मान्यवर कांशीराम (1934-2006) एक महान दलित नेता, समाज सुधारक और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के संस्थापक थे, जिन्होंने शोषित वर्गों के उत्थान के लिए 1971 में नौकरी छोड़ सामाजिक क्रांति की राह चुनी। उन्होंने 'बामसेफ' (1978) और 'बसपा' (1984) के माध्यम से दलितों-पिछड़ों को 15% बनाम 85% का नारा देकर संगठित किया और उन्हें 'शासक' बनने का मंत्र दिया।
मान्यवर कांशीराम का जीवन संघर्षः मुख्य बिंदु
शुरुआती जीवन और वैचारिक बदलाव: पंजाब के रोपड़ में जन्मे
कांशीराम साइंस ग्रेजुएट थे और पुणे में डीआरडीओ (DRDO) में वैज्ञानिक/अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। 1960 के दशक के अंत में डॉक्टर अंबेडकर जयंती की छुट्टी रद्द होने और दलितों के प्रति भेदभाव देखकर उन्होंने नौकरी छोड़ दी।
संगठन का निर्माण (सामाजिक संघर्ष): उन्होंने सबसे पहले शोषितों को जगाने के लिए 1971 में दलित शोषित समाज संघर्ष समिति (DS-4) और फिर 1978 में बामसेफ (BAMCEF अखिल भारतीय पिछड़ा और अल्पसंख्यक समुदायों कर्मचारी महासंघ) की स्थापना की।
बहुजन समाज पाठी के संस्थापक, महान समाज सुधारक, पिछडे, शोषित वंचितों के मसीहा मान्यवर कांशीराम साहेब जी के 92 वें जयंती पर उन्हे नमन 💐 #जयभिम #नमो बुध्दाय #जय संविधान # जय भारत #🎭Whatsapp status #꧁💔फक्त तुझ्यासाठी⚘💔꧂ #🙏🏻🇪🇺एकच साहेब बाबासाहेब🇪🇺🙏🏻 #꧁𓊈जय 🛞 भिम 𓊉꧂
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