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#❤️अस्सलामु अलैकुम #assalamualaikum
❤️अस्सलामु अलैकुम - क़यामत की निशानी हज़रत अब्दुल्ला बिन उमर रज़ि. से रिवायत है कि उन्होंने फ़रमायाः जब तुम देखो कि मक्कतुल मुक़र्रमा की ज़मीन को चीर कर नहरों और रास्तों की तरह बना दिया जाए, और मक्कतुल मुक़र्रमा की इमारतें पहाड़ों की चोटियों के बराबर ऊँची और बुलन्द हो जाएँ, तो समझ लो कि क़यामत की निशानियाँ बहुत क़रीब आ 81 శరాేగి हवालाः इब्ने अबी शेबा हदीस नं. १४३०६ नसीहतः दुनिया की तरक़्क़ी और ऊँची इमारतें इंसान की कामयाबी नहीं , बल्कि हमें आख़िरत की तैयारी की याद दिलाने वाली निशानियाँ भी हो सकती हैं। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अपनी जिंदगी को अल्लाह की इबादत , नेक अमल और तौबा से सजाए। क़यामत की निशानी हज़रत अब्दुल्ला बिन उमर रज़ि. से रिवायत है कि उन्होंने फ़रमायाः जब तुम देखो कि मक्कतुल मुक़र्रमा की ज़मीन को चीर कर नहरों और रास्तों की तरह बना दिया जाए, और मक्कतुल मुक़र्रमा की इमारतें पहाड़ों की चोटियों के बराबर ऊँची और बुलन्द हो जाएँ, तो समझ लो कि क़यामत की निशानियाँ बहुत क़रीब आ 81 శరాేగి हवालाः इब्ने अबी शेबा हदीस नं. १४३०६ नसीहतः दुनिया की तरक़्क़ी और ऊँची इमारतें इंसान की कामयाबी नहीं , बल्कि हमें आख़िरत की तैयारी की याद दिलाने वाली निशानियाँ भी हो सकती हैं। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अपनी जिंदगी को अल्लाह की इबादत , नेक अमल और तौबा से सजाए। - ShareChat