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#🙏 माँ वैष्णो देवी #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #माता वैष्णोदेवी #देश भक्ति #🪔जय मां दुर्गा शक्ति,जय माता दी।
🙏 माँ वैष्णो देवी - ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश  मानव जगत के लोगों के सत्कर्म वनिष्काम कर्मही कर्मभूमि को अविनाशी खवर्गवना सकते है। कल्कि साधक  फलाग माहन ऊँ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो या नः प्रचोदयात् सम्पूर्ण मानव जगत के लोगों का मानव जीवन सार्थक बनाने के कर्मभूमि पर कलयुग को सतयुग में परिणित करने के लिए लिए लिए दुनिया का सृजन करने के मानव जगत के सतयुगी  ஈர लोगों को सत्कर्मी , निष्काम कर्मयोगी बनना होगा | कर्मभूमि पर सम्पूर्ण मानव जगत के लोगों का मानव-्मात्र का कर्त्तव्य है, वो परम हितेषी बनकर , मानव-्मात्र के कल्याण के लिए, उसे प्रतिदिन  चाहिए कर्मभूमि पर मानव ्मात्र गायत्री महामंत्र का जाप करना ` अपने प्रभु से प्रार्थना करना चाहिए, हे परम ज्ञानेश्वर " के t गुरुओं  ஈரி751  निर्गुण परमब्रह्म मानव जगत के लोगों परम गुरुवर सम्पूर्ण  सदबुद्धि प्रदान करो , जिससे हमारी कर्मभूमि पर धर्म के प्रति को ग्लानि मिटकर हमारी धरती माता अविनाशी स्वर्ग बन जाए और कर्मभूमि पर मानव ्मात्र अपना आत्मकल्याण कर सकें  Kalki Gyan Sagar gq S1Sஎs க&் अधिक जानकारी के लिए ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश  मानव जगत के लोगों के सत्कर्म वनिष्काम कर्मही कर्मभूमि को अविनाशी खवर्गवना सकते है। कल्कि साधक  फलाग माहन ऊँ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो या नः प्रचोदयात् सम्पूर्ण मानव जगत के लोगों का मानव जीवन सार्थक बनाने के कर्मभूमि पर कलयुग को सतयुग में परिणित करने के लिए लिए लिए दुनिया का सृजन करने के मानव जगत के सतयुगी  ஈர लोगों को सत्कर्मी , निष्काम कर्मयोगी बनना होगा | कर्मभूमि पर सम्पूर्ण मानव जगत के लोगों का मानव-्मात्र का कर्त्तव्य है, वो परम हितेषी बनकर , मानव-्मात्र के कल्याण के लिए, उसे प्रतिदिन  चाहिए कर्मभूमि पर मानव ्मात्र गायत्री महामंत्र का जाप करना ` अपने प्रभु से प्रार्थना करना चाहिए, हे परम ज्ञानेश्वर " के t गुरुओं  ஈரி751  निर्गुण परमब्रह्म मानव जगत के लोगों परम गुरुवर सम्पूर्ण  सदबुद्धि प्रदान करो , जिससे हमारी कर्मभूमि पर धर्म के प्रति को ग्लानि मिटकर हमारी धरती माता अविनाशी स्वर्ग बन जाए और कर्मभूमि पर मानव ्मात्र अपना आत्मकल्याण कर सकें  Kalki Gyan Sagar gq S1Sஎs க&் अधिक जानकारी के लिए - ShareChat
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🙏 माँ वैष्णो देवी - ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश सत्य पर धुल जम सकती है , सत्य को स्थापित होने में कठिनाईयां आ सकती है , किन्तु " सात्य कभी पराजित नहीं हो सकता। कल्कि साधक  फलाग माहन ब्रह्माण्ड में एक परमब्रह्म ही परमसत्य বন্ধী নম্সম ব্রিলীমী নাদি सम्पूर्ण च से मुक्ति का है, उसे विदित किये बिना कर्मयोगी के লিব मृत्युलोक और कोई उपाय नहीं है। सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की दिव्य महाशक्ति निर्गुण परमब्रह्म अनादी , अजन्मा , निष्कलंक, निराकार सृष्टि के जीव-्मात्र का परम हितेषी है।जो सगुण स्वरूप में सम्पूर्ण सृष्टि के सभी जीवों का जन्मदाता , पालनहार है, उसे हम परम माता -पिता परमात्मा कह सकते लिए है।वहीं निर्गुण स्वरूप में मानव के ज्ञान -विज्ञान व मुक्तिदाता है, उसे हम सम्पूर्ण मानव जगत का परम गुरूवर कह सकते है।मानव सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी होकर भी आज तक स्वयं व ईश्वर के सत्यस्वरूप को नहीं जान पाया। ज्ञात रहे मानव परमात्मा स्वरूप नहीं साक्षात का ही रूप है एवं सृष्टि के सभी जीव सगुण परमात्मा परब्रह्म परमात्मा के मायावी रूप है। आज के मानव के पास ' डर ' और ' लालच ' के अलावा ईश्वर को मानने का तीसरा कोई कारण नहीं है। सभी तरह के धार्मिक स्थलों के पीछे आस्था नहीं जाति सम्प्रदायवाद का अहंकार भरा पड़ा है।कई धार्मिक स्थलों का मकसद पैसा कमाना है।जिस देश में धार्मिक स्थलों की कमाई वहां की बैंकों से ज्यादा हो , उस देश में धर्म और ईश्वर के नाम पर डरने वाले लोगों की कमी नहीं है अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश सत्य पर धुल जम सकती है , सत्य को स्थापित होने में कठिनाईयां आ सकती है , किन्तु " सात्य कभी पराजित नहीं हो सकता। कल्कि साधक  फलाग माहन ब्रह्माण्ड में एक परमब्रह्म ही परमसत्य বন্ধী নম্সম ব্রিলীমী নাদি सम्पूर्ण च से मुक्ति का है, उसे विदित किये बिना कर्मयोगी के লিব मृत्युलोक और कोई उपाय नहीं है। सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की दिव्य महाशक्ति निर्गुण परमब्रह्म अनादी , अजन्मा , निष्कलंक, निराकार सृष्टि के जीव-्मात्र का परम हितेषी है।जो सगुण स्वरूप में सम्पूर्ण सृष्टि के सभी जीवों का जन्मदाता , पालनहार है, उसे हम परम माता -पिता परमात्मा कह सकते लिए है।वहीं निर्गुण स्वरूप में मानव के ज्ञान -विज्ञान व मुक्तिदाता है, उसे हम सम्पूर्ण मानव जगत का परम गुरूवर कह सकते है।मानव सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी होकर भी आज तक स्वयं व ईश्वर के सत्यस्वरूप को नहीं जान पाया। ज्ञात रहे मानव परमात्मा स्वरूप नहीं साक्षात का ही रूप है एवं सृष्टि के सभी जीव सगुण परमात्मा परब्रह्म परमात्मा के मायावी रूप है। आज के मानव के पास ' डर ' और ' लालच ' के अलावा ईश्वर को मानने का तीसरा कोई कारण नहीं है। सभी तरह के धार्मिक स्थलों के पीछे आस्था नहीं जाति सम्प्रदायवाद का अहंकार भरा पड़ा है।कई धार्मिक स्थलों का मकसद पैसा कमाना है।जिस देश में धार्मिक स्थलों की कमाई वहां की बैंकों से ज्यादा हो , उस देश में धर्म और ईश्वर के नाम पर डरने वाले लोगों की कमी नहीं है अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें - ShareChat
#🪔जय मां दुर्गा शक्ति,जय माता दी। #देश भक्ति #माता वैष्णोदेवी #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
🪔जय मां दुर्गा शक्ति,जय माता दी। - ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश ईश्वर को मानने से ईश्वर की पूजा करने से इंसान का तब तक भला नहीं हो सकता | जब तक इंसान ईश्वर की नहीं मान लेता | कल्कि साधक  फलाग माहन अद्भुत रहस्यमय सृष्टि सृजन के रहस्यमय ईश्वरीय ज्ञानानुसार सृष्टि में देवलोक के सभी देवी - देवता व कर्मभूमि पर मानव निर्गुण ईश्वर का सगुण स्वरूप है।ईश्वर एक है उसके दो स्वरूप मानव के भीतर ईश्वर सगुण जीवात्मस्वरूप व दो चरित्र है چ निर्गुण आत्मस्वरूप में विद्यमान है। कर्मभूमि पर कर्मयोगी  लिए, आत्मकल्याण  करने के a F 3TTT इश्वर ஈக்#ீ# सत्यस्वरूप को जानने की जरूरत है। ज्ञात रहे मानव के सत्कर्म और सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है, मानव के ईश्वर की सच्ची पूजा है। मानव को कर्मभूमि पर ईश्वर की पूजा करने की नहीं , ईश्वर द्वारा दिये गए कर्म करने के ज्ञान को ग्रहण कर्मभूमि पर कर्मयोगी विदेही भाव में करने की जरूरत है विराट आत्मस्वरूप निष्काम कर्मयोगी बनकर अपने सगुण जीवात्मस्वरूप को त्यागकर अपना आत्मकल्याण कर सकता अतः कर्मभूमि पर कर्मयोगी को अद्भुत रहस्यमय सृष्टि 8 सृजन के रहस्यमय ज्ञान को, मायावी सृष्टि की महामाया को जानने की जरूरत हैं | कर्मभूमि पर जिसने अपने सत्य विराट आत्मस्वरूप को जाना , उसका मानव जीवन सार्थकहो गया Kalki Gyan Sagar gq S1Sஎs க&் अधिक जानकारी के लिए ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश ईश्वर को मानने से ईश्वर की पूजा करने से इंसान का तब तक भला नहीं हो सकता | जब तक इंसान ईश्वर की नहीं मान लेता | कल्कि साधक  फलाग माहन अद्भुत रहस्यमय सृष्टि सृजन के रहस्यमय ईश्वरीय ज्ञानानुसार सृष्टि में देवलोक के सभी देवी - देवता व कर्मभूमि पर मानव निर्गुण ईश्वर का सगुण स्वरूप है।ईश्वर एक है उसके दो स्वरूप मानव के भीतर ईश्वर सगुण जीवात्मस्वरूप व दो चरित्र है چ निर्गुण आत्मस्वरूप में विद्यमान है। कर्मभूमि पर कर्मयोगी  लिए, आत्मकल्याण  करने के a F 3TTT इश्वर ஈக்#ீ# सत्यस्वरूप को जानने की जरूरत है। ज्ञात रहे मानव के सत्कर्म और सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है, मानव के ईश्वर की सच्ची पूजा है। मानव को कर्मभूमि पर ईश्वर की पूजा करने की नहीं , ईश्वर द्वारा दिये गए कर्म करने के ज्ञान को ग्रहण कर्मभूमि पर कर्मयोगी विदेही भाव में करने की जरूरत है विराट आत्मस्वरूप निष्काम कर्मयोगी बनकर अपने सगुण जीवात्मस्वरूप को त्यागकर अपना आत्मकल्याण कर सकता अतः कर्मभूमि पर कर्मयोगी को अद्भुत रहस्यमय सृष्टि 8 सृजन के रहस्यमय ज्ञान को, मायावी सृष्टि की महामाया को जानने की जरूरत हैं | कर्मभूमि पर जिसने अपने सत्य विराट आत्मस्वरूप को जाना , उसका मानव जीवन सार्थकहो गया Kalki Gyan Sagar gq S1Sஎs க&் अधिक जानकारी के लिए - ShareChat
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🙏 माँ वैष्णो देवी - ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश कर्मभूमि पर जिस कर्मयोगी ने अपने भीतर सगुण जीवात्मा वनिर्गुण आत्मा के भेद को जाना  उसका मानव जीवन सार्थक हो गया। कल्का माष्वनक अद्भुत रहस्यमय सृष्टि सृजन के रहस्यमय ईश्वरीय ज्ञानानुसार  सृष्टि के सभी देवी - देवता व मानव निर्गुण ईश्वर का सगुण स्वरूप है। कर्मभूमि पर मानव अपने सगुण जीवात्मस्वरूप को त्यागकर निर्गुण परमब्रह्म स्वरूप बन सकता है। कर्मभूमि पर इस क्रिया को HTar से मुक्ति और " कहा गया है। सगुण परब्रह्म स्वरूप जन्म-्मरण मनुष्य रूपी जीवात्मा देवलोक से कर्मभूमि पर अवतरित होने के लिए प्रकृति के पंचतत्वों से बने मानव रूपी भौतिक शरीर को धारण  करता हैं।ज्ञात रहे मनुष्य रूपी जीवात्मा का कर्मभूमि पर जन्म -्मरण  नहीं , प्रकृति के पंचतत्वों से बने मानव रूपी भौतिक शरीर के भीतर अवतरण होता है। कर्मभूमि पर मनुष्य रूपी जीवात्मा को कर्म करने fa का ज्ञान देने के निर्गुण परमब्रह्म सगुण जीवात्मा के भीतर आत्मस्वरूपता में विद्यमान रहते है। सगुण परब्रह्म स्वरूप मनुष्य रूपी जीवात्मा कर्मभूमि पर विदेही भाव में विराट आत्मस्वरूपता में निष्काम कर्मयोगी बनकर सर्वोच्च मार्ग पर चलकर अपने भीतर देवत्व ्दिव्यता जागृत कर, अपना आत्मकल्याण कर सकता है। आत्मज्ञानी बनों अपना मानव जीवन सार्थक बनाओं अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश कर्मभूमि पर जिस कर्मयोगी ने अपने भीतर सगुण जीवात्मा वनिर्गुण आत्मा के भेद को जाना  उसका मानव जीवन सार्थक हो गया। कल्का माष्वनक अद्भुत रहस्यमय सृष्टि सृजन के रहस्यमय ईश्वरीय ज्ञानानुसार  सृष्टि के सभी देवी - देवता व मानव निर्गुण ईश्वर का सगुण स्वरूप है। कर्मभूमि पर मानव अपने सगुण जीवात्मस्वरूप को त्यागकर निर्गुण परमब्रह्म स्वरूप बन सकता है। कर्मभूमि पर इस क्रिया को HTar से मुक्ति और " कहा गया है। सगुण परब्रह्म स्वरूप जन्म-्मरण मनुष्य रूपी जीवात्मा देवलोक से कर्मभूमि पर अवतरित होने के लिए प्रकृति के पंचतत्वों से बने मानव रूपी भौतिक शरीर को धारण  करता हैं।ज्ञात रहे मनुष्य रूपी जीवात्मा का कर्मभूमि पर जन्म -्मरण  नहीं , प्रकृति के पंचतत्वों से बने मानव रूपी भौतिक शरीर के भीतर अवतरण होता है। कर्मभूमि पर मनुष्य रूपी जीवात्मा को कर्म करने fa का ज्ञान देने के निर्गुण परमब्रह्म सगुण जीवात्मा के भीतर आत्मस्वरूपता में विद्यमान रहते है। सगुण परब्रह्म स्वरूप मनुष्य रूपी जीवात्मा कर्मभूमि पर विदेही भाव में विराट आत्मस्वरूपता में निष्काम कर्मयोगी बनकर सर्वोच्च मार्ग पर चलकर अपने भीतर देवत्व ्दिव्यता जागृत कर, अपना आत्मकल्याण कर सकता है। आत्मज्ञानी बनों अपना मानव जीवन सार्थक बनाओं अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें - ShareChat