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#भारतीय इतिहास का, कीजे
भारतीय इतिहास का, कीजे - भारतीय इतिहास का, कीजे अनुसंधान देव दनुज किन्नर सभी , किया सोमरस पान किया सोमरस पान, पियें कवि, लेखक, शायर जो इससे बच जाये, उसे कहते हैं 'कायर' कहँ काका' , कवि 'बच्चन' ने पीकर दो प्याला दो घंटे में लिख डाली , पूरी ' मधुशाला ' भेदभाव  से मुक्त यह, क्या ऊँचा क्या नीच अहिरावण पीता इसे , पीता था मारीच पीता था मारीच, स्वर्ण- मृग रूप बनाया पीकर के रावण सीता जी को हर लाया कहँ 'काका' कविराय, सुरा की करो न निंदा मधु पीकर के मेघनाद पहुँचा किष्किंधा ठेला हो या जीप हो, अथवा मोटरकार ठर्रा पीकर छोड़ दो, अस्सी की रफ़्तार  g अस्सी की रफ़्तार , नशे कमाओं जो आगे आ जाये, स्वर्ग उसको पहुँचाओ पकड़ें यदि सार्जेंट, सिपाही ड्यूटी वाले लुढ़का दो उनके भी मुँह में, दो चार पियाले पूरी बोतल गटकिये , होय ब्रह्म का ज्ञान नाली की बू, इत्र की खुशबू एक समान a खुशबू एक समान, लड़्खड़ाती जब 'डिब्बा' कहना चाहें, निकले मुँह से 'दिब्बा =-#'=--' =3" .9f -ப-்சர भारतीय इतिहास का, कीजे अनुसंधान देव दनुज किन्नर सभी , किया सोमरस पान किया सोमरस पान, पियें कवि, लेखक, शायर जो इससे बच जाये, उसे कहते हैं 'कायर' कहँ काका' , कवि 'बच्चन' ने पीकर दो प्याला दो घंटे में लिख डाली , पूरी ' मधुशाला ' भेदभाव  से मुक्त यह, क्या ऊँचा क्या नीच अहिरावण पीता इसे , पीता था मारीच पीता था मारीच, स्वर्ण- मृग रूप बनाया पीकर के रावण सीता जी को हर लाया कहँ 'काका' कविराय, सुरा की करो न निंदा मधु पीकर के मेघनाद पहुँचा किष्किंधा ठेला हो या जीप हो, अथवा मोटरकार ठर्रा पीकर छोड़ दो, अस्सी की रफ़्तार  g अस्सी की रफ़्तार , नशे कमाओं जो आगे आ जाये, स्वर्ग उसको पहुँचाओ पकड़ें यदि सार्जेंट, सिपाही ड्यूटी वाले लुढ़का दो उनके भी मुँह में, दो चार पियाले पूरी बोतल गटकिये , होय ब्रह्म का ज्ञान नाली की बू, इत्र की खुशबू एक समान a खुशबू एक समान, लड़्खड़ाती जब 'डिब्बा' कहना चाहें, निकले मुँह से 'दिब्बा =-#'=--' =3" .9f -ப-்சர - ShareChat