hayate zindagi
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#assalamualaikum #❤️अस्सलामु अलैकुम
assalamualaikum - १००० रुपये से 1 लाख तक ज़कात का हिसाब सभी मुस्लिम तक पोहुचा दे जिन पर जकत फर्ज अगर आपके पास र१ ,००० हैं ज़कातः २२५ अगर आपके पास २५,००० हैं ज़कातः २१२५ अगर आपके पास २१०,००० हैं ज़कातः २२५० अगर आपके पास २२०,००० हैं ज़कातः २५०० अगर आपके पास २५०,००० हैं ज़कातः *१ ,२५० अगर आपके पास र१ ,००,००० हैं ज़कातः २२,५०० * ज़कात हर उस मुसलमान पर फ़र्ज़ है जो निसाब के मुताबिक़ मालदार हो और उस पर साल गुज़र जाए। ज़कात देने से माल पाक होता है और उसमें बरकत होती है। गरीबों , यतीमों और जरूरतमंदों की मदद करें, अपनी ज़कात सही हक़दार को दें। १००० रुपये से 1 लाख तक ज़कात का हिसाब सभी मुस्लिम तक पोहुचा दे जिन पर जकत फर्ज अगर आपके पास र१ ,००० हैं ज़कातः २२५ अगर आपके पास २५,००० हैं ज़कातः २१२५ अगर आपके पास २१०,००० हैं ज़कातः २२५० अगर आपके पास २२०,००० हैं ज़कातः २५०० अगर आपके पास २५०,००० हैं ज़कातः *१ ,२५० अगर आपके पास र१ ,००,००० हैं ज़कातः २२,५०० * ज़कात हर उस मुसलमान पर फ़र्ज़ है जो निसाब के मुताबिक़ मालदार हो और उस पर साल गुज़र जाए। ज़कात देने से माल पाक होता है और उसमें बरकत होती है। गरीबों , यतीमों और जरूरतमंदों की मदद करें, अपनी ज़कात सही हक़दार को दें। - ShareChat
#assalamualaikum #❤️अस्सलामु अलैकुम
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#❤️अस्सलामु अलैकुम #assalamualaikum
❤️अस्सलामु अलैकुम - तू समझता है तन्हाई में कोई नहीं देख रहा, के हाल मगर रब देख रहा है। वो जो दिलों जानता है, वो छुपे अमल भी देखता है। कुरआन में हैः " अल्लाह हर चीज़ को देखता है।" (सूरह मुजादिला ) इंसान लोगों से छुप सकता है, रब से नहीं। बंद दरवाज़े , अंधेरी रातें ये सब उसकी निगाह से छुपे और अकेलापन नहीं हैं। और उसी निगाह का डर इंसान को बचा जब कोई देख न रहा हो, तब अगर तू लेता है। गुनाह से रुक जाए तो समझ ले, अल्लाह तुझसे राज़ी हो गया। तू समझता है तन्हाई में कोई नहीं देख रहा, के हाल मगर रब देख रहा है। वो जो दिलों जानता है, वो छुपे अमल भी देखता है। कुरआन में हैः " अल्लाह हर चीज़ को देखता है।" (सूरह मुजादिला ) इंसान लोगों से छुप सकता है, रब से नहीं। बंद दरवाज़े , अंधेरी रातें ये सब उसकी निगाह से छुपे और अकेलापन नहीं हैं। और उसी निगाह का डर इंसान को बचा जब कोई देख न रहा हो, तब अगर तू लेता है। गुनाह से रुक जाए तो समझ ले, अल्लाह तुझसे राज़ी हो गया। - ShareChat
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assalamualaikum - मौत का पहला झटका कैसा होगा ? मौत का पहला लम्हा इंसान की पूरी जिंदगी का हिसाब खोल देता है। जिस्म से रूह के जुदा होने का लम्हा बहुत सख़्त होता है, जैसे किसी कांटेदार झाड़़ी को गीले ऊन से खींचा जाए। अगर इंसान नेक हो, तो फरिश्ते सफेद रौशनी जैसे चेहरे लेकर आते हैं, और रूह आसानी से निकलती है। लेकिन गुनाहों में डूबा हो, तो फरिश्ते सख्त अज़ाब 3 के साथ आते हैं, और रूह निकलते वक़्त तकलीफ़ से चीखती है। इसलिए ज़िंदगी भरकी तैयारी fag' करनी चाहिए, जो आख़िरी उस एक लम्हे के लेकिन सबसे बड़ा सच है। मौत का पहला झटका कैसा होगा ? मौत का पहला लम्हा इंसान की पूरी जिंदगी का हिसाब खोल देता है। जिस्म से रूह के जुदा होने का लम्हा बहुत सख़्त होता है, जैसे किसी कांटेदार झाड़़ी को गीले ऊन से खींचा जाए। अगर इंसान नेक हो, तो फरिश्ते सफेद रौशनी जैसे चेहरे लेकर आते हैं, और रूह आसानी से निकलती है। लेकिन गुनाहों में डूबा हो, तो फरिश्ते सख्त अज़ाब 3 के साथ आते हैं, और रूह निकलते वक़्त तकलीफ़ से चीखती है। इसलिए ज़िंदगी भरकी तैयारी fag' करनी चाहिए, जो आख़िरी उस एक लम्हे के लेकिन सबसे बड़ा सच है। - ShareChat
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❤️अस्सलामु अलैकुम - सजदे में रोना सीखो हर दर्द लोगों को बताने की ज़रूरत नहीं होती , कुछ बातें बस अल्लाह से कह देने से दिल हल्का எஎ81 १ सजदा वो जगह है जहाँ इंसान अपने रब के सबसे क़रीब होता है २ आँसू कमजोरी नहीं होते बल्कि दिल की सच्चाई होते हैं ३ जो सजदे में झुकता है वो ৯ মাসন ননী তুনিয়া झुकता ४ दिल का बोझ बातों से नहीं आँसुओं से उतरता గే तन्हाई में माँगी हुई दुआ खाली नहीं ५ रात की जाती दुनिया के सामने मज़बूत रहो लेकिन सजदे में टूट जाना सीखो। सजदे में रोना सीखो हर दर्द लोगों को बताने की ज़रूरत नहीं होती , कुछ बातें बस अल्लाह से कह देने से दिल हल्का எஎ81 १ सजदा वो जगह है जहाँ इंसान अपने रब के सबसे क़रीब होता है २ आँसू कमजोरी नहीं होते बल्कि दिल की सच्चाई होते हैं ३ जो सजदे में झुकता है वो ৯ মাসন ননী তুনিয়া झुकता ४ दिल का बोझ बातों से नहीं आँसुओं से उतरता तन्हाई में माँगी हुई दुआ खाली नहीं ५ रात की जाती दुनिया के सामने मज़बूत रहो लेकिन सजदे में टूट जाना सीखो। - ShareChat
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assalamualaikum - किसी भी वजह से गुनाह करने की आदत मत डालो, क्योंकि वजह तो एक दिन खत्म हो जाती है मगर गुनाह बाकी रह जाता है। और हर नेकी के लिए अगर थोड़ी तकलीफ़ भी उठानी पड़े तो सब्र कर लिया करो, क्योंकि तकलीफ़ फानी होती है लेकिन नेकी का सवाब हमेशा बाकी रहता है। किसी भी वजह से गुनाह करने की आदत मत डालो, क्योंकि वजह तो एक दिन खत्म हो जाती है मगर गुनाह बाकी रह जाता है। और हर नेकी के लिए अगर थोड़ी तकलीफ़ भी उठानी पड़े तो सब्र कर लिया करो, क्योंकि तकलीफ़ फानी होती है लेकिन नेकी का सवाब हमेशा बाकी रहता है। - ShareChat
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❤️अस्सलामु अलैकुम - मेरी अम्मी कहती हैं बेटा... औरतों की बातों में आकर भाइयों से दुश्मनी मत करना क्योंकि ! कब्रिस्तान लेकर जाने वाले भाई होगे औरते 78 मेरी अम्मी कहती हैं बेटा... औरतों की बातों में आकर भाइयों से दुश्मनी मत करना क्योंकि ! कब्रिस्तान लेकर जाने वाले भाई होगे औरते 78 - ShareChat
#assalamualaikum #❤️अस्सलामु अलैकुम
assalamualaikum - क़यामत के दिन हर इंसान के सामने उसके आमाल की किताब रख दी जाएगी। तब गुनहगार डरकर कहेंगेः "हाय हमारी बदनसीबी ! यह कैसी किताब है कि इसमें न कोई छोटा अमल छोड़ा गया है और न बड़़ा , सब कुछ इसमें दर्ज है।" और जो कुछ उन्होंने मौजूद किया होगा , सब अपने सामने पाएँगे | अल्लाह किसी पर जुल्म नहीं करता। कुरआनः सूरह अल॰्कफ़ (१८:४९) इसलिए हर लफ़्ज़ , हर काम और हर नीयत की फिक्र करें क्योंकि जो आज छुपा है, वही कल किताब में खुलकर सामने होगा | अल्लाह हमें अच्छे आमाल करने और बुराइयों से बचने की तौफ़ीक़ दे। आमीन। क़यामत के दिन हर इंसान के सामने उसके आमाल की किताब रख दी जाएगी। तब गुनहगार डरकर कहेंगेः "हाय हमारी बदनसीबी ! यह कैसी किताब है कि इसमें न कोई छोटा अमल छोड़ा गया है और न बड़़ा , सब कुछ इसमें दर्ज है।" और जो कुछ उन्होंने मौजूद किया होगा , सब अपने सामने पाएँगे | अल्लाह किसी पर जुल्म नहीं करता। कुरआनः सूरह अल॰्कफ़ (१८:४९) इसलिए हर लफ़्ज़ , हर काम और हर नीयत की फिक्र करें क्योंकि जो आज छुपा है, वही कल किताब में खुलकर सामने होगा | अल्लाह हमें अच्छे आमाल करने और बुराइयों से बचने की तौफ़ीक़ दे। आमीन। - ShareChat
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❤️अस्सलामु अलैकुम - कई लोग कहते हैं "देखना कोई गुनाह नहीं।" लेकिन इस्लाम कहता है गैर औरत को देखना ज़िना की पहली सीढ़ी है। आज एक तस्वीर, कल एक चैट, फिर मुलाकात और फिर गुनाह। शैतान का जाल बहुत महीन होता ह, पर उसका अंजाम बहुत खतरनाक है। इसलिए अल्लाह ने नज़रों को झुकाने का हुक्म दिया। क्योंकि एक मोमिन की आंखें भी उसकी हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदार हैं..!! कई लोग कहते हैं "देखना कोई गुनाह नहीं।" लेकिन इस्लाम कहता है गैर औरत को देखना ज़िना की पहली सीढ़ी है। आज एक तस्वीर, कल एक चैट, फिर मुलाकात और फिर गुनाह। शैतान का जाल बहुत महीन होता ह, पर उसका अंजाम बहुत खतरनाक है। इसलिए अल्लाह ने नज़रों को झुकाने का हुक्म दिया। क्योंकि एक मोमिन की आंखें भी उसकी हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदार हैं..!! - ShareChat
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❤️अस्सलामु अलैकुम - a४ate uindagu Congratulations hayate zindagi On successfully completing the ShareChat Spotlight program ShareChatr SPOILCHT a४ate uindagu Congratulations hayate zindagi On successfully completing the ShareChat Spotlight program ShareChatr SPOILCHT - ShareChat