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🌊 जब अवतार भी #श्री हरि विष्णु मौन चुन ले… 🌿 यदुवंश के अंत की सूचना देकर कृष्ण लौट आए— बस एक इच्छा के साथ… अपने बड़े भाई बलराम के पास कुछ शांत पल बिताने की। 🙏 🌳 वृक्ष के नीचे बलराम— जीवित या समाधिस्थ? कह पाना कठिन था। कृष्ण ने उनकी शांति नहीं तोड़ी… बस पास बैठ गए। और तभी— 🐍 अनंत शेष नागरूप में निकलकर समुद्र में विलीन हो गए। वरुण देव, वासुकी—सब स्वागत में। बलराम का शरीर निश्चल हो गया। कृष्ण समझ गए। अब एकांत चाहिए। 🍂 💭 लेटे-लेटे स्मृतियाँ उमड़ पड़ीं— यशोदा की डांट, यमुना का किनारा, राधा का रास, कंस का अंत, द्वारिका का वैभव, महाभारत… और अंत में—यादवों का विनाश। और तभी— 🎯 एक बाण… तलवे में पीड़ा। व्याध दौड़ता हुआ आया— नाम था जरा। रोता हुआ, काँपता हुआ— “क्षमा करें प्रभु!” कृष्ण मुस्कुराए— “अपराध कैसा, मित्र?” 🕉️ रहस्य खुला यह बाण— महादेव का प्रसाद था। दुर्वासा का वरदान— पूरे शरीर को अमर-सा, बस तलवे को छोड़कर। क्योंकि… मृत्यु को भी एक बहाना चाहिए। 🌼 कृष्ण का अंतिम उपदेश 🌼 “संसार मेरे पहले भी था, मेरे बाद भी रहेगा। धर्म स्थापित हो चुका है। जब-जब अधर्म बढ़ेगा— कोई न कोई अवतार आएगा।” “अब जाओ मित्र… मन पर बोझ मत रखो। मुझे अब शांति चाहिए।” 🙏 💐 जीवन नश्वर है, धर्म शाश्वत है। 💐 🦚 जय श्रीकृष्ण 🦚
श्री हरि विष्णु - ShareChat