ShareChat
click to see wallet page
search
माँ महागौरी #पूजन विधि
पूजन विधि - देवी महागौरी प्रिय पुष्प रात की रानी 7 देवी महागौर्यै नमः Il সাথনা वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा II  सर्वभूतेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी ध्यान वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम् चतुर्भुजा महागौरी यशस्विनीम् I। सिंहारूढा  पूर्णन्दु निभाम् गौरी सोमचक्रस्थिताम् अष्टमम् महागौरी त्रिनेत्राम् 937 Il डमरूधरां महागौरी " স্িহাুল ` वराभीतिकरां पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम् केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम् मञ्जीर, हार, मोहनम्। प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् त्रैलोक्य कमनीयां लावण्यां मृणालां चन्दन गन्धलिप्ताम् II सर्वसङ्कट   हन्त्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्। चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाम्यहम् II রাননা सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदायनीम्। महागौरी प्रणमाम्यहम् II डमरूवाद्य प्रिया अद्या त्रैलोक्यमङ्गल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्। वददम् चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम् II कवच शीर्षो माँ, हीं बीजम् माँ, हृदयो अँकारः पातु क्लीं बीजम् सदापातु नभो गृहो च पादयो Il ललाटम् कर्णो हुं बीजम् पातु महागौरी माँ नेत्रम् घ्राणो कपोत चिबुको फट् पातु स्वाहा माँ सर्ववदनो II आरती महागौरी जगत की माया जय उमा भवानी जय महामाया जय महागौरी तेरा वहा निवासा Il हरिद्वार कनखल के पासा चन्द्रकली और ममता अम्बे जय शक्ति जय जय माँ जगदम्बे ।I कौशिक देवी जग विख्यता भीमा देवी विमला माता हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा II सती ( सत ) हवन कुण्ड में था जलाया उसी धुयें ने रूप काली बनाया II fa तो शंकर ने बना धर्म सिंह जो सवारी में आया अपना दिखाया ।I तभी माँ ने महागौरी नाम पाया হাংতা সান নাল ক্ধা মন্ধ সিভাযা Il शनिवार को तेरी पूजा जो करता माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता II बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो। महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो Il  भक्त देवी महागौरी प्रिय पुष्प रात की रानी 7 देवी महागौर्यै नमः Il সাথনা वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा II  सर्वभूतेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी ध्यान वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम् चतुर्भुजा महागौरी यशस्विनीम् I। सिंहारूढा  पूर्णन्दु निभाम् गौरी सोमचक्रस्थिताम् अष्टमम् महागौरी त्रिनेत्राम् 937 Il डमरूधरां महागौरी " স্িহাুল ` वराभीतिकरां पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम् केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम् मञ्जीर, हार, मोहनम्। प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् त्रैलोक्य कमनीयां लावण्यां मृणालां चन्दन गन्धलिप्ताम् II सर्वसङ्कट   हन्त्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्। चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाम्यहम् II রাননা सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदायनीम्। महागौरी प्रणमाम्यहम् II डमरूवाद्य प्रिया अद्या त्रैलोक्यमङ्गल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्। वददम् चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम् II कवच शीर्षो माँ, हीं बीजम् माँ, हृदयो अँकारः पातु क्लीं बीजम् सदापातु नभो गृहो च पादयो Il ललाटम् कर्णो हुं बीजम् पातु महागौरी माँ नेत्रम् घ्राणो कपोत चिबुको फट् पातु स्वाहा माँ सर्ववदनो II आरती महागौरी जगत की माया जय उमा भवानी जय महामाया जय महागौरी तेरा वहा निवासा Il हरिद्वार कनखल के पासा चन्द्रकली और ममता अम्बे जय शक्ति जय जय माँ जगदम्बे ।I कौशिक देवी जग विख्यता भीमा देवी विमला माता हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा II सती ( सत ) हवन कुण्ड में था जलाया उसी धुयें ने रूप काली बनाया II fa तो शंकर ने बना धर्म सिंह जो सवारी में आया अपना दिखाया ।I तभी माँ ने महागौरी नाम पाया হাংতা সান নাল ক্ধা মন্ধ সিভাযা Il शनिवार को तेरी पूजा जो करता माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता II बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो। महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो Il  भक्त - ShareChat