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#महाभारत 🔥 गांधारी का श्राप और कृष्ण की मुस्कान 🙏 🕉️ जब एक माँ के श्राप को श्री कृष्ण ने मुस्कान के साथ स्वीकार कर लिया... 🕉️ महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद का दृश्य अत्यंत करुण था। पुत्रशोक में डूबी गांधारी का तेज इतना प्रबल था कि आँखों पर पट्टी होने के बावजूद, उनकी दृष्टि पड़ते ही युधिष्ठिर के पैरों के नाखून काले पड़ गए। गांधारी जानती थीं कि इस महाविनाश के केंद्र में कहीं न कहीं श्री कृष्ण ही थे। यदि वे चाहते, तो अपनी सामर्थ्य से यह युद्ध रोक सकते थे। एक माँ का क्रोध जब चरम पर पहुँचा, तो उन्होंने भगवान को ही श्राप दे डाला। पढ़ें यह अद्भुत और भावुक प्रसंग... 👇 ✨ गांधारी का क्रोध और आरोप गांधारी ने श्री कृष्ण को संबोधित करते हुए कहा: "हे मधुसूदन! तुम समर्थ थे, शक्तिशाली थे। तुम चाहते तो यह विनाश रुक सकता था, लेकिन तुमने स्वेच्छा से कुरुवंश का नाश होने दिया। यह तुम्हारा महान दोष है, अतः तुम इसका फल प्राप्त करो।" 🔥 गांधारी का भीषण श्राप श्री कृष्ण शांत रहे, जिससे गांधारी का क्रोध और बढ़ गया। उन्होंने नागिन की भांति फुफकारते हुए कहा: "चक्रगदाधर! मैंने अपने पति की सेवा से जो तपोबल प्राप्त किया है, उससे तुम्हें श्राप देती हूँ—आज से छत्तीसवें वर्ष में तुम्हारा समस्त परिवार इसी तरह आपस में लड़कर मर जाएगा। तुम अनाथ की भांति वन में घूमोगे और किसी निन्दित उपाय से मृत्यु को प्राप्त होगे। जैसे आज भरतवंश की स्त्रियाँ रो रही हैं, वैसे ही तुम्हारे कुल की स्त्रियाँ भी रोएँगी।" 🙏 श्री कृष्ण की अद्भुत स्वीकारोक्ति ऐसा घोर श्राप सुनकर कोई भी कांप उठता, परन्तु श्री कृष्ण ने उसी गंभीर मुस्कान के साथ कहा: "माँ, मैं जानता हूँ, ऐसा ही होने वाला है। वृष्णिकुल (यादवों) को देव, दानव या मनुष्य तो मार नहीं सकते, वे आपस में ही लड़कर नष्ट होंगे। मेरा कुल मेरे अतिरिक्त और किसी से संहारित हो भी नहीं सकता।" इसके बाद श्री कृष्ण ने गांधारी को उन्हीं के आशीर्वाद का स्मरण कराया: "माँ! जब दुर्योधन आपसे जीत का आशीर्वाद माँगने आता था, तो आप सदा यही कहती थीं—'यतो धर्मस्ततो जय:' (जहाँ धर्म है, वहीं जीत है)। धर्म की ही जीत हुई है।" यह कहकर समत्वयोगी श्री कृष्ण निर्विकार भाव से खड़े रहे और गांधारी मौन हो गईं। प्रसंग का सार: जीवन में सुख और दुःख, मेहमान की तरह आते हैं। श्री कृष्ण का यह प्रसंग सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों और दुःखों का सामना धैर्य और समभाव से करना चाहिए। जय श्री कृष्ण! 🙏
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