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गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - अहमद फ़राज़ गज़ल ক ৪ম নি8ভ নী থাযব কমী সানী ম সিল अब সিল किताबों ম जिस सूख 76 हुए কুল 6 मोती लोगों 7 $ ওত$ हुए वफ़ा ম   সিল ख़ज़ाने तुझे ನಾೆ 8 4 मुमकिन ग़म -ए-दुनिया भी ग़म-ए-्यार में शामिल कर लो 1 शराबें # 8 जो ನಾ नश्शा बढ़ता ؟٩7 ٤ ٦ मिरा फ़रिश्तों जैसा इश्क़ में   मिलें दोनों   इंसाँ  हैं तो क्यूँ इतने   हिजाबों हम   दार  पे   खींचे जिन बातों गए आज বী  তমান কী নিমানী ম নিল अजब कल नवो मैं नवो तू है न वो माज़ी है फ़राज़ ' अब जैसे সিল सराबों 41 # $ शख़्स तमन्ना Wani Motivational Vicleos /oo अहमद फ़राज़ गज़ल ক ৪ম নি8ভ নী থাযব কমী সানী ম সিল अब সিল किताबों ম जिस सूख 76 हुए কুল 6 मोती लोगों 7 $ ওত$ हुए वफ़ा ম   সিল ख़ज़ाने तुझे ನಾೆ 8 4 मुमकिन ग़म -ए-दुनिया भी ग़म-ए-्यार में शामिल कर लो 1 शराबें # 8 जो ನಾ नश्शा बढ़ता ؟٩7 ٤ ٦ मिरा फ़रिश्तों जैसा इश्क़ में   मिलें दोनों   इंसाँ  हैं तो क्यूँ इतने   हिजाबों हम   दार  पे   खींचे जिन बातों गए आज বী  তমান কী নিমানী ম নিল अजब कल नवो मैं नवो तू है न वो माज़ी है फ़राज़ ' अब जैसे সিল सराबों 41 # $ शख़्स तमन्ना Wani Motivational Vicleos /oo - ShareChat