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Duddu Raja - Author on ShareChat
Duddu Raja 😘😘
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#🙋‍♂️मेरे विचार #🎤मेरी कविता-शायरी
N धर्मचीर ப art गुनाहों का N धर्मचीर ப art गुनाहों का
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    🦋✨𝘈𝙧𝘤𝘩𝘶✨🦋
    #💔दर्द-ए-दिल #🙏सुविचार📿 #🙋‍♂️मेरे विचार #💁‍♂️मेरा स्टेटस #😍 दिल के जज्बात
    100 जिंदगी एक 'किताब कि तरह है फाडने का मन करता है, कुछ पन्ने और कुछ 7 दोबारा पढने का.      { = 6 ః   a    0 a 77 पाणी {a ச6 100 जिंदगी एक 'किताब कि तरह है फाडने का मन करता है, कुछ पन्ने और कुछ 7 दोबारा पढने का.      { = 6 ః   a    0 a 77 पाणी {a ச6
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    🦋✨𝘈𝙧𝘤𝘩𝘶✨🦋
    #✅ वाट्सएप स्टेटस #🙋‍♂️मेरे विचार #💁‍♂️मेरा स्टेटस #💔दर्द-ए-दिल #🙏सुविचार📿
    मुझे रातों को नींद नहीं आती. रोते रोते कभी कभी साँस तक रुकने लगती है. पर सुबह वही मैं, सिर दर्द का बहाना बनाकर सबके सामने सामान्य बन जाती हूँ किसी को एहसास तक नहीं ` होने कि रात ने मुझे कितना तोडा है. कितनी बार तकिये में मुँह छुपाकर रोई हूँ, कितनी बार खुद को समझाते समझाते हार गई हूँ॰ रातें अब सुकून नहीं देतीं, दर्द वापस ले आती हैं. पुराने बस हर वो बात, हर वो इंसान जो भूलना चाहती हूँ, वही सबसे ज्यादा याद आता है. और सुबह.. सुबह फिर मुस्कुराना पडता है, ताकि किसी को पता ना चले कि मैं अंदर से कितनी बिखर चुकी हूँ॰ मुझे रातों को नींद नहीं आती. रोते रोते कभी कभी साँस तक रुकने लगती है. पर सुबह वही मैं, सिर दर्द का बहाना बनाकर सबके सामने सामान्य बन जाती हूँ किसी को एहसास तक नहीं ` होने कि रात ने मुझे कितना तोडा है. कितनी बार तकिये में मुँह छुपाकर रोई हूँ, कितनी बार खुद को समझाते समझाते हार गई हूँ॰ रातें अब सुकून नहीं देतीं, दर्द वापस ले आती हैं. पुराने बस हर वो बात, हर वो इंसान जो भूलना चाहती हूँ, वही सबसे ज्यादा याद आता है. और सुबह.. सुबह फिर मुस्कुराना पडता है, ताकि किसी को पता ना चले कि मैं अंदर से कितनी बिखर चुकी हूँ॰
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    🦋✨𝘈𝙧𝘤𝘩𝘶✨🦋
    #🙋‍♂️मेरे विचार #😍 दिल के जज्बात #💁‍♂️मेरा स्टेटस #💔दर्द-ए-दिल #✅ वाट्सएप स्टेटस
    मैं वो थी " जो हर लम्हे को जी भर के जीती थी, 11 छोटी छोटी बातों में खुश हो जाती थी, और आज खुद को देखती हूं तो ख्याल आता है मैने खुद को ही खो दिया ऐसा क्या पाना था मुझे जो उलझनों में फंसे रहती हूं हर वक्त कोई अपना नहीं लगता। बस मैं हूं और मेरी बढ़ती हुई तकलीफें, परेशानियां और मेरा अकेलापन है, जो मुझे अंदर ही अन्दर हर दिन " थोड़ा-्थोड़ा खाएं जा रही है " 11 मैं वो थी " जो हर लम्हे को जी भर के जीती थी, 11 छोटी छोटी बातों में खुश हो जाती थी, और आज खुद को देखती हूं तो ख्याल आता है मैने खुद को ही खो दिया ऐसा क्या पाना था मुझे जो उलझनों में फंसे रहती हूं हर वक्त कोई अपना नहीं लगता। बस मैं हूं और मेरी बढ़ती हुई तकलीफें, परेशानियां और मेरा अकेलापन है, जो मुझे अंदर ही अन्दर हर दिन " थोड़ा-्थोड़ा खाएं जा रही है " 11
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