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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
जय माँ गायत्री जय गुरुवर - गतिमान गीता जिज्ञासु साधक | तर्कशील भ्रमि भक्त Day One Shlok a Keans Stess Away JFA अदृष्टपूर्व हृषितोडस्मि दृष्ट्रवा भयेन च प्रव्यथितं मनो मे। तदेव मे दर्शय देवरूपं प्रसीद देवेश जगन्निवास ।। १l ४५ मैं पहले न देखे हुए आपके इस आश्चर्यमय रूप को देखकर हर्षित हो रहा हूँ और मेरा मन भय से अति व्याकुल भी हो रहा है, इसलिए आप उस चतुर्भुज ` fawv' को ही मुझे अपने रूप दिखलाइए। हे देवेश! हे जगन्निवास! प्रसन्न होइए। गतिमान गीता जिज्ञासु साधक | तर्कशील भ्रमि भक्त Day One Shlok a Keans Stess Away JFA अदृष्टपूर्व हृषितोडस्मि दृष्ट्रवा भयेन च प्रव्यथितं मनो मे। तदेव मे दर्शय देवरूपं प्रसीद देवेश जगन्निवास ।। १l ४५ मैं पहले न देखे हुए आपके इस आश्चर्यमय रूप को देखकर हर्षित हो रहा हूँ और मेरा मन भय से अति व्याकुल भी हो रहा है, इसलिए आप उस चतुर्भुज ` fawv' को ही मुझे अपने रूप दिखलाइए। हे देवेश! हे जगन्निवास! प्रसन्न होइए। - ShareChat