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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - जाकीलीलाकी मिति नाहि। सगल देव ह्ारे अवगाहिय mder Bhulana_Edts अर्थः उस परमात्मा की सीमा , मर्यादा के खेल या उसकी ম নয रचना का कोई अंत नहीं है। वह कितना बड़ा है और उसकी शक्तियाँ कितनी विस्तार वाली हैं॰ इसे मापा नहीं जा भिखारी নিম্লান, सकता। सभी देवता बड़ेन्बड़े दिव्य शक्तियाँ हार गई, में उतरते हुए या विचार करते थक गईखोजते हुए, गहराई ' जिओ हुए पर उस परमात्मा की महिमा का अंत नहीं पा सके। जब बड़े बड़े देवता जिन्हें हम ज्ञान का ःप्रतीक मानते हैं उस 461ST परमात्मा को पूरी तरह नहीं समझ पाए, तो मनुष्य को अपने ज्ञान पर अहंकार नहीं करना चाहिए। जैसे समुद्र में বাল है, वैसे ही ऋषि मुनि और गोताखोर गहराई ढूँढने Ga विद्वान ' परमात्मा के गुणों में उतरे, पर वह इतना बेअंत है बाबा कि सब थक कर यही बोले नेति नेति परमात्मा ऐसा भी नहीं, अंत ऐसा भी नहीं है। जब मनुष्य को यह समझ आ 5ಗ जाती है किमैं सब कुछ नहीं जानता," तब उसके अंदर होंमें "विस्माद " खत्म हो जाती है फिर वह तर्क करना छोड़ कर कुदरत का आनंद लेना शुरू कर देता है। जाकीलीलाकी मिति नाहि। सगल देव ह्ारे अवगाहिय mder Bhulana_Edts अर्थः उस परमात्मा की सीमा , मर्यादा के खेल या उसकी ম নয रचना का कोई अंत नहीं है। वह कितना बड़ा है और उसकी शक्तियाँ कितनी विस्तार वाली हैं॰ इसे मापा नहीं जा भिखारी নিম্লান, सकता। सभी देवता बड़ेन्बड़े दिव्य शक्तियाँ हार गई, में उतरते हुए या विचार करते थक गईखोजते हुए, गहराई ' जिओ हुए पर उस परमात्मा की महिमा का अंत नहीं पा सके। जब बड़े बड़े देवता जिन्हें हम ज्ञान का ःप्रतीक मानते हैं उस 461ST परमात्मा को पूरी तरह नहीं समझ पाए, तो मनुष्य को अपने ज्ञान पर अहंकार नहीं करना चाहिए। जैसे समुद्र में है, वैसे ही ऋषि मुनि और गोताखोर गहराई ढूँढने Ga विद्वान ' परमात्मा के गुणों में उतरे, पर वह इतना बेअंत है बाबा कि सब थक कर यही बोले नेति नेति परमात्मा ऐसा भी नहीं, अंत ऐसा भी नहीं है। जब मनुष्य को यह समझ आ 5ಗ जाती है किमैं सब कुछ नहीं जानता," तब उसके अंदर होंमें "विस्माद " खत्म हो जाती है फिर वह तर्क करना छोड़ कर कुदरत का आनंद लेना शुरू कर देता है। - ShareChat