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#आज जिनकी पुण्यतिथि है #🇮🇳 देशभक्ति #🙏🏻माँ तुझे सलाम
आज जिनकी पुण्यतिथि है - कल्पना दत्त चटगांव शस्त्रागार विद्रोह और क्रांतिकारी गतिविधियाँ कल्पना दत्त की मुलाकात क्रांतिकारी मास्टर सूर्य सेन (मास्टर दा) और उनके सहयोगियों से  हुई। हीवे क्रांतिकारी संगठन जल्द "इंडियन रिपब्लिकन आर्मी" का हिस्सा बन गईं। इस संगठन का उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह करना था।  १८ अप्रैल १९३० को मास्टर दा के नेतृत्व में चटगांव शस्त्रागार लूट ऐतिहासिक घटना हुई, जिसमें ब्रिटिश शासन के हथियार डिपो पर हालांकि हमला किया गया।  इस विद्रोह के बाद ब्रिटिश हुकूमत ने क्रांतिकारियों के दमन का अभियान तेज कर दिया।  कल्पना दत्त ने पुरुष वेश धारण कर ब्रिटिश पुलिस को चकमा देते हुए क्रांतिकारियों को हथियार और गोला बारूद पहुँचाने का कार्य किया। उन्होंने निशानेबाजी का विशेष प्रशिक्षण भी लिया और कई बार अंग्रेजों से लोहा लिया।  गिरफ्तारी और आजीवन कारावास ब्रिटिश सरकार ने क्रांतिकारियों के खिलाफ कडी कार्रवाई शुरू कर दी। १९३३ में मास्टर सूर्य सेन तारकेश्वर दस्तीदार और कल्पना को गिरफ्तार कर लिया गया। उन विशेष न्यायालय में दत्त पर मुकदमा चलाया गया। निधन 8 फरवरी १९९५ २२ जनवरी १९३४ को मास्टर सूर्यसिन ओरतारकेश्वर दिस्तीदार को फाँसी देदी गई लिकिन कल्पना दत्त को आजीवन कासवास की सजा सनाईगई हालांकि, १९३९ में॰ भारतीय नेताओं के प्रयासों से उन्हें रिहा कर दिया गया। जेल से छूटने के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हो गई। कल्पना दत्त चटगांव शस्त्रागार विद्रोह और क्रांतिकारी गतिविधियाँ कल्पना दत्त की मुलाकात क्रांतिकारी मास्टर सूर्य सेन (मास्टर दा) और उनके सहयोगियों से  हुई। हीवे क्रांतिकारी संगठन जल्द "इंडियन रिपब्लिकन आर्मी" का हिस्सा बन गईं। इस संगठन का उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह करना था।  १८ अप्रैल १९३० को मास्टर दा के नेतृत्व में चटगांव शस्त्रागार लूट ऐतिहासिक घटना हुई, जिसमें ब्रिटिश शासन के हथियार डिपो पर हालांकि हमला किया गया।  इस विद्रोह के बाद ब्रिटिश हुकूमत ने क्रांतिकारियों के दमन का अभियान तेज कर दिया।  कल्पना दत्त ने पुरुष वेश धारण कर ब्रिटिश पुलिस को चकमा देते हुए क्रांतिकारियों को हथियार और गोला बारूद पहुँचाने का कार्य किया। उन्होंने निशानेबाजी का विशेष प्रशिक्षण भी लिया और कई बार अंग्रेजों से लोहा लिया।  गिरफ्तारी और आजीवन कारावास ब्रिटिश सरकार ने क्रांतिकारियों के खिलाफ कडी कार्रवाई शुरू कर दी। १९३३ में मास्टर सूर्य सेन तारकेश्वर दस्तीदार और कल्पना को गिरफ्तार कर लिया गया। उन विशेष न्यायालय में दत्त पर मुकदमा चलाया गया। निधन 8 फरवरी १९९५ २२ जनवरी १९३४ को मास्टर सूर्यसिन ओरतारकेश्वर दिस्तीदार को फाँसी देदी गई लिकिन कल्पना दत्त को आजीवन कासवास की सजा सनाईगई हालांकि, १९३९ में॰ भारतीय नेताओं के प्रयासों से उन्हें रिहा कर दिया गया। जेल से छूटने के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हो गई। - ShareChat