#☝आज का ज्ञान || शरणागति ही सुख है|| 🌟
शरणागति में ही जीवन का वास्तविक सुख भी है। आप जैसे भी रहें बस प्रभु के बनकर प्रभु शरणागत रहें, यही जीवन आनंद का मार्ग है। अपने आप को सदैव प्रभु का अंश समझते हुए आनंदित रहकर जीवन जीने का अभ्यास करना चाहिए। अपनी मानते ही वस्तु अशुद्ध हो जाती है एवं भगवान की मानते ही वह शुद्ध और भगवद् स्वरुप हो जाती है। इसी तरह अपने आपको भी भगवान से दूर और पृथक मानते ही आप अशुद्ध हो जाते हैं।
प्रत्येक पल भगवान का स्मरण करो और उन्हें अपना मानो, इससे भगवद् चरणों में प्रीति उत्पन्न हो जाएगी। भगवान का हृदय से आश्रय करते ही भगवदीय गुण भी स्वतः प्रगट होने लगते हैं। निश्चित ही आश्रय में अद्भुत सामर्थ्य है। बूँद समुद्र का आश्रय लेती है तो समुद्र में मिलते ही वो भी स्वयं समुद्र ही हो जाती है। प्रत्येक परिस्थिति में भगवद् चरणों का आश्रय जीव को निर्भयता प्रदान कर देता है।🖋️
जय श्री राधे कृष्ण
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