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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - जयपुर , रविवार, ०१ फरवरी २०२६ | ०२ अह्या! जिदगीस जज ज्योत्स्ना सक्सेना ٢ ٦«٨٢  पना सात साल की है। बातों में शहद, शरारत आज फिर घर आई तो सारा माहौल खिल उठा। गुड़िया रसोई का खेल चल रहा था और मैं भी उसके खेल में शामिल हो गई। खेल-खेल में मैंने पूछा, सपना, बड़ी होकर क्या बनोगी ? उसने मुस्कराते हुए कहा, बनूंगी।  जज मैं चौंकी, जज ! वो क्यों ?' क्योंकि मुझे अच्छा लगता है, ' उसने गुड़िया की चोटी बनाते हुए सहजता से कहा। मैंने थोडा गंभीर होकर पूछा, लेकिन बेटा, जज तो गंदे लोगों को सजा देते हैं ना... तुम्हें तो उनसे डर लगता है। ' सपना ने मेरी ओर मासूम निगाहों से देखा, फिर बोली, अरे नहीं ताई जज तो चमकीली ड्रेस पहनती हैं मेकअप लगाती हैं सबको हंसाती हैं और उनके आसपास सब अच्छे-अच्छे लोग होते हैं। ' मैं हैरान भला ऐसा कहां देखा तूने ?' टीवी पर ना! सारे शो में कितनी सुंदर सुंदर जज आती हैं। ' वो अब भी अपनी गुड़िया की साड़ी ठीक कर रही थी, मानो कोई बड़ी बात नहीं कही है उसने, बस मेरी को दूर 1 सामान्य-सी अल्पज्ञता किया है। फा मैंने सिर पकड़ लिया। ये रियलिटी शो वाले जज !  उफ्फ. 57~ मैं मन ही मन मुस्करा उठी। मासूमियत के इस युग में ' न्याय' और मनोरंजन' का फर्क अभी बच्चों की समझ से परे है। ऊक जयपुर , रविवार, ०१ फरवरी २०२६ | ०२ अह्या! जिदगीस जज ज्योत्स्ना सक्सेना ٢ ٦«٨٢  पना सात साल की है। बातों में शहद, शरारत आज फिर घर आई तो सारा माहौल खिल उठा। गुड़िया रसोई का खेल चल रहा था और मैं भी उसके खेल में शामिल हो गई। खेल-खेल में मैंने पूछा, सपना, बड़ी होकर क्या बनोगी ? उसने मुस्कराते हुए कहा, बनूंगी।  जज मैं चौंकी, जज ! वो क्यों ?' क्योंकि मुझे अच्छा लगता है, ' उसने गुड़िया की चोटी बनाते हुए सहजता से कहा। मैंने थोडा गंभीर होकर पूछा, लेकिन बेटा, जज तो गंदे लोगों को सजा देते हैं ना... तुम्हें तो उनसे डर लगता है। ' सपना ने मेरी ओर मासूम निगाहों से देखा, फिर बोली, अरे नहीं ताई जज तो चमकीली ड्रेस पहनती हैं मेकअप लगाती हैं सबको हंसाती हैं और उनके आसपास सब अच्छे-अच्छे लोग होते हैं। ' मैं हैरान भला ऐसा कहां देखा तूने ?' टीवी पर ना! सारे शो में कितनी सुंदर सुंदर जज आती हैं। ' वो अब भी अपनी गुड़िया की साड़ी ठीक कर रही थी, मानो कोई बड़ी बात नहीं कही है उसने, बस मेरी को दूर 1 सामान्य-सी अल्पज्ञता किया है। फा मैंने सिर पकड़ लिया। ये रियलिटी शो वाले जज !  उफ्फ. 57~ मैं मन ही मन मुस्करा उठी। मासूमियत के इस युग में ' न्याय' और मनोरंजन' का फर्क अभी बच्चों की समझ से परे है। ऊक - ShareChat