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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
जय माँ गायत्री जय गुरुवर - कहानी जो जीवन बदल दे। OILcus uoil दो पंडित छात्र काशी पढ़कर अपने अपने गाँव लौट থl   ওনক   ঠাঁব रहे थे। াম-দাম   ৪ী যমা पार साथ हो लिये। रास्ते में करने के लिये  दोेनों एक गांव में  रुके। ಹ परिचय ने पाकर   गांव मुखिया उन्हें अपने यहाँ ठहराने की व्यवस्था कर दी। Aqt दोनों को शौच स्नान से होकर तब भोजन दोनों   बारी-बारी सो गये। था। करना बाहर एक पंडित बैठा हुआ था तो साथी की ন मुखिया दूसरे विद्वता के संबंध में पूछा- तो ईर्ष्यावश उसने   कहा- ೯ FT adl वह तो मूर्ख FಕFT' होने गया और दूसरा बैठा जब   पहले वाला था तो मुखिया ने उससे भी॰ वही সংন   কিমা 531T वह भी ईर्ष्यालु था। बोला पूरा गधा हैं। जब दोनों নিহিবন মী ঠাঠ নী ने भोजन के लिए घर गृहपति घास रखी थी چ| बुलाया। एक की थाली में दूसरे में भूसा। आश्चर्य से दोनों ने पूछा यह क्या? कहा-आप   लोगों ने ही तो विनयपूर्वक   मुखिया ন को परिचय में गधे और बैल के रूप में दूसरे एक उसी के अनुसार यह भोजन का प्रबंध है। दिया থা] க fef 3iR পতিনী ಫ1 # समझ নন आया परनिंदा का क्या परिणाम होता है। अखंड ज्योति सितम्बर १९८८ कहानी जो जीवन बदल दे। OILcus uoil दो पंडित छात्र काशी पढ़कर अपने अपने गाँव लौट থl   ওনক   ঠাঁব रहे थे। াম-দাম   ৪ী যমা पार साथ हो लिये। रास्ते में करने के लिये  दोेनों एक गांव में  रुके। ಹ परिचय ने पाकर   गांव मुखिया उन्हें अपने यहाँ ठहराने की व्यवस्था कर दी। Aqt दोनों को शौच स्नान से होकर तब भोजन दोनों   बारी-बारी सो गये। था। करना बाहर एक पंडित बैठा हुआ था तो साथी की ন मुखिया दूसरे विद्वता के संबंध में पूछा- तो ईर्ष्यावश उसने   कहा- ೯ FT adl वह तो मूर्ख FಕFT' होने गया और दूसरा बैठा जब   पहले वाला था तो मुखिया ने उससे भी॰ वही সংন   কিমা 531T वह भी ईर्ष्यालु था। बोला पूरा गधा हैं। जब दोनों নিহিবন মী ঠাঠ নী ने भोजन के लिए घर गृहपति घास रखी थी چ| बुलाया। एक की थाली में दूसरे में भूसा। आश्चर्य से दोनों ने पूछा यह क्या? कहा-आप   लोगों ने ही तो विनयपूर्वक   मुखिया ন को परिचय में गधे और बैल के रूप में दूसरे एक उसी के अनुसार यह भोजन का प्रबंध है। दिया থা] க fef 3iR পতিনী ಫ1 # समझ নন आया परनिंदा का क्या परिणाम होता है। अखंड ज्योति सितम्बर १९८८ - ShareChat