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🚩 अद्भुत रामायण ज्ञान: काकभुशुण्डि की अमर कथा 🚩 आखिर कौन थे काकभुशुण्डि? क्यों एक कौए को माना जाता है परमज्ञानी राम भक्त? क्यों उन्हें लेना पड़ा 1000 बार जन्म और कैसे उन्होंने मिटाया गरुड़ जी का संदेह? गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के उत्तर काण्ड में इस दिव्य चरित्र का अद्भुत वर्णन किया है। आइए जानते हैं उनके रहस्यमयी जीवन की पूरी कहानी। 👇 🦅 गरुड़ का संदेह और काकभुशुण्डि से भेंट लंका युद्ध के दौरान जब मेघनाद ने भगवान राम को 'नागपाश' में बांध दिया, तब देवर्षि नारद के कहने पर गरुड़ जी ने आकर उन्हें मुक्त किया। लेकिन, स्वयं भगवान को बंधनों में देख गरुड़ को उनके 'परमब्रह्म' होने पर संदेह हो गया। इस संदेह को मिटाने के लिए नारद जी ने उन्हें ब्रह्मा जी के पास, ब्रह्मा जी ने शिव जी के पास और अंत में भगवान शिव ने उन्हें परमज्ञानी काकभुशुण्डि के पास भेजा। काकभुशुण्डि जी ने गरुड़ को पवित्र राम कथा सुनाई और उनका संदेह दूर किया। 📜 काकभुशुण्डि के पूर्व जन्म और श्राप की कहानी काकभुशुण्डि की कहानी अहंकार से भक्ति तक की यात्रा है। 🔹 पहला जन्म और शिव का श्राप: अपने प्रथम जन्म में वे अयोध्या में एक शिव भक्त थे, लेकिन अहंकारवश अन्य देवताओं की निंदा करते थे। बाद में उज्जैन में एक दयालु गुरु की शरण में गए। लेकिन वहां भी उनका अहंकार बढ़ा और उन्होंने भगवान विष्णु से द्रोह किया। एक दिन शिव मंदिर में अपने गुरु का अपमान करने पर भगवान शिव ने क्रोधित होकर उन्हें श्राप दिया: "तू सर्प योनि में जा और इसके बाद तुझे 1000 बार अलग-अलग योनियों में जन्म लेना पड़ेगा।" 🔹 गुरु की कृपा और वरदान: गुरु ने दयालु होकर शिव जी से क्षमा मांगी। शिव जी ने श्राप तो वापस नहीं लिया, लेकिन वरदान दिया: "इसे 1000 जन्म लेने पड़ेंगे, लेकिन जन्म-मृत्यु का कष्ट नहीं होगा, ज्ञान नष्ट नहीं होगा और इसे पूर्व जन्मों की स्मृति बनी रहेगी। अंत में इसे श्रीराम की भक्ति प्राप्त होगी।" 🐦 कैसे बने 'कौआ' (काकभुशुण्डि)? हजारों जन्मों के बाद, अंतिम जन्म में वे ब्राह्मण बने और ज्ञान प्राप्ति के लिए लोमस ऋषि के पास गए। वहां ऋषि से तर्क-वितर्क और हठ करने पर क्रोधित होकर लोमस ऋषि ने श्राप दिया: "जा तू चंडाल पक्षी (कौआ) हो जा।" वे तुरंत कौआ बन गए। बाद में ऋषि को पछतावा हुआ, उन्होंने उसे वापस बुलाकर 'राम मंत्र' दिया और 'इच्छामृत्यु' का वरदान दिया। कौए के शरीर में ही राम मंत्र मिलने के कारण उन्हें इस रूप से प्रेम हो गया और वे 'काकभुशुण्डि' कहलाए। 🕉️ प्रभु राम का साक्षात्कार और अमरता कौए के रूप में एक बार उनकी भेंट बाल रूप भगवान राम से हुई। जब प्रभु खेल रहे थे, तो काकभुशुण्डि ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की। तभी उन्हें भगवान के मुख के भीतर पूरे ब्रह्मांड और आकाशगंगाओं के दर्शन हुए। वे समझ गए कि यह कोई साधारण बालक नहीं, स्वयं परमेश्वर हैं। उन्होंने क्षमा मांगी। भगवान राम ने प्रसन्न होकर उन्हें भक्ति का वरदान दिया और अमर कर दिया। राम जी ने आशीर्वाद दिया कि काल (समय) काकभुशुण्डि को नहीं मार सकता और वे कल्प के अंत तक जीवित रहेंगे। ✨ अद्भुत तथ्य: 👁️‍🗨️ वेदों और पुराणों के अनुसार, काकभुशुण्डि जी ने 11 बार रामायण और 16 बार महाभारत का युद्ध देखा है। ⏳ वे आज भी अमर हैं। जब भी भगवान राम का अवतार होता है, वे अयोध्या जाकर उनकी बाल लीलाओं का दर्शन करते हैं। जय श्री राम! 🙏 #रामचरितमानस #रामायण #जय श्री राम
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