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सिफारिश है जो एकबार
फिर से....
इस दिल मे....
यूँ भी अब आग लगाओ तुम!
जिंदगी खूबसूरत सी एक
बाग लगे....
बर्फ सी हो.....
बस दिल मे यूँ घूँस जाओ तुम!
खिलकर लब्ज यूँ बेसुमार
हो जाएँ....
क्षितिज को....
पलक पे ही अब बसाओ तुम!
छिटक-छिटक गुलजार सी लगें
ये पंखुरियाँ....
सँवरकर बस....
अब यूं मोरनी सी बन जाओ तुम!
सुनो बात दिल की तुम भी कुछ
करीब आकर.....
फिर साँसों की.....
रफ़्तार धीरे-धीरे ही बाढ़ाओं तुम!
हाँ दूर हो भले इस दिल के पास
हो बैठो....
फिर से.....
मचलते धड़कनों को दबाओ तुम!
ये आँखें कब से चढ़े उफान पर
जो हैं....
मिलाकर ये.....
नजर हमसे यूँ मुस्कुराओ तुम!
हर एक ख़्वाब लगने लगे मुकम्मल
हुए और.....
फिर बारबार.
बस यूँ ही अल्हड़ हो खिलखिलाओ तुम!💕💞
........✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
#💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️


