Nikhilnariyal
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सुंदर पिचाई, सत्या नाडेला, नील मोहन, शांतनु मोहन जैसे तमाम भारतीय हैं जो दुनिया की बड़ी- बड़ी कंपनियों के ceo हैं। इनमे से अधिकतर ब्राह्मण हैं। ऐसा नहीं है कि इनका चयन योग्यता से हुआ है, दर-असल इनकी जगह मूल निवासियों का चयन हुआ था, लेकिन भारत में ब्राह्मणवाद ऐसा चरम पर है कि इनका वीजा ही नहीं क्लियर होने दिया गया। जिन्हे वीजा मिल भी गया, एयरपोर्ट पर उनका पासपोर्ट फाड़ कर फेंक दिया गया और उनकी जगह इन मनुवादी ब्राह्मणों को भेज दिया गया। सुंदर पिचाई कोई आईआईटियन नहीं हैं, वे इंटर में चार बार फेल हुए थे, सत्या नडेला ने भी किसी तरह से हिंदी, समाज शास्त्र जैसे विषयों से बी ए पास किया है। वह भी उनका बी ए का पेपर किसी और ने दिया था। ये लोग फर्जी डिग्री लेकर और मूल निवासियों का हक मारकर विदेश पहुँचे हैं। # #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #😎मोटिवेशनल गुरु🤘 #🇮🇳 कारगिल शहीदों के कोट्स #🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 #moj_content मेरी मांग है कि भारत के मूल निवासियों को दुनिया की सभी कंपनियों में आरक्षण मिलना चाहिए।
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