hayate zindagi
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#ramadan #ramadan mubarak #Saharanpur #❤️अस्सलामु अलैकुम
ramadan - ShareChat
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#assalamualaikum #❤️अस्सलामु अलैकुम
assalamualaikum - Zindagi Tab Tak Na-Mukammall Hai Jab Tak ALLAH Kol Raazi Na Kar Liya Jaye. Zindagi Tab Tak Na-Mukammall Hai Jab Tak ALLAH Kol Raazi Na Kar Liya Jaye. - ShareChat
#❤️अस्सलामु अलैकुम #assalamualaikum
❤️अस्सलामु अलैकुम - अल्लाह के रसूलने फ़रमाया हसद नेकियों को इस तरह खाता है जिस तरह आग लकड़ी को खाती है (सुनन इब्ने माजा सफा नं. ४७३ जिल्द नं. 4 #४२10) हसद किसे कहते है ? दुनियावी नेअमत को छीन जाने की किसी की दीनी या तमन्ना करना या येह ख्वाहिश करना के फला शख़्स को येह नेअमत न मिले इसका नाम हसद है अल्लाह के रसूलने फ़रमाया हसद नेकियों को इस तरह खाता है जिस तरह आग लकड़ी को खाती है (सुनन इब्ने माजा सफा नं. ४७३ जिल्द नं. 4 #४२10) हसद किसे कहते है ? दुनियावी नेअमत को छीन जाने की किसी की दीनी या तमन्ना करना या येह ख्वाहिश करना के फला शख़्स को येह नेअमत न मिले इसका नाम हसद है - ShareChat
#assalamualaikum #❤️अस्सलामु अलैकुम
assalamualaikum - रसूल अल्लाह ने फ़रमाया , जो शख़्स जुमा के दिन गुस्ल करे और खूब अच्छी तरह पाकी हासिल करे और तेल इस्तेमाल करे या घर में जो मौजूद हो इस्तेमाल करे, फिर जुमा की खुशबू मस्जिद में पहुँच कर लिए नमाज़ के निकले और दरमियान न घुसे (यानी अपने दो आदमियों के fr रास्ता बनाकर आगे जाने के मकसद से दो आदमियों को न हटाए बल्कि जहॉ जगह मिल जाए वहाँ बैठ जाए), फिर जितनी हो सके नफ़िल नमाज़ पढ़े और जब इमाम खुत्बा शुरू करे तो ख़ामोश सुनता रहे, तो उसके इस जुमा से लेकर दूसरे जुमा तक सारे गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं। (बुखारी शरीफ़़ हदीस नं. 8८३) रसूल अल्लाह ने फ़रमाया , जो शख़्स जुमा के दिन गुस्ल करे और खूब अच्छी तरह पाकी हासिल करे और तेल इस्तेमाल करे या घर में जो मौजूद हो इस्तेमाल करे, फिर जुमा की खुशबू मस्जिद में पहुँच कर लिए नमाज़ के निकले और दरमियान न घुसे (यानी अपने दो आदमियों के fr रास्ता बनाकर आगे जाने के मकसद से दो आदमियों को न हटाए बल्कि जहॉ जगह मिल जाए वहाँ बैठ जाए), फिर जितनी हो सके नफ़िल नमाज़ पढ़े और जब इमाम खुत्बा शुरू करे तो ख़ामोश सुनता रहे, तो उसके इस जुमा से लेकर दूसरे जुमा तक सारे गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं। (बुखारी शरीफ़़ हदीस नं. 8८३) - ShareChat
#❤️अस्सलामु अलैकुम #assalamualaikum
❤️अस्सलामु अलैकुम - मोत मौत से खौफ़ तो आता है, मगर उससे बचना मुमकिन नहीं , कफ़न से घबराहट होती है, लेकिन उसे ओढ़ना तय है। जनाज़ा देखकर दिल भर आता है, पर एक दिन मेरा जनाज़ा भी उठना हक़ीक़त है। कब्रों की ख़ामोशी रूह तक सिहरा देती है, मगर आख़िरकार उसी मिट्टी में ठहरना जरूर है। मोत मौत से खौफ़ तो आता है, मगर उससे बचना मुमकिन नहीं , कफ़न से घबराहट होती है, लेकिन उसे ओढ़ना तय है। जनाज़ा देखकर दिल भर आता है, पर एक दिन मेरा जनाज़ा भी उठना हक़ीक़त है। कब्रों की ख़ामोशी रूह तक सिहरा देती है, मगर आख़िरकार उसी मिट्टी में ठहरना जरूर है। - ShareChat
#assalamualaikum #❤️अस्सलामु अलैकुम
assalamualaikum - १००० रुपये से 1 लाख तक ज़कात का हिसाब सभी मुस्लिम तक पोहुचा दे जिन पर जकत फर्ज अगर आपके पास र१ ,००० हैं ज़कातः २२५ अगर आपके पास २५,००० हैं ज़कातः २१२५ अगर आपके पास २१०,००० हैं ज़कातः २२५० अगर आपके पास २२०,००० हैं ज़कातः २५०० अगर आपके पास २५०,००० हैं ज़कातः *१ ,२५० अगर आपके पास र१ ,००,००० हैं ज़कातः २२,५०० * ज़कात हर उस मुसलमान पर फ़र्ज़ है जो निसाब के मुताबिक़ मालदार हो और उस पर साल गुज़र जाए। ज़कात देने से माल पाक होता है और उसमें बरकत होती है। गरीबों , यतीमों और जरूरतमंदों की मदद करें, अपनी ज़कात सही हक़दार को दें। १००० रुपये से 1 लाख तक ज़कात का हिसाब सभी मुस्लिम तक पोहुचा दे जिन पर जकत फर्ज अगर आपके पास र१ ,००० हैं ज़कातः २२५ अगर आपके पास २५,००० हैं ज़कातः २१२५ अगर आपके पास २१०,००० हैं ज़कातः २२५० अगर आपके पास २२०,००० हैं ज़कातः २५०० अगर आपके पास २५०,००० हैं ज़कातः *१ ,२५० अगर आपके पास र१ ,००,००० हैं ज़कातः २२,५०० * ज़कात हर उस मुसलमान पर फ़र्ज़ है जो निसाब के मुताबिक़ मालदार हो और उस पर साल गुज़र जाए। ज़कात देने से माल पाक होता है और उसमें बरकत होती है। गरीबों , यतीमों और जरूरतमंदों की मदद करें, अपनी ज़कात सही हक़दार को दें। - ShareChat
#assalamualaikum #❤️अस्सलामु अलैकुम
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❤️अस्सलामु अलैकुम - तू समझता है तन्हाई में कोई नहीं देख रहा, के हाल मगर रब देख रहा है। वो जो दिलों जानता है, वो छुपे अमल भी देखता है। कुरआन में हैः " अल्लाह हर चीज़ को देखता है।" (सूरह मुजादिला ) इंसान लोगों से छुप सकता है, रब से नहीं। बंद दरवाज़े , अंधेरी रातें ये सब उसकी निगाह से छुपे और अकेलापन नहीं हैं। और उसी निगाह का डर इंसान को बचा जब कोई देख न रहा हो, तब अगर तू लेता है। गुनाह से रुक जाए तो समझ ले, अल्लाह तुझसे राज़ी हो गया। तू समझता है तन्हाई में कोई नहीं देख रहा, के हाल मगर रब देख रहा है। वो जो दिलों जानता है, वो छुपे अमल भी देखता है। कुरआन में हैः " अल्लाह हर चीज़ को देखता है।" (सूरह मुजादिला ) इंसान लोगों से छुप सकता है, रब से नहीं। बंद दरवाज़े , अंधेरी रातें ये सब उसकी निगाह से छुपे और अकेलापन नहीं हैं। और उसी निगाह का डर इंसान को बचा जब कोई देख न रहा हो, तब अगर तू लेता है। गुनाह से रुक जाए तो समझ ले, अल्लाह तुझसे राज़ी हो गया। - ShareChat
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assalamualaikum - मौत का पहला झटका कैसा होगा ? मौत का पहला लम्हा इंसान की पूरी जिंदगी का हिसाब खोल देता है। जिस्म से रूह के जुदा होने का लम्हा बहुत सख़्त होता है, जैसे किसी कांटेदार झाड़़ी को गीले ऊन से खींचा जाए। अगर इंसान नेक हो, तो फरिश्ते सफेद रौशनी जैसे चेहरे लेकर आते हैं, और रूह आसानी से निकलती है। लेकिन गुनाहों में डूबा हो, तो फरिश्ते सख्त अज़ाब 3 के साथ आते हैं, और रूह निकलते वक़्त तकलीफ़ से चीखती है। इसलिए ज़िंदगी भरकी तैयारी fag' करनी चाहिए, जो आख़िरी उस एक लम्हे के लेकिन सबसे बड़ा सच है। मौत का पहला झटका कैसा होगा ? मौत का पहला लम्हा इंसान की पूरी जिंदगी का हिसाब खोल देता है। जिस्म से रूह के जुदा होने का लम्हा बहुत सख़्त होता है, जैसे किसी कांटेदार झाड़़ी को गीले ऊन से खींचा जाए। अगर इंसान नेक हो, तो फरिश्ते सफेद रौशनी जैसे चेहरे लेकर आते हैं, और रूह आसानी से निकलती है। लेकिन गुनाहों में डूबा हो, तो फरिश्ते सख्त अज़ाब 3 के साथ आते हैं, और रूह निकलते वक़्त तकलीफ़ से चीखती है। इसलिए ज़िंदगी भरकी तैयारी fag' करनी चाहिए, जो आख़िरी उस एक लम्हे के लेकिन सबसे बड़ा सच है। - ShareChat
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❤️अस्सलामु अलैकुम - सजदे में रोना सीखो हर दर्द लोगों को बताने की ज़रूरत नहीं होती , कुछ बातें बस अल्लाह से कह देने से दिल हल्का எஎ81 १ सजदा वो जगह है जहाँ इंसान अपने रब के सबसे क़रीब होता है २ आँसू कमजोरी नहीं होते बल्कि दिल की सच्चाई होते हैं ३ जो सजदे में झुकता है वो ৯ মাসন ননী তুনিয়া झुकता ४ दिल का बोझ बातों से नहीं आँसुओं से उतरता గే तन्हाई में माँगी हुई दुआ खाली नहीं ५ रात की जाती दुनिया के सामने मज़बूत रहो लेकिन सजदे में टूट जाना सीखो। सजदे में रोना सीखो हर दर्द लोगों को बताने की ज़रूरत नहीं होती , कुछ बातें बस अल्लाह से कह देने से दिल हल्का எஎ81 १ सजदा वो जगह है जहाँ इंसान अपने रब के सबसे क़रीब होता है २ आँसू कमजोरी नहीं होते बल्कि दिल की सच्चाई होते हैं ३ जो सजदे में झुकता है वो ৯ মাসন ননী তুনিয়া झुकता ४ दिल का बोझ बातों से नहीं आँसुओं से उतरता तन्हाई में माँगी हुई दुआ खाली नहीं ५ रात की जाती दुनिया के सामने मज़बूत रहो लेकिन सजदे में टूट जाना सीखो। - ShareChat