आत्मा व जीवात्मा के अंदर होता है, उनके लिए मानव तन एक रथ के समान है तो भला मानव के नश्वर तन को भगवान मानकर नश्वरता की पूजा करना कैसे सार्थक हो सकता है ? पूजा उस सगुण  परब्रह्म के प्रतिक शिवलिंग की करो और साधना उस निर्गुण परमब्रह्म की करों , जिसकी राम -कृष्ण समेत सभी निष्काम कर्मयोगी किया करते थे सत्यको जानों , सत्यवादी बनों , अपना मानव जीवन सार्थकबनाओं अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें - ShareChat
https://youtube.com/watch?v=2u045JUMQIk&si=tIDOtgWBwpIcQDwt #🪔जय मां दुर्गा शक्ति,जय माता दी। #माता वैष्णोदेवी #🙏 माँ वैष्णो देवी #देश भक्ति #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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