Praveen Kumar Yadav
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स्व स्वामी विवेकानंद जी के गुरु रहे स्व स्वामी रामकृष्ण परमहंसजी जी की जयंती पर मैं आप को कोटिशः नमन तथा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ.महान संत एवं समाज सुधारक स्वामी रामकृष्ण परमहंसजी का जन्म 18 फरवरी 1836 ई को पश्चिम बंगाल के कामारपुकुर गाँव में हुआ था.आप के पिताजी का नाम स्व खुदीराम जी तथा माताजी का नाम स्व श्रीमती चन्द्रमणि देवी था.स्वामी रामकृष्ण परमहंसजी जी के बचपन का नाम गदाधर था.अल्पायु में ही पिता जी का साया सर से उठ जाने के कारण परिवार की पुरी जिम्मेदारी आप के ऊपर आ गई इसलिए 12 साल की उम्र में आप ने पढ़ाई छोड़ दी परन्तु कुशाग्र बुद्धि होने के कारण स्वामी जी को पुराण,रामायण और महाभारत कण्ठस्थ हो गया था.स्वामी रामकृष्ण जी बचपन से ही ईश्वर में अटूट श्रद्धा रखते थे.ईश्वर के दर्शन के लिए आप ने कठोर तप और साधना की तथा इस साधना के बाद आप इस निष्कर्ष पर पहुँचे की सारे धर्म समान है तथा वे ईश्वर तक पहुँचने के भिन्न-भिन्न साधन मात्र है.आप ने मानव सेवा को सबसे बड़ा धर्म समझा इसीलिए आप ने लोगों को एकजुट रहने तथा सभी धर्मों का सम्मान करने की अपील की.आप के प्रमुख शिष्य स्वामी विवेकानन्द जी थे जिन्होंने 1897 ई में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की तथा स्वामी रामकृष्ण परमहंसजी के विचारों को जन-जन तक पहुँचाया.रामकृष्ण मिशन सभी धर्मो की एकता का प्रतीक है क्योंकि रामकृष्ण मिशन के मुख्यालय बेलूर मठ में हिंदू,इस्लामी,और ईसाई रूपांकनों का मिश्रण है.जीवन के अन्तिम दिनों में आप समाधि में रहने लगे तथा आप को गले का कैसर भी हो गया था.डाक्टरों ने समाधि लेने से आप को मना किया था.चिकित्सा के बावजूद आप का स्वास्थ्य बिगड़ता चला गया तथा 16 अगस्त 1886 ई को आप की मृत्यु हो गई थी.शत् शत् नमन😢😢😢🙏 #📰GK & करेंट अफेयर्स Students💡 #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान ##viral #🌞 Good Morning🌞 #🙏स्वामी रामकृष्ण परमहंस जयंती 🌺
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