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भीष्म एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं🙏🏻 भीष्म एकादशी हिंदू पंचांग में माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है, जिसे जया एकादशी या भौमी एकादशी भी कहा जाता है। यह व्रत महाभारत के पितामह भीष्म से जुड़ा है, जिन्होंने इसी दिन बाणशय्या पर देह त्याग की थी। #जया एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं #जया एकादशी कीं शुभकामनायें #🙏 जया एकादशी #🌷जया एकादशी
जया एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं - বামুনবাতর : ऊँ नमो भगवते নম शुभ गुरुवार वंदन की सभी मित्रों को हार्दिक बधाई URT एकादशी Sassy Ashu সমা ৎকচান্রহীী সন ক্রথা [ इंद्र ने एक गंधर्व से नाराज होकर उसे और एक बार देवताओं के राजा ` उसकी पत्नी को पिशाच बनने का श्राप दे दिया। श्राप की वजह से गंधर्व और उसकी पत्नी पिशाच योनि में आ गये और जगह-्जगह भटकने लगे। पृथ्वी पर कई साल भटकने के बाद उस गंधर्व को एक ऋषि मिले जिन्होंने उसे जया र दोनों ने पूरे एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। ऋषि की आज्ञा मानकर विधि-विधान से जया एकादशी का व्रत संपन्न किया जिससे उसे पिशाच योनि से मुक्ति मिल गई और अंत में बैकुंठ लोक की प्राप्ति हुई। एकादशी का महत्व जया माघ माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी के उपवास से मनुष्य भूत प्रेत, पिशाच  आदि की योनि से मुक्त होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। जया নিষ্য और माता लक्ष्मी की षोडशोपचार एकादशी के दिन भगवान  के साथ पूजा करनी चाहिए और ओम् नमो भगवते वासुदेवाय नमः विष्णुसहस्त्रनाम का जाप करना चाहिए। मंत्र  যা বামুনবাতর : ऊँ नमो भगवते নম शुभ गुरुवार वंदन की सभी मित्रों को हार्दिक बधाई URT एकादशी Sassy Ashu সমা ৎকচান্রহীী সন ক্রথা [ इंद्र ने एक गंधर्व से नाराज होकर उसे और एक बार देवताओं के राजा ` उसकी पत्नी को पिशाच बनने का श्राप दे दिया। श्राप की वजह से गंधर्व और उसकी पत्नी पिशाच योनि में आ गये और जगह-्जगह भटकने लगे। पृथ्वी पर कई साल भटकने के बाद उस गंधर्व को एक ऋषि मिले जिन्होंने उसे जया र दोनों ने पूरे एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। ऋषि की आज्ञा मानकर विधि-विधान से जया एकादशी का व्रत संपन्न किया जिससे उसे पिशाच योनि से मुक्ति मिल गई और अंत में बैकुंठ लोक की प्राप्ति हुई। एकादशी का महत्व जया माघ माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी के उपवास से मनुष्य भूत प्रेत, पिशाच  आदि की योनि से मुक्त होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। जया নিষ্য और माता लक्ष्मी की षोडशोपचार एकादशी के दिन भगवान  के साथ पूजा करनी चाहिए और ओम् नमो भगवते वासुदेवाय नमः विष्णुसहस्त्रनाम का जाप करना चाहिए। मंत्र  যা - ShareChat