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#🪔यशोदा जयंती🌺 🚩 उज्जैन की अधिष्ठात्री: माँ हरसिद्धि देवी और सम्राट विक्रमादित्य की अनसुनी गाथा 🚩 उज्जैन केवल महाकाल की नगरी नहीं, बल्कि शक्ति की भक्ति का भी केंद्र है। यहाँ स्थित है 51 शक्तिपीठों में से एक—हरसिद्धि माता मंदिर। 🔥 पौराणिक कथा: जब भगवान शिव सती के जलते हुए शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े किए। उज्जैन के इस पावन स्थान पर माता की कोहनी (कूर्पर) गिरी थी, जिससे यह स्थान सिद्ध शक्तिपीठ बना। 👑 राजा विक्रमादित्य और 11 शीशों का रहस्य: इतिहास गवाह है कि सम्राट विक्रमादित्य माँ हरसिद्धि के परम भक्त थे। किंवदंतियों के अनुसार, राजा ने 11 बार अपना शीश काटकर माँ के चरणों में अर्पित किया, और हर बार माँ ने उन्हें पुनः जीवित कर दिया। यही वो दैवीय शक्ति थी जिसके बल पर विक्रमादित्य ने 'विक्रम संवत' की शुरुआत की। 🪔 मंदिर की भव्यता: मंदिर प्रांगण में दो विशाल दीप स्तंभ हैं—'शिव' (501 दीपक) और 'पार्वती' (500 दीपक)। जब ये 1001 दीपक एक साथ जलते हैं, तो वह दृश्य अलौकिक होता है। यहाँ श्री यंत्र की पूजा का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि यहाँ दर्शन करने से शिव और शक्ति, दोनों की कृपा प्राप्त होती है। जय माँ हरसिद्धि! जय महाकाल! 🙏🌺 !! जय जय श्री राधे !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ #🙏कर्म क्या है❓ #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🕉️सनातन धर्म🚩
🪔यशोदा जयंती🌺 - राजा विक्रमादित्य और माँ हरसिद्धि देवी की कथा राजा विक्रमादित्य और माँ हरसिद्धि देवी की कथा - ShareChat