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#🪔जय मां दुर्गा शक्ति,जय माता दी। #देश भक्ति #माता वैष्णोदेवी #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
🪔जय मां दुर्गा शक्ति,जय माता दी। - ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश ईश्वर को मानने से ईश्वर की पूजा करने से इंसान का तब तक भला नहीं हो सकता | जब तक इंसान ईश्वर की नहीं मान लेता | कल्कि साधक  फलाग माहन अद्भुत रहस्यमय सृष्टि सृजन के रहस्यमय ईश्वरीय ज्ञानानुसार सृष्टि में देवलोक के सभी देवी - देवता व कर्मभूमि पर मानव निर्गुण ईश्वर का सगुण स्वरूप है।ईश्वर एक है उसके दो स्वरूप मानव के भीतर ईश्वर सगुण जीवात्मस्वरूप व दो चरित्र है چ निर्गुण आत्मस्वरूप में विद्यमान है। कर्मभूमि पर कर्मयोगी  लिए, आत्मकल्याण  करने के a F 3TTT इश्वर ஈக்#ீ# सत्यस्वरूप को जानने की जरूरत है। ज्ञात रहे मानव के सत्कर्म और सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है, मानव के ईश्वर की सच्ची पूजा है। मानव को कर्मभूमि पर ईश्वर की पूजा करने की नहीं , ईश्वर द्वारा दिये गए कर्म करने के ज्ञान को ग्रहण कर्मभूमि पर कर्मयोगी विदेही भाव में करने की जरूरत है विराट आत्मस्वरूप निष्काम कर्मयोगी बनकर अपने सगुण जीवात्मस्वरूप को त्यागकर अपना आत्मकल्याण कर सकता अतः कर्मभूमि पर कर्मयोगी को अद्भुत रहस्यमय सृष्टि 8 सृजन के रहस्यमय ज्ञान को, मायावी सृष्टि की महामाया को जानने की जरूरत हैं | कर्मभूमि पर जिसने अपने सत्य विराट आत्मस्वरूप को जाना , उसका मानव जीवन सार्थकहो गया Kalki Gyan Sagar gq S1Sஎs க&் अधिक जानकारी के लिए ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश ईश्वर को मानने से ईश्वर की पूजा करने से इंसान का तब तक भला नहीं हो सकता | जब तक इंसान ईश्वर की नहीं मान लेता | कल्कि साधक  फलाग माहन अद्भुत रहस्यमय सृष्टि सृजन के रहस्यमय ईश्वरीय ज्ञानानुसार सृष्टि में देवलोक के सभी देवी - देवता व कर्मभूमि पर मानव निर्गुण ईश्वर का सगुण स्वरूप है।ईश्वर एक है उसके दो स्वरूप मानव के भीतर ईश्वर सगुण जीवात्मस्वरूप व दो चरित्र है چ निर्गुण आत्मस्वरूप में विद्यमान है। कर्मभूमि पर कर्मयोगी  लिए, आत्मकल्याण  करने के a F 3TTT इश्वर ஈக்#ீ# सत्यस्वरूप को जानने की जरूरत है। ज्ञात रहे मानव के सत्कर्म और सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है, मानव के ईश्वर की सच्ची पूजा है। मानव को कर्मभूमि पर ईश्वर की पूजा करने की नहीं , ईश्वर द्वारा दिये गए कर्म करने के ज्ञान को ग्रहण कर्मभूमि पर कर्मयोगी विदेही भाव में करने की जरूरत है विराट आत्मस्वरूप निष्काम कर्मयोगी बनकर अपने सगुण जीवात्मस्वरूप को त्यागकर अपना आत्मकल्याण कर सकता अतः कर्मभूमि पर कर्मयोगी को अद्भुत रहस्यमय सृष्टि 8 सृजन के रहस्यमय ज्ञान को, मायावी सृष्टि की महामाया को जानने की जरूरत हैं | कर्मभूमि पर जिसने अपने सत्य विराट आत्मस्वरूप को जाना , उसका मानव जीवन सार्थकहो गया Kalki Gyan Sagar gq S1Sஎs க&் अधिक जानकारी के लिए - ShareChat
#🙏 माँ वैष्णो देवी #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🪔जय मां दुर्गा शक्ति,जय माता दी। #माता वैष्णोदेवी #देश भक्ति
🙏 माँ वैष्णो देवी - ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश कर्मभूमि पर जिस कर्मयोगी ने अपने भीतर सगुण जीवात्मा वनिर्गुण आत्मा के भेद को जाना  उसका मानव जीवन सार्थक हो गया। कल्का माष्वनक अद्भुत रहस्यमय सृष्टि सृजन के रहस्यमय ईश्वरीय ज्ञानानुसार  सृष्टि के सभी देवी - देवता व मानव निर्गुण ईश्वर का सगुण स्वरूप है। कर्मभूमि पर मानव अपने सगुण जीवात्मस्वरूप को त्यागकर निर्गुण परमब्रह्म स्वरूप बन सकता है। कर्मभूमि पर इस क्रिया को HTar से मुक्ति और " कहा गया है। सगुण परब्रह्म स्वरूप जन्म-्मरण मनुष्य रूपी जीवात्मा देवलोक से कर्मभूमि पर अवतरित होने के लिए प्रकृति के पंचतत्वों से बने मानव रूपी भौतिक शरीर को धारण  करता हैं।ज्ञात रहे मनुष्य रूपी जीवात्मा का कर्मभूमि पर जन्म -्मरण  नहीं , प्रकृति के पंचतत्वों से बने मानव रूपी भौतिक शरीर के भीतर अवतरण होता है। कर्मभूमि पर मनुष्य रूपी जीवात्मा को कर्म करने fa का ज्ञान देने के निर्गुण परमब्रह्म सगुण जीवात्मा के भीतर आत्मस्वरूपता में विद्यमान रहते है। सगुण परब्रह्म स्वरूप मनुष्य रूपी जीवात्मा कर्मभूमि पर विदेही भाव में विराट आत्मस्वरूपता में निष्काम कर्मयोगी बनकर सर्वोच्च मार्ग पर चलकर अपने भीतर देवत्व ्दिव्यता जागृत कर, अपना आत्मकल्याण कर सकता है। आत्मज्ञानी बनों अपना मानव जीवन सार्थक बनाओं अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश कर्मभूमि पर जिस कर्मयोगी ने अपने भीतर सगुण जीवात्मा वनिर्गुण आत्मा के भेद को जाना  उसका मानव जीवन सार्थक हो गया। कल्का माष्वनक अद्भुत रहस्यमय सृष्टि सृजन के रहस्यमय ईश्वरीय ज्ञानानुसार  सृष्टि के सभी देवी - देवता व मानव निर्गुण ईश्वर का सगुण स्वरूप है। कर्मभूमि पर मानव अपने सगुण जीवात्मस्वरूप को त्यागकर निर्गुण परमब्रह्म स्वरूप बन सकता है। कर्मभूमि पर इस क्रिया को HTar से मुक्ति और " कहा गया है। सगुण परब्रह्म स्वरूप जन्म-्मरण मनुष्य रूपी जीवात्मा देवलोक से कर्मभूमि पर अवतरित होने के लिए प्रकृति के पंचतत्वों से बने मानव रूपी भौतिक शरीर को धारण  करता हैं।ज्ञात रहे मनुष्य रूपी जीवात्मा का कर्मभूमि पर जन्म -्मरण  नहीं , प्रकृति के पंचतत्वों से बने मानव रूपी भौतिक शरीर के भीतर अवतरण होता है। कर्मभूमि पर मनुष्य रूपी जीवात्मा को कर्म करने fa का ज्ञान देने के निर्गुण परमब्रह्म सगुण जीवात्मा के भीतर आत्मस्वरूपता में विद्यमान रहते है। सगुण परब्रह्म स्वरूप मनुष्य रूपी जीवात्मा कर्मभूमि पर विदेही भाव में विराट आत्मस्वरूपता में निष्काम कर्मयोगी बनकर सर्वोच्च मार्ग पर चलकर अपने भीतर देवत्व ्दिव्यता जागृत कर, अपना आत्मकल्याण कर सकता है। आत्मज्ञानी बनों अपना मानव जीवन सार्थक बनाओं अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें - ShareChat
#🪔जय मां दुर्गा शक्ति,जय माता दी। #🙏 माँ वैष्णो देवी #माता वैष्णोदेवी #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
🪔जय मां दुर्गा शक्ति,जय माता दी। - ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश  निराकार ईश्वर ज्ञान एवं आत्मशक्ति स्वरूप है कर्मभूमि पर ईश्वर का जन्म-्मरण नहीं मानव के हृदय में ज्ञान व शक्ति स्वरूप अवतरण होता है। कल्कि साधक  फलाग माहन अग्नि' नामक ऋषि wনীন वायु' नामक ऋषि यजुर्वेद ೆಕ नामक ऋषि सामवेद आदित्य' अथर्ववेद अङ्गिरा ' नामक ऋषि ऊपर जो ऋषि मुनियों के नाम लिखे गये है, ये सभी ऋषि मुनि वेदों के लेखक या रचयिता नहीं हैं। वेद तो नित्य हैं अतः उनकी रचना नहीं होती ।वेद तो ईश्वर-्प्रदत्त ज्ञान है। सृष्टि के प्रारंभ में वेद-्ज्ञान इन ऋषि मुनियों के चार पवित्रतम अंतःकरण में समाधि की अवस्था में प्रकाशित हुआ था।जिसे ऋषि-् मुनियों द्वारा ` मानव जगत के हितार्थ लिपि बद्ध सम्पूर्ण  मानव जगत के सभी कर्मयोगियों किया गया। अतः ஈர को बिना किसी भेद भाव के वेदों पर आधारित सत्कर्म और सेवा रूपी सनातन धर्म को ही मानव धर्म मानना चाहिए सत्कर्मी बनों सुखी रहो " ( Kalki Gyan Sagar gq S1Sஎs க&் अधिक जानकारी के लिए ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश  निराकार ईश्वर ज्ञान एवं आत्मशक्ति स्वरूप है कर्मभूमि पर ईश्वर का जन्म-्मरण नहीं मानव के हृदय में ज्ञान व शक्ति स्वरूप अवतरण होता है। कल्कि साधक  फलाग माहन अग्नि' नामक ऋषि wনীন वायु' नामक ऋषि यजुर्वेद ೆಕ नामक ऋषि सामवेद आदित्य' अथर्ववेद अङ्गिरा ' नामक ऋषि ऊपर जो ऋषि मुनियों के नाम लिखे गये है, ये सभी ऋषि मुनि वेदों के लेखक या रचयिता नहीं हैं। वेद तो नित्य हैं अतः उनकी रचना नहीं होती ।वेद तो ईश्वर-्प्रदत्त ज्ञान है। सृष्टि के प्रारंभ में वेद-्ज्ञान इन ऋषि मुनियों के चार पवित्रतम अंतःकरण में समाधि की अवस्था में प्रकाशित हुआ था।जिसे ऋषि-् मुनियों द्वारा ` मानव जगत के हितार्थ लिपि बद्ध सम्पूर्ण  मानव जगत के सभी कर्मयोगियों किया गया। अतः ஈர को बिना किसी भेद भाव के वेदों पर आधारित सत्कर्म और सेवा रूपी सनातन धर्म को ही मानव धर्म मानना चाहिए सत्कर्मी बनों सुखी रहो " ( Kalki Gyan Sagar gq S1Sஎs க&் अधिक जानकारी के लिए - ShareChat
भारत को विश्व का प्रथम विकसित देश बनाना है तो युवा नोकरी देने वाले बने ढूंढने वाले नहीं… https://kalkigyansagar.com?p=1988 #देश भक्ति #माता वैष्णोदेवी #🪔जय मां दुर्गा शक्ति,जय माता दी। #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🙏 माँ वैष्णो देवी
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#माता वैष्णोदेवी https://youtu.be/zjlqWc9jeC0?si=top7hEv-xDSve33B
माता वैष्णोदेवी - युग परिवर्तन कीं संधिवेला संगमयुग में कर्मभूमि पर लिए सतंयुंगी का सृजन करने के दुनियां दिव्यमहाशक्ति निर्गुण परमब्रह्म व दैविक महाशक्ति सगुण परब्रह्म कर्मभूमि पर अवतरित होकर नवीनं faa धर्म की स्थापनां करने के बाद कलयुग को सतयुग में परिणिंत करने का कार्य शुरू कर दिया है। अधिक जानकारी केलिए KALKI GYAN SAGAR wwwkalkigyansagarcom WV W W युग परिवर्तन कीं संधिवेला संगमयुग में कर्मभूमि पर लिए सतंयुंगी का सृजन करने के दुनियां दिव्यमहाशक्ति निर्गुण परमब्रह्म व दैविक महाशक्ति सगुण परब्रह्म कर्मभूमि पर अवतरित होकर नवीनं faa धर्म की स्थापनां करने के बाद कलयुग को सतयुग में परिणिंत करने का कार्य शुरू कर दिया है। अधिक जानकारी केलिए KALKI GYAN SAGAR wwwkalkigyansagarcom WV W W - ShareChat
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