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#☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
☝अनमोल ज्ञान - अनुष्ठान दिवस ४१ प्रेमानंद महाराजः टोकन बदला =- गाज्तखब्यचास्चासगा की साकार अवतार ரசார ரா से निराकार तक की यात्रा परमान्सासो अपनती मौफ़णनुसारहमे ज्तिस् के संदेश की आत्मा र्ममे ज्िन्म दिसाह उस्ती फर्मानसार নিবসসালননন সচীচসায়ছিলম श्रृंखला है। हयों ब्ह्य गहर्ल रों उठकर परसात्रमा ध्यान  सधना ओोर षार्थनाकरकी यहिएफि॰ आष्ा के रूप के साथ फाथिनहमारे लिएसोभार्यशालीहोहसा अवतार ಔರಢೈಈಕರೆ ತ್ೊತರತ ಚರಘದೊಳತು केवल और केवल प्रेम भाव से ಶರಖತಪಾತಳrಚಳr mಳಾದಂಳಶ೯ರೈಫ್ মীভনী কি্স্নয সকননবনী নলী সবমলদনী ही समरस हो सकते है।  चाहिए किहमों औरहमारी पथनाकरनत দীিরিীক্রীসসমসননতীন্তনডবসন নানা মামী রল! யசg  ரர भविष्य में ४ टेवचोलौज आने वाली ITT ~I I ही मशीनों से होगा, और कार्य सारा बेरोजगारी कीसमस्या आसकती हे आत्म -धर्ग की ख्योति जलते छी , सर्व सामान्य मनृष्य से आपको विशोष की आवश्यकता होगी बनने HF बहरी भेन कपने क्षागु मिट जाते हें । विशेष मनुष्य शरीर से नहीं आत्मा से गेरे सतगुरू" नियमित बन सकते हो 39 4 साधना करतेहो॰तो आपके शरीर م आसपास औसा का निर्माण होगा आपका औरा ही भविष्यमें आपको समाज म विशेष व्यक्ति बनाएगा , 3ారాశా आात्मा को Araqaa आप महक रही हे जिन्दगी एक विशेष आत्मा चाले व्यक्ति बरक बन सकत ह। ने गुरुदेव से पुछा आदमी मेहनत साधक से आगे बढ़ता है या भाग्य से? गुरुदेव कहा आपका बैंक में लाकर तो होगा? आज शी आपके रहगतो से उसकी चाभियाँ ही इस सवाल का जवाब है। हर लाकर की दो चाभियाँ होती हैं। एक आप के पास होती है और एक मैनेजर के पास। आप के पास जो चाभी है वह है परिश्रम और मेनेजर के पास वाली RWII आापका हरवचन जब तक दोनों नहीं लगतीं ताला भाग्य नही खुल सकता। आप कर्मयोगी हैं ओर मैनेजर भगवान। आप को अपनी चाभी अफो वाल बाते ब्यक्िमेईश्वर को देखना ऐम ह भी लगाते रहना चाहिये। पता नहीं ऊपर M3mrdnmannitinನ ऐसी हमे सोगात शी  वाला कब अपनी चाभी लगा दे। कहीं ऐसा न हो की भगवान अपनी भाग्यवाली HAPpl 1- चाभी लगा रहा हो और हम परिश्रम वाली चाभी न लगा पायें और ताला खुलने से रह आया पालिकच्यानयोनपगन अनुष्ठान दिवस ४१ प्रेमानंद महाराजः टोकन बदला =- गाज्तखब्यचास्चासगा की साकार अवतार ரசார ரா से निराकार तक की यात्रा परमान्सासो अपनती मौफ़णनुसारहमे ज्तिस् के संदेश की आत्मा र्ममे ज्िन्म दिसाह उस्ती फर्मानसार নিবসসালননন সচীচসায়ছিলম श्रृंखला है। हयों ब्ह्य गहर्ल रों उठकर परसात्रमा ध्यान  सधना ओोर षार्थनाकरकी यहिएफि॰ आष्ा के रूप के साथ फाथिनहमारे लिएसोभार्यशालीहोहसा अवतार ಔರಢೈಈಕರೆ ತ್ೊತರತ ಚರಘದೊಳತು केवल और केवल प्रेम भाव से ಶರಖತಪಾತಳrಚಳr mಳಾದಂಳಶ೯ರೈಫ್ মীভনী কি্স্নয সকননবনী নলী সবমলদনী ही समरस हो सकते है।  चाहिए किहमों औरहमारी पथनाकरनत দীিরিীক্রীসসমসননতীন্তনডবসন নানা মামী রল! யசg  ரர भविष्य में ४ टेवचोलौज आने वाली ITT ~I I ही मशीनों से होगा, और कार्य सारा बेरोजगारी कीसमस्या आसकती हे आत्म -धर्ग की ख्योति जलते छी , सर्व सामान्य मनृष्य से आपको विशोष की आवश्यकता होगी बनने HF बहरी भेन कपने क्षागु मिट जाते हें । विशेष मनुष्य शरीर से नहीं आत्मा से गेरे सतगुरू" नियमित बन सकते हो 39 4 साधना करतेहो॰तो आपके शरीर م आसपास औसा का निर्माण होगा आपका औरा ही भविष्यमें आपको समाज म विशेष व्यक्ति बनाएगा , 3ారాశా आात्मा को Araqaa आप महक रही हे जिन्दगी एक विशेष आत्मा चाले व्यक्ति बरक बन सकत ह। ने गुरुदेव से पुछा आदमी मेहनत साधक से आगे बढ़ता है या भाग्य से? गुरुदेव कहा आपका बैंक में लाकर तो होगा? आज शी आपके रहगतो से उसकी चाभियाँ ही इस सवाल का जवाब है। हर लाकर की दो चाभियाँ होती हैं। एक आप के पास होती है और एक मैनेजर के पास। आप के पास जो चाभी है वह है परिश्रम और मेनेजर के पास वाली RWII आापका हरवचन जब तक दोनों नहीं लगतीं ताला भाग्य नही खुल सकता। आप कर्मयोगी हैं ओर मैनेजर भगवान। आप को अपनी चाभी अफो वाल बाते ब्यक्िमेईश्वर को देखना ऐम ह भी लगाते रहना चाहिये। पता नहीं ऊपर M3mrdnmannitinನ ऐसी हमे सोगात शी  वाला कब अपनी चाभी लगा दे। कहीं ऐसा न हो की भगवान अपनी भाग्यवाली HAPpl 1- चाभी लगा रहा हो और हम परिश्रम वाली चाभी न लगा पायें और ताला खुलने से रह आया पालिकच्यानयोनपगन - ShareChat