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#मेरे विचार #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार #श्रीमद भगवद्गीता
मेरे विचार - अथैकादशोधध्यायः अर्जुन उवाच गुह्यमध्यात्मसज्ज्ितम् | परमं मदनुग्रहाय यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोड्यं विगतो मम।l अर्जुन बौले ~ मुझपर अनुग्रह करनैके लिये आपने जो परम गोपनीय अध्यात्मविपयक वचन अर्थात् उपदेश कहा, उससे मेरा यह अज्ञान नष्ट हा गया हैं Il १ Il  भवाप्ययौ हि भूतानां  विस्तरशो मया। ஆள் त्वत्तः कमलपन्राक्ष माहात्म्यमपि चाव्ययम्।। क्योंकि हे कमलनेत्र ! भॅने आपसे সনি भूतोको " और प्रलय विस्तारपूर्वक सुने हैं तथा आपको अविनाशों महिमा भौ ٤ ١١ ٦ ١١ सुनो एवमेतद्यथात्थ त्वमात्मानं परमेश्वर | द्रष्टुमिच्छामि  रूपमैश्वरं   पुरुपोत्तम Il ते हे परमेश्वर ! आप अपनेको जैसा कहते हेॅं॰ यह ठोक ऐसा हो है; परन्तु हे पुरुपोत्तम ! आपके ज्ञान, ऐश्वर्य शक्ति, बल, वोर्य और तेजसे युक्त ऐश्वर- रूपको मैं प्रत्यक्ष देखना चाहता हूँ Il ३।l प्रभो । मन्यसे यदि तच्छक्यं मया द्रष्टुमिति  योगेश्वर तता मै त्वं दर्शयात्मानमव्ययम् ।। हे प्रभो * ! यदि मेरे द्वारा आपका वह रूप देखा जाना शक्य है- ऐसा आप मानते हॅ॰ तो हे यौगेश्वर ! उस अविनाशो स्वरूपका मुझे दर्शन कराइये I१ ४ ।१ उत्पति   स्थिति ऑर प्रलय तथा अन्तयांमोरूपस शासन करनेयाला होनेसे भगवानका नाम ' प्रभन' रं। श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय ११ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार अथैकादशोधध्यायः अर्जुन उवाच गुह्यमध्यात्मसज्ज्ितम् | परमं मदनुग्रहाय यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोड्यं विगतो मम।l अर्जुन बौले ~ मुझपर अनुग्रह करनैके लिये आपने जो परम गोपनीय अध्यात्मविपयक वचन अर्थात् उपदेश कहा, उससे मेरा यह अज्ञान नष्ट हा गया हैं Il १ Il  भवाप्ययौ हि भूतानां  विस्तरशो मया। ஆள் त्वत्तः कमलपन्राक्ष माहात्म्यमपि चाव्ययम्।। क्योंकि हे कमलनेत्र ! भॅने आपसे সনি भूतोको " और प्रलय विस्तारपूर्वक सुने हैं तथा आपको अविनाशों महिमा भौ ٤ ١١ ٦ ١١ सुनो एवमेतद्यथात्थ त्वमात्मानं परमेश्वर | द्रष्टुमिच्छामि  रूपमैश्वरं   पुरुपोत्तम Il ते हे परमेश्वर ! आप अपनेको जैसा कहते हेॅं॰ यह ठोक ऐसा हो है; परन्तु हे पुरुपोत्तम ! आपके ज्ञान, ऐश्वर्य शक्ति, बल, वोर्य और तेजसे युक्त ऐश्वर- रूपको मैं प्रत्यक्ष देखना चाहता हूँ Il ३।l प्रभो । मन्यसे यदि तच्छक्यं मया द्रष्टुमिति  योगेश्वर तता मै त्वं दर्शयात्मानमव्ययम् ।। हे प्रभो * ! यदि मेरे द्वारा आपका वह रूप देखा जाना शक्य है- ऐसा आप मानते हॅ॰ तो हे यौगेश्वर ! उस अविनाशो स्वरूपका मुझे दर्शन कराइये I१ ४ ।१ उत्पति   स्थिति ऑर प्रलय तथा अन्तयांमोरूपस शासन करनेयाला होनेसे भगवानका नाम ' प्रभन' रं। श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय ११ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat