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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - प्ररकप्रर्सग साहस व अहिंसा की बड़ी मिसाल n मानवाधिकार कार्यकर्ता मार्टिन लूयर किंग के जीवन की यह घटना बताती है कि कैसे आत्मसंशय M के क्षणों में उनकी अंतरात्मा ने उनका प्रय प्रशस्त कत किया और उन्हें अपने मूल्यों से डिगने न दिया।  লে TI ল द टे n बात   है। मोंटगॉमरी बस सन 1956 की बॉयकॉट के दौरान मार्टिन लूथर किंग जूनियर  जो T ने एक बड़े आंदोलन का नेतृत्व किया था। यह आंदोलन मोंटगॉमरी में बसों में नस्लीय भेदभाव 5 के खिलाफ शुरू हुआ था, जिसकी चिंगारी रोजा  7 पार्क्स की गिरफ्तारी से थी। भडकी लेकिन   जैसे-्जैसे সানীলন  নত   ভ্রঙসা मार्टिन लूथर किंग को लगातार धमकियां मिलने लगीं। फोन पर अजनबी लोग उन्हें और उनके परिवार को मार डालने की धमकी देते थे। एक रात ऐसा हुआ कि लगातार धमकियों के कारण मार्टिन लूथर किंग सो नहीं पाए। आधी रात के बाद वे रसोई में जाकर मेज पर बैठ गए। उनके सामने कॉफी का एक कप था और मन मे गहरी थकान और डर। उन्हें लगा कि शायद यह संघर्ष उनके बस से बाहर है। उन्हें अपनी पत्नी और नवजात बेटी की चिंता सताने लगी। कुछ क्षणों के लिए उन्होंने सोचा कि शायद उन्हें यह স आंदोलन छोड़ देना चाहिए। उसी समय उन्होंने चुपचाप प्रार्थना की। م उन्होंने बाद में लिखा कि उन्होंने ईश्वर से कहा- 1 'मैं सही काम करने की कोशिश कर रहा हूं लेकिन मैं डर गया हूं॰ लोग मुझसे नेतृत्व की र हैं और अगर मुझमें साहस नहीं उम्मीद কনে 7 होगा तोवे भी निराश हो जाएंगे। त अंतश्चेतना ने दिखाई राह॰॰॰ उसी क्षण जैसे किसी आंतरिक आवाज ने उनसे सत्य, न्याय और धर्म के लिए खड़े रहो कहा मैं तुम्हारे साथ हूं। ' उनका भय धीरे-धीरे समाप्त हो गया। कुछ दिनों बाद उनके घर पर बम फेंका गया, लेकिन उनका परिवार रहा। जब सुरक्षित  ஈஈர भीड़ बदला लेने के लिए इकट्ठा हुई किंग ने उनसे कहा घृणा का जवाब प्रेम से देना चाहिए। भीड़ शांत होकर लौट गई। यह क्षण उनके साहस ओर अहिंसा की सबसे बड़ी मिनट रीड মিমাল লন যাথা| प्ररकप्रर्सग साहस व अहिंसा की बड़ी मिसाल n मानवाधिकार कार्यकर्ता मार्टिन लूयर किंग के जीवन की यह घटना बताती है कि कैसे आत्मसंशय M के क्षणों में उनकी अंतरात्मा ने उनका प्रय प्रशस्त कत किया और उन्हें अपने मूल्यों से डिगने न दिया।  লে TI ল द टे n बात   है। मोंटगॉमरी बस सन 1956 की बॉयकॉट के दौरान मार्टिन लूथर किंग जूनियर  जो T ने एक बड़े आंदोलन का नेतृत्व किया था। यह आंदोलन मोंटगॉमरी में बसों में नस्लीय भेदभाव 5 के खिलाफ शुरू हुआ था, जिसकी चिंगारी रोजा  7 पार्क्स की गिरफ्तारी से थी। भडकी लेकिन   जैसे-्जैसे সানীলন  নত   ভ্রঙসা मार्टिन लूथर किंग को लगातार धमकियां मिलने लगीं। फोन पर अजनबी लोग उन्हें और उनके परिवार को मार डालने की धमकी देते थे। एक रात ऐसा हुआ कि लगातार धमकियों के कारण मार्टिन लूथर किंग सो नहीं पाए। आधी रात के बाद वे रसोई में जाकर मेज पर बैठ गए। उनके सामने कॉफी का एक कप था और मन मे गहरी थकान और डर। उन्हें लगा कि शायद यह संघर्ष उनके बस से बाहर है। उन्हें अपनी पत्नी और नवजात बेटी की चिंता सताने लगी। कुछ क्षणों के लिए उन्होंने सोचा कि शायद उन्हें यह স आंदोलन छोड़ देना चाहिए। उसी समय उन्होंने चुपचाप प्रार्थना की। م उन्होंने बाद में लिखा कि उन्होंने ईश्वर से कहा- 1 'मैं सही काम करने की कोशिश कर रहा हूं लेकिन मैं डर गया हूं॰ लोग मुझसे नेतृत्व की र हैं और अगर मुझमें साहस नहीं उम्मीद কনে 7 होगा तोवे भी निराश हो जाएंगे। त अंतश्चेतना ने दिखाई राह॰॰॰ उसी क्षण जैसे किसी आंतरिक आवाज ने उनसे सत्य, न्याय और धर्म के लिए खड़े रहो कहा मैं तुम्हारे साथ हूं। ' उनका भय धीरे-धीरे समाप्त हो गया। कुछ दिनों बाद उनके घर पर बम फेंका गया, लेकिन उनका परिवार रहा। जब सुरक्षित  ஈஈர भीड़ बदला लेने के लिए इकट्ठा हुई किंग ने उनसे कहा घृणा का जवाब प्रेम से देना चाहिए। भीड़ शांत होकर लौट गई। यह क्षण उनके साहस ओर अहिंसा की सबसे बड़ी मिनट रीड মিমাল লন যাথা| - ShareChat