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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - मंड ) पॅजिट्व गणकादिव्स विशेष : देश सेवा के जज्बे की पहचान बना बूंदी का उमर गांव इस गांव में हर घर से सैना में दो जवान, ५०० से ज्यादा सैनिक कर चुके देशसेवा खेमराज मीणा ने बताया कि उमर मदन शर्माःपैच की बावड़ी (बूंदी)  | देश के लिए कुछ कर गांव से अब तक करीब गुजरने 500 गांव से अधिक सैनिक सेना में सेवा बूंदी जिले के বস্া जज्चा की पहचान बन चुका दे चुके हैं। गांव के दो सैनिक किमी से॰ करीब शहीद हुए, जिनमें १९६५ के युद्ध বনবম্-52 4 दूर हिंडौली उपखंड में स्थित इस मीणा के दौरान जम्मू रघुनाथ गांव में देश सेवा केवल पेशा नहीं, क्षेत्र में मुठभेड़ मेँ शहीद होे गए, बल्कि पीढ़ियों से चली 3 < जबकि वर्ष २००० में वीर हाहादुन परंपरा है। आजादी से लेकर अब जगदेवराज सिंह मीणा बिहार तक इस गांव से सैकड़ों सैनिक चुनाव ड्यूटी के दौरान शहीद हुए। भारतीय सेना में शामिल हुए और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान गांव कई   जवानों সনীম ন के करीब २५ सैनिकों ने अपना दुश्मनों बलिदान भी दिया। इसलिए उमर से लोहा लिया था। गांव से भारतीय गांव को इसलिए सैनिक गांव के सेना में १२ कैप्टन, १५ सूबेदार, रूप में जाना जाता है, जहां लगभग 8 नायब सूबेदार सहित हवलदार लिए हर घर से देश सेवा के के   सैकड़ों নরী और सिपाही स्तर जवान निकले हैं।तत्कालीन सरपंच सैनिकों ने सेवा दी। मंड ) पॅजिट्व गणकादिव्स विशेष : देश सेवा के जज्बे की पहचान बना बूंदी का उमर गांव इस गांव में हर घर से सैना में दो जवान, ५०० से ज्यादा सैनिक कर चुके देशसेवा खेमराज मीणा ने बताया कि उमर मदन शर्माःपैच की बावड़ी (बूंदी)  | देश के लिए कुछ कर गांव से अब तक करीब गुजरने 500 गांव से अधिक सैनिक सेना में सेवा बूंदी जिले के বস্া जज्चा की पहचान बन चुका दे चुके हैं। गांव के दो सैनिक किमी से॰ करीब शहीद हुए, जिनमें १९६५ के युद्ध বনবম্-52 4 दूर हिंडौली उपखंड में स्थित इस मीणा के दौरान जम्मू रघुनाथ गांव में देश सेवा केवल पेशा नहीं, क्षेत्र में मुठभेड़ मेँ शहीद होे गए, बल्कि पीढ़ियों से चली 3 < जबकि वर्ष २००० में वीर हाहादुन परंपरा है। आजादी से लेकर अब जगदेवराज सिंह मीणा बिहार तक इस गांव से सैकड़ों सैनिक चुनाव ड्यूटी के दौरान शहीद हुए। भारतीय सेना में शामिल हुए और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान गांव कई   जवानों সনীম ন के करीब २५ सैनिकों ने अपना दुश्मनों बलिदान भी दिया। इसलिए उमर से लोहा लिया था। गांव से भारतीय गांव को इसलिए सैनिक गांव के सेना में १२ कैप्टन, १५ सूबेदार, रूप में जाना जाता है, जहां लगभग 8 नायब सूबेदार सहित हवलदार लिए हर घर से देश सेवा के के   सैकड़ों নরী और सिपाही स्तर जवान निकले हैं।तत्कालीन सरपंच सैनिकों ने सेवा दी। - ShareChat