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#मंत्र एवं मंत्र जप
मंत्र एवं मंत्र जप - ३४ँ नमश्चण्डिकायै। मन्त्र जपने की सरल विधि निम्न मन्त्र से देवी का ध्यान एवं पूजन करें॰ ३४० नमस्तेउस्तु महारौद्रे महाघोर - पराक्रमे। महाबले महोत्साहे महाभयविनाशिनि। | प्रतिदिन स्नान। शुद्धिकरण करके प्रातः सायं॰   रोरी, सिन्दूर, चन्दन, अक्षत , पुष्प, प्रसाद, जल से श्रद्धा पूर्वक देवी की प्रतिमा का पूजन करें। उन्हें धूप, दीप दिखायें और मन्त्र जप आरंभ कर दें। समयाभाव हो तो शुद्धता पूर्वक  भगवती का मन में ध्यान करके जप करें। भक्तो! उपासना में भक्ति-भाव को प्रधानता होती है। दाहिने हाथ में থনা বন্ন ব্ধী সালা লব্ধং সনিিন বব্চ সালা/ तुलसी  की भी पूजा कर लें। ग्यारह माला जप करें। जपते समय निम्न मन्त्र से माला अविघ्नं कुरु माले त्वं गृह्णामि दक्षिणे करे। 3 जपकाले च सिद्ध्यर्थं प्रसीद मम सिद्धये।। पूर्वाभिमुख ( पूर्व को ओर मुँह करके ) पद्मासन में (आलथी- जप मुद्रां पालथी मारकर) बैठ जायें। फिर दाहिने हाथ की अनामिका और मध्यमा अंगुलि एवं अंगुठे के मध्य माला का एक॰एक मनका ( दाना ) बढ़ाते हुए मन्त्र जप करें। तीन। नौ/ ग्यारह/ सोलह बार/एक माला/दस माला या मन्त्र जप संख्या इससे अधिक यथा साध्य यथा समय। जप के उपरान्त अपना पावन जप देवी को अर्पित करें इस निवेदन के साथ कि हे देवि! आप मेरे जप मन्त्र को स्वीकार करें तथा अपने कृपा प्रसाद ३४ँ नमश्चण्डिकायै। मन्त्र जपने की सरल विधि निम्न मन्त्र से देवी का ध्यान एवं पूजन करें॰ ३४० नमस्तेउस्तु महारौद्रे महाघोर - पराक्रमे। महाबले महोत्साहे महाभयविनाशिनि। | प्रतिदिन स्नान। शुद्धिकरण करके प्रातः सायं॰   रोरी, सिन्दूर, चन्दन, अक्षत , पुष्प, प्रसाद, जल से श्रद्धा पूर्वक देवी की प्रतिमा का पूजन करें। उन्हें धूप, दीप दिखायें और मन्त्र जप आरंभ कर दें। समयाभाव हो तो शुद्धता पूर्वक  भगवती का मन में ध्यान करके जप करें। भक्तो! उपासना में भक्ति-भाव को प्रधानता होती है। दाहिने हाथ में থনা বন্ন ব্ধী সালা লব্ধং সনিিন বব্চ সালা/ तुलसी  की भी पूजा कर लें। ग्यारह माला जप करें। जपते समय निम्न मन्त्र से माला अविघ्नं कुरु माले त्वं गृह्णामि दक्षिणे करे। 3 जपकाले च सिद्ध्यर्थं प्रसीद मम सिद्धये।। पूर्वाभिमुख ( पूर्व को ओर मुँह करके ) पद्मासन में (आलथी- जप मुद्रां पालथी मारकर) बैठ जायें। फिर दाहिने हाथ की अनामिका और मध्यमा अंगुलि एवं अंगुठे के मध्य माला का एक॰एक मनका ( दाना ) बढ़ाते हुए मन्त्र जप करें। तीन। नौ/ ग्यारह/ सोलह बार/एक माला/दस माला या मन्त्र जप संख्या इससे अधिक यथा साध्य यथा समय। जप के उपरान्त अपना पावन जप देवी को अर्पित करें इस निवेदन के साथ कि हे देवि! आप मेरे जप मन्त्र को स्वीकार करें तथा अपने कृपा प्रसाद - ShareChat