ShareChat
click to see wallet page
search
#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - नम8 शिवाय Ce पुत्तर आज के समय मे लोग अक्सर प्रेम के नाम पर दूसरे को @ अपनी शर्तों पर चलाना चाहते हैं, लेकिन असली प्रेम ி दूसरे देखना है,जब भी किसी मनुष्य के भीतर खुशी में अपनी ತ9f' प्रेम में मतलब खत्म हो जाता है, तभी उसका परमात्मा के १ जब हम किसी पर कब्जा प्रति सच्चा धर्म बन जाता है करने की कोशिश करते हैं, तो वह प्रेम नहीं बल्कि हमारा अहंकार और मोह होता है है, जिबकि सच्चा कब्जा बाधता ' Tw प्रेम पंख देता है...!!किसी को अस्वीकार करने में संघर्ष है और स्वीकार में ही शांति जन्म लेती है, किसी व्यक्ति को वैसा ही स्वीकार करना जैसा वह है, और उसे अपनी मर्जी से जीने की Gww आजादी देना ही प्रेम की उच्चतम अवस्था है..!! जीवन का समाधान कभी बाहर नहीं , सदा भीतर ही घटित होता है जब भीतर से पूर्ण और शांत होते हैं तब हमारा प्रेम एक J6 हम ऐसी खुशबू बन जाता है जो सबको स्वतंत्र रखती है तब हमको दूसरे को नियंत्रित करने की जरूरत नहीं पड़ती ..!! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय। [ नम8 शिवाय Ce पुत्तर आज के समय मे लोग अक्सर प्रेम के नाम पर दूसरे को @ अपनी शर्तों पर चलाना चाहते हैं, लेकिन असली प्रेम ி दूसरे देखना है,जब भी किसी मनुष्य के भीतर खुशी में अपनी ತ9f' प्रेम में मतलब खत्म हो जाता है, तभी उसका परमात्मा के १ जब हम किसी पर कब्जा प्रति सच्चा धर्म बन जाता है करने की कोशिश करते हैं, तो वह प्रेम नहीं बल्कि हमारा अहंकार और मोह होता है है, जिबकि सच्चा कब्जा बाधता ' Tw प्रेम पंख देता है...!!किसी को अस्वीकार करने में संघर्ष है और स्वीकार में ही शांति जन्म लेती है, किसी व्यक्ति को वैसा ही स्वीकार करना जैसा वह है, और उसे अपनी मर्जी से जीने की Gww आजादी देना ही प्रेम की उच्चतम अवस्था है..!! जीवन का समाधान कभी बाहर नहीं , सदा भीतर ही घटित होता है जब भीतर से पूर्ण और शांत होते हैं तब हमारा प्रेम एक J6 हम ऐसी खुशबू बन जाता है जो सबको स्वतंत्र रखती है तब हमको दूसरे को नियंत्रित करने की जरूरत नहीं पड़ती ..!! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय। [ - ShareChat