hayate zindagi
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#❤️अस्सलामु अलैकुम #assalamualaikum
❤️अस्सलामु अलैकुम - -Mazboot bano Aur Mazboot raho Ansu sirf Janamaz par acche Lagte hai.! -Mazboot bano Aur Mazboot raho Ansu sirf Janamaz par acche Lagte hai.! - ShareChat
#assalamualaikum #❤️अस्सलामु अलैकुम
assalamualaikum - बेशक ज़मीन पर सितारे नहीं, आसमान में कब्र नहीं , इंसान को सब्र नहीं, कुरान में झूठ नहीं , सजदे में जिसका सर नहीं , जन्नत में उसका घर नहींl, बेशक ज़मीन पर सितारे नहीं, आसमान में कब्र नहीं , इंसान को सब्र नहीं, कुरान में झूठ नहीं , सजदे में जिसका सर नहीं , जन्नत में उसका घर नहींl, - ShareChat
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❤️अस्सलामु अलैकुम - याजूज और माजूज का निकलना कयामत की १० बड़ी निशानियों में से एक है। याजूज और माजूज का ज़िक्र कुरान और हदीस में कयामत की बेशक, बड़ी निशानियों में से एक के तौर पर किया गया है।यह हमें याद दिलाता की जिंदगी फानी है और असली कामयाबी आखिरत की چ f दुनिया तैयारी में है। मक्सद डराना नहीं, बल्कि ग़फ़लत की नींद से जगाना है। (१ ) निकलने का वक्तः ये हजरत ईसा ( अ.स. ) के आसनमान से उतरने और दज्जाल के कत्ल के बाद निकलेंगे (२) फसाद और तबाहीः ये तादाद में इतने ज़्यादा होंगे कि ज़मीन पर फसाद मचा देंगे और समंदर झील (तबरिया) का सारा पानी पी जाएंगे (३) खात्माः हजरत ईंसा अ.स. और उनके साथियों की दुआ से अल्लाह उनके गले में कीड़े पैदा कर देगा , जिससे वे सब हलाक हो जाएंगे। अल्लाह हम सबको नेक राह पर चलने , पाँच वक्तं की नमाज़ पाबंदी से अदा करने और ज़बान व आमाल क हिफाज़त करने की तौफीक अता फरमाए। 3I याजूज और माजूज का निकलना कयामत की १० बड़ी निशानियों में से एक है। याजूज और माजूज का ज़िक्र कुरान और हदीस में कयामत की बेशक, बड़ी निशानियों में से एक के तौर पर किया गया है।यह हमें याद दिलाता की जिंदगी फानी है और असली कामयाबी आखिरत की چ f दुनिया तैयारी में है। मक्सद डराना नहीं, बल्कि ग़फ़लत की नींद से जगाना है। (१ ) निकलने का वक्तः ये हजरत ईसा ( अ.स. ) के आसनमान से उतरने और दज्जाल के कत्ल के बाद निकलेंगे (२) फसाद और तबाहीः ये तादाद में इतने ज़्यादा होंगे कि ज़मीन पर फसाद मचा देंगे और समंदर झील (तबरिया) का सारा पानी पी जाएंगे (३) खात्माः हजरत ईंसा अ.स. और उनके साथियों की दुआ से अल्लाह उनके गले में कीड़े पैदा कर देगा , जिससे वे सब हलाक हो जाएंगे। अल्लाह हम सबको नेक राह पर चलने , पाँच वक्तं की नमाज़ पाबंदी से अदा करने और ज़बान व आमाल क हिफाज़त करने की तौफीक अता फरमाए। 3I - ShareChat
#assalamualaikum #❤️अस्सलामु अलैकुम
assalamualaikum - LAYLATUL QADR KI KHASDUA يِّنَع ُفغاَف َوْفَعْلا ُبحُت ْوُفَع كَّنِإ సుI ALLAHI TU MAAF KARNE WALA HAI 0 AUR MAAFI KO PASAND KARTA HAI PAS MUJHE MAAF FARMA DE REFERENCE: [SUNAN TIRMIDHI: 3513 SAHIH]I JAB HAZRAT AISHA (RA) NE PUCHA KE AGAR MUJHE QADR KI RAAT MIL JAYE TOH KYA PARHU? TOH NABI NE YE DUA SIKHAYI: ISAY KASRAT SE PARHEIN LAYLATUL QADR KI KHASDUA يِّنَع ُفغاَف َوْفَعْلا ُبحُت ْوُفَع كَّنِإ సుI ALLAHI TU MAAF KARNE WALA HAI 0 AUR MAAFI KO PASAND KARTA HAI PAS MUJHE MAAF FARMA DE REFERENCE: [SUNAN TIRMIDHI: 3513 SAHIH]I JAB HAZRAT AISHA (RA) NE PUCHA KE AGAR MUJHE QADR KI RAAT MIL JAYE TOH KYA PARHU? TOH NABI NE YE DUA SIKHAYI: ISAY KASRAT SE PARHEIN - ShareChat
#❤️अस्सलामु अलैकुम #assalamualaikum
❤️अस्सलामु अलैकुम - हम अच्छे थे, अच्छे है और अच्छे ही रहेंगे फिक्र वो करे जो दिखते कुछ और है होते कुछ और है बोलते कुछ और है करते कुछ और है चेहरे पर दाग हो तो चलेगा मगर दिल के दागी लोगो से हमारी नही बनती। हम अच्छे थे, अच्छे है और अच्छे ही रहेंगे फिक्र वो करे जो दिखते कुछ और है होते कुछ और है बोलते कुछ और है करते कुछ और है चेहरे पर दाग हो तो चलेगा मगर दिल के दागी लोगो से हमारी नही बनती। - ShareChat
#assalamualaikum #❤️अस्सलामु अलैकुम
assalamualaikum - हजरत यूसुफ को अल्लाह ने उनके वालिद हजरत याकूब से जुदा कर दिय था, फिर ३२ साल बाद उनको मिलने की इजाज़त दी, दोनों बाप बेटे गले मिलकर इतना रोये की रोते रोते बेहोश हो गए होश में आए फिर रोए फिर बेहोश हो गए॰ ये देखकर हज़रत जिब्राइल ने अल्लाह से पूछा भला इतनी भी मोहब्बत कोई किसी से करत है तब अल्लाह ने कहा मैं अपने महबूब यानी मुहम्मद उम्मत से इससे ७० गुना R ज्यादा मोहब्बत करता हूँ॰. !! हजरत यूसुफ को अल्लाह ने उनके वालिद हजरत याकूब से जुदा कर दिय था, फिर ३२ साल बाद उनको मिलने की इजाज़त दी, दोनों बाप बेटे गले मिलकर इतना रोये की रोते रोते बेहोश हो गए होश में आए फिर रोए फिर बेहोश हो गए॰ ये देखकर हज़रत जिब्राइल ने अल्लाह से पूछा भला इतनी भी मोहब्बत कोई किसी से करत है तब अल्लाह ने कहा मैं अपने महबूब यानी मुहम्मद उम्मत से इससे ७० गुना R ज्यादा मोहब्बत करता हूँ॰. !! - ShareChat
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❤️अस्सलामु अलैकुम - क़यामत की निशानी हज़रत अब्दुल्ला बिन उमर रज़ि. से रिवायत है कि उन्होंने फ़रमायाः जब तुम देखो कि मक्कतुल मुक़र्रमा की ज़मीन को चीर कर नहरों और रास्तों की तरह बना दिया जाए, और मक्कतुल मुक़र्रमा की इमारतें पहाड़ों की चोटियों के बराबर ऊँची और बुलन्द हो जाएँ, तो समझ लो कि क़यामत की निशानियाँ बहुत क़रीब आ 81 శరాేగి हवालाः इब्ने अबी शेबा हदीस नं. १४३०६ नसीहतः दुनिया की तरक़्क़ी और ऊँची इमारतें इंसान की कामयाबी नहीं , बल्कि हमें आख़िरत की तैयारी की याद दिलाने वाली निशानियाँ भी हो सकती हैं। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अपनी जिंदगी को अल्लाह की इबादत , नेक अमल और तौबा से सजाए। क़यामत की निशानी हज़रत अब्दुल्ला बिन उमर रज़ि. से रिवायत है कि उन्होंने फ़रमायाः जब तुम देखो कि मक्कतुल मुक़र्रमा की ज़मीन को चीर कर नहरों और रास्तों की तरह बना दिया जाए, और मक्कतुल मुक़र्रमा की इमारतें पहाड़ों की चोटियों के बराबर ऊँची और बुलन्द हो जाएँ, तो समझ लो कि क़यामत की निशानियाँ बहुत क़रीब आ 81 శరాేగి हवालाः इब्ने अबी शेबा हदीस नं. १४३०६ नसीहतः दुनिया की तरक़्क़ी और ऊँची इमारतें इंसान की कामयाबी नहीं , बल्कि हमें आख़िरत की तैयारी की याद दिलाने वाली निशानियाँ भी हो सकती हैं। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अपनी जिंदगी को अल्लाह की इबादत , नेक अमल और तौबा से सजाए। - ShareChat
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