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#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - 98700 अब बने हैं पथर तो हैरत कैसी , ज़ब मोम थे तो जलाए बोहत गए | 98700 अब बने हैं पथर तो हैरत कैसी , ज़ब मोम थे तो जलाए बोहत गए | - ShareChat