आपने कुंडली मिलान और ज्योतिषीय योगों के बारे में बहुत ही गहरी और महत्वपूर्ण बातें बताई हैं! ये वास्तव में वो पहलू हैं जिन पर कुंडली देखते समय गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
चलिए, आपके इन बिंदुओं को थोड़ा और सरल भाषा में समझते हैं:
1. *पुरुष की कुंडली में चतुर्थ भाव और सप्तम भाव:*
- *चतुर्थ भाव (चौथा घर):* यह घर सुख, शांति, घर-परिवार और माँ का होता है। अगर यह भाव पीड़ित (यानी खराब ग्रहों के प्रभाव में) हो, तो पुरुष के जीवन में घर-परिवार का सुख कम हो सकता है, मानसिक शांति भंग हो सकती है। इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि वह अन्य स्त्रियों से संबंध जोड़ेगा, बल्कि यह घर के माहौल में अशांति या वैवाहिक जीवन में असंतोष का कारण बन सकता है, जिससे व्यक्ति बाहर सुख ढूंढने की कोशिश कर सकता है।
- *सप्तम भाव (सातवाँ घर):* यह भाव सीधा-सीधा विवाह, जीवनसाथी और साझेदारी का होता है। अगर यह भाव कमजोर हो (जैसे, नीच का ग्रह बैठा हो, क्रूर ग्रहों की दृष्टि हो, या स्वामी कमजोर हो), तो वैवाहिक जीवन में मुश्किलें आ सकती हैं। जीवनसाथी से संबंध मधुर नहीं रहते या व्यक्ति का मन एक जगह नहीं टिकता, जिससे रिश्ते में अस्थिरता आ सकती है।
2. *बुध-राहु की युति:*
बुध बुद्धि और राहु माया, भ्रम का कारक है। जब ये दोनों एक साथ होते हैं, तो व्यक्ति बहुत चालाक और चतुर हो सकता है। ऐसे लोग अक्सर अपनी बात मनवाने या अपना काम निकलवाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, चाहे उसमें झूठ, छल या जोड़-तोड़ का सहारा ही क्यों न लेना पड़े। वे अपनी बुद्धि का इस्तेमाल सही-गलत की परवाह किए बिना कर सकते हैं। यह युति व्यक्ति को बहुत धूर्त और अवसरवादी बना सकती है।
3. *स्त्री की कुंडली में त्रिकोण भावों का पीड़ित होना:*
त्रिकोण भाव (पहला, पाँचवां और नौवां घर) कुंडली के सबसे शुभ भाव माने जाते हैं।
- *पहला भाव (लग्न):* व्यक्ति का स्वयं का व्यक्तित्व, स्वास्थ्य और जीवन की समग्र दिशा।
- *पाँचवां भाव:* प्रेम, संतान, बुद्धि, पूर्व पुण्य।
- *नौवां भाव:* भाग्य, धर्म, पिता, लंबी यात्राएँ।
अगर ये त्रिकोण भाव बुरी तरह से पीड़ित हों (जैसे, क्रूर ग्रहों का प्रभाव, नीच के ग्रह या बहुत कमजोर), तो यह स्त्री के जीवन में कई तरह के दुर्भाग्य, संतान संबंधी कष्ट, वैवाहिक जीवन में असंतुष्टि या भाग्यहीनता का कारण बन सकता है। ऐसे में, यह सही कहा गया है कि यदि ऐसी स्थिति में विवाह होता है, तो वह दुर्भाग्य का कारण बन सकता है। कभी-कभी, ऐसे योगों के साथ अविवाहित रहना या बहुत सोच-समझकर शादी करना ही बेहतर होता है।
ये सूत्र वास्तव में बहुत गहरे हैं और कुंडली मिलान के दौरान इन पर ध्यान देना बेहद ज़रूरी है ताकि भावी वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाया जा सके। आपने बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है! 😊 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔

