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आमलकी एकादशी। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहते हैं। आमलकी यानी आंवला को शास्त्रों में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त है। विष्णु जी ने जब सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्मा को जन्म दिया उसी समय उन्होंने आंवले के वृक्ष को जन्म दिया। आंवले को भगवान विष्णु ने आदि वृक्ष के रूप में प्रतिष्ठित किया है। इसके हर अंग में ईश्वर का स्थान माना गया है। माना जाता है कि आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होने की वजह से उसी के नीचे भगवान का पूजन किया जाता है, यही आमलकी एकादशी ( Amalaki Ekadashi ) कहलाती है। इस दिन आंवले का उबटन, आंवले के जल से स्नान, आंवला पूजन, आंवले का भोजन और आंवले का दान करना चाहिए। जिस कारण इस दिन भगवान विष्‍णु के साथ आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। पीपल और आंवले के वृक्ष को हिंदू धर्म में देवता के समान माना गया है।माना जाता है कि जब भगवान श्री हरि विष्णु ने सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्मा जी को जन्म दिया, उसी समय भगवान विष्णु ने आंवले के वृक्ष को भी जन्म दिया। इसी कारण आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। आंवले वृक्ष के हर अंग में ईश्वर का निवास माना गया है। #शुभ कामनाएँ 🙏
शुभ कामनाएँ 🙏 - २७ फरवरी २०२६ [ರಝu[ andqi गुरुवार অক্কঃI @Becit ஆரgச்சுச ிeபனீகி ತ ಣನ-್ಕಾಿ की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाए आपका हर पल थभ एवं मंगलमय होे !! App Want Motivational Videos २७ फरवरी २०२६ [ರಝu[ andqi गुरुवार অক্কঃI @Becit ஆரgச்சுச ிeபனீகி ತ ಣನ-್ಕಾಿ की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाए आपका हर पल थभ एवं मंगलमय होे !! App Want Motivational Videos - ShareChat