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#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - जब उन्हें फासले रास आने लगे तो हमने भी उनसे वक़्त मांगना छोड़ दिया। जहाँ अपनेपन की भीख मांगनी पडे़, वहाँ से खामोश हो जाना ही बेहतर है। लिए मजबूर नहीं करेंगे तुझे बात करने के चाहत अपनी जगह है, और आत्मसम्मान अपनी जगह। वो मसरूफ़ होने का बहाना बनाते रहे, और हम समझ गए कि अब हमारी ज़रूरत नहीं रही। रिश्ता वो नहीं जो जताना पडे़, और अपना वो नहीं जिसे बार-बार बुलाना पडे़े। @sona_creationa3 जब उन्हें फासले रास आने लगे तो हमने भी उनसे वक़्त मांगना छोड़ दिया। जहाँ अपनेपन की भीख मांगनी पडे़, वहाँ से खामोश हो जाना ही बेहतर है। लिए मजबूर नहीं करेंगे तुझे बात करने के चाहत अपनी जगह है, और आत्मसम्मान अपनी जगह। वो मसरूफ़ होने का बहाना बनाते रहे, और हम समझ गए कि अब हमारी ज़रूरत नहीं रही। रिश्ता वो नहीं जो जताना पडे़, और अपना वो नहीं जिसे बार-बार बुलाना पडे़े। @sona_creationa3 - ShareChat