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##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - সীবন বূন युगऋषि का संक्षिप्त वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य (1911 1990) जन्म- आश्विन कृष्ण त्रयोदशी आवलखेड़ा (आगरा उत्तरप्रदेश) | 1911 1923 वसन्त पञ्चमी पर महामना मालवीय जी द्वारा काशी में गायत्रीमन्त्र की दीक्षा प्रदान की गयी। 1926 वरान्त पञ्चमी पर सूक्ष्म शरीरधारी गुरुसता से साक्षात्कार , अखण्ड दीप का प्रज्वलन , २४ २४ लक्ष के २४ महापुरश्वरणों का शुमारम्भ | 1929 (जून जुलाई ) दादागुरु के आदेश पर प्रथम हिमालय यात्रा | 1930 वर्ष १९३० से वर्ष १९३६ तक र्वतन्त्रता संग्राम में र्सक्रिय भागीदारी | 1937 अखण्ड ज्याति ' पत्रिका का प्रकाशन प्रारम्भ आगरा नगर से। घीयामण्डी , मथुरा में आगमन एवं अखण्ड ज्योति कार्यालय की स्थापना [ 1940 ज्योति  पत्रिका का आगरा से नियमित प्रकाशन प्रारम्भ  1941 अखण्ड 1944 वर्ष १९४३ में विवाहोपरान्त वन्दनीया माता भगवती देवी का घीयामण्डी मथुरा में आगमन | 1953 गायत्री तपोभूमि की स्थापना महापुरश्चरण साधना की पूर्णाहुति | १००८ कुण्डीय यज्ञ , गायतरी तपोभूमि मथुरा ] 1958 1960-61 दादागुरु के आदेश पर द्वितीय हिमालय यात्रा |  1971-72 तृतीय हिमालय यात्रा के बाद शान्तिकुञ्ज हरिद्वार गें निवास|  1984-86 सक्ष्मोकरण साधना एवं साहित्य सृजन।  जयन्ती पर्व पर महाप्रयाण आद्यशक्त की सूक्ष्म  1990 TIi २ जून विलय शान्तिकञ्ज हरिद्वार | বননা সীবন বূন युगऋषि का संक्षिप्त वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य (1911 1990) जन्म- आश्विन कृष्ण त्रयोदशी आवलखेड़ा (आगरा उत्तरप्रदेश) | 1911 1923 वसन्त पञ्चमी पर महामना मालवीय जी द्वारा काशी में गायत्रीमन्त्र की दीक्षा प्रदान की गयी। 1926 वरान्त पञ्चमी पर सूक्ष्म शरीरधारी गुरुसता से साक्षात्कार , अखण्ड दीप का प्रज्वलन , २४ २४ लक्ष के २४ महापुरश्वरणों का शुमारम्भ | 1929 (जून जुलाई ) दादागुरु के आदेश पर प्रथम हिमालय यात्रा | 1930 वर्ष १९३० से वर्ष १९३६ तक र्वतन्त्रता संग्राम में र्सक्रिय भागीदारी | 1937 अखण्ड ज्याति ' पत्रिका का प्रकाशन प्रारम्भ आगरा नगर से। घीयामण्डी , मथुरा में आगमन एवं अखण्ड ज्योति कार्यालय की स्थापना [ 1940 ज्योति  पत्रिका का आगरा से नियमित प्रकाशन प्रारम्भ  1941 अखण्ड 1944 वर्ष १९४३ में विवाहोपरान्त वन्दनीया माता भगवती देवी का घीयामण्डी मथुरा में आगमन | 1953 गायत्री तपोभूमि की स्थापना महापुरश्चरण साधना की पूर्णाहुति | १००८ कुण्डीय यज्ञ , गायतरी तपोभूमि मथुरा ] 1958 1960-61 दादागुरु के आदेश पर द्वितीय हिमालय यात्रा |  1971-72 तृतीय हिमालय यात्रा के बाद शान्तिकुञ्ज हरिद्वार गें निवास|  1984-86 सक्ष्मोकरण साधना एवं साहित्य सृजन।  जयन्ती पर्व पर महाप्रयाण आद्यशक्त की सूक्ष्म  1990 TIi २ जून विलय शान्तिकञ्ज हरिद्वार | বননা - ShareChat