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#good morning #शब्द संवाद #✍️ साहित्य एवं शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह #📓 हिंदी साहित्य
good morning - என்ஞலி देखो नातुम कातर दृष्टि सेना जीओ तुम निराश होकरा बैठे बैठे यूं जीवन ना खोचो गिर जाओगे तुम मूर्छित होकरा [ जीवन माया का मोह नहीं यह तो एक पल का मेला है। ना जाने हादसा घट जाए कब ,ना   साथी तेरा तू अकेला हैll खेल जवानी का॰ कुछ होश नहीं नादानी का। कैसा यह मातःपिता   सब भूले है आज साथ देते सभी महारानी का। [ इस माटी  की कीमत जानो खनखन खनके हल से सोना। भूले है,कभी : भी इसर्मे सोना । [ आज माटी को सभी तुमको कदम बर्ढ़ें तो मंजिल आसान मुश्किल नहीं कुछ भी काम ा मान लो  तब हार यह जीवन ठान लो समझो विजय तमामा [ लक्ष्य है तभी सफलता सारी भटकाव र्मे सिर्फ मिले निराशा [ छोटा, मनर्मे गगन छूने की हो आशाा [ साहस के आगे पर्चत अवसर तभी प्रयास   रहे जारी कर्म बिना हर राह अनजानी[ ঐমানী[ [ धन है समझो   जिंग तुम्हारा , नहीं तो समझो दुनिया जिसने जीघन को पहचाना बही उन्रति की राह पकड़ता [ साहस के साथ विश्वास मौजूद  चही पर्वत की चोटी चढ़ता { { दिशाहीन मंजिल नहीं पाते है सिर्फ ख्याबों र्मे महल सजाएं। वह ऐसे खरपतचार पोषक तत्वों को चे पहले ही चख जाएं। [ फैली है अशांति इस धरा पर तुम उठ करके पर्दाफाश करो । ना घूमो तुम कायर बनकर नर हो तुम नव निर्माण करो।[ என்ஞலி देखो नातुम कातर दृष्टि सेना जीओ तुम निराश होकरा बैठे बैठे यूं जीवन ना खोचो गिर जाओगे तुम मूर्छित होकरा [ जीवन माया का मोह नहीं यह तो एक पल का मेला है। ना जाने हादसा घट जाए कब ,ना   साथी तेरा तू अकेला हैll खेल जवानी का॰ कुछ होश नहीं नादानी का। कैसा यह मातःपिता   सब भूले है आज साथ देते सभी महारानी का। [ इस माटी  की कीमत जानो खनखन खनके हल से सोना। भूले है,कभी : भी इसर्मे सोना । [ आज माटी को सभी तुमको कदम बर्ढ़ें तो मंजिल आसान मुश्किल नहीं कुछ भी काम ा मान लो  तब हार यह जीवन ठान लो समझो विजय तमामा [ लक्ष्य है तभी सफलता सारी भटकाव र्मे सिर्फ मिले निराशा [ छोटा, मनर्मे गगन छूने की हो आशाा [ साहस के आगे पर्चत अवसर तभी प्रयास   रहे जारी कर्म बिना हर राह अनजानी[ ঐমানী[ [ धन है समझो   जिंग तुम्हारा , नहीं तो समझो दुनिया जिसने जीघन को पहचाना बही उन्रति की राह पकड़ता [ साहस के साथ विश्वास मौजूद  चही पर्वत की चोटी चढ़ता { { दिशाहीन मंजिल नहीं पाते है सिर्फ ख्याबों र्मे महल सजाएं। वह ऐसे खरपतचार पोषक तत्वों को चे पहले ही चख जाएं। [ फैली है अशांति इस धरा पर तुम उठ करके पर्दाफाश करो । ना घूमो तुम कायर बनकर नर हो तुम नव निर्माण करो।[ - ShareChat