#☝आज का ज्ञान
🌟 || दुर्बलता का त्याग करें || 🌟
अपनी दुर्बलताओं का ज्यादा विचार मत करो साथ ही अपने गुणों का अहम करने से भी सदैव बचे रहो। तुम भले हो, बुरे हो, सज्जन हो, दुर्जन हो, पापी हो, पुण्यात्मा हो अथवा जैसे भी हो बस उस प्रभु के बनकर रहो। अपनी दुर्बलता का ज्यादा विचार करोगे तो आपके भीतर हीन भाव आ जायेगा और अपने सत्कर्मों व गुणों का ज्यादा बखान करोगे तो अहम भाव आ जायेगा। वास्तविकता तो यही है कि जीव की कोई सामर्थ्य ही नहीं है।
इस मानव जीवन की जो भी प्राप्ति है, सब प्रभु कृपा का प्रसाद ही है। गोविन्द की कृपा के बल पर ही काम-क्रोध और विषय-वासना से मुक्त हुआ जा सकता है और उनकी कृपा से ही माया पर विजय प्राप्त की जा सकती है। बस जीवन में सदैव इस बात के लिए प्रयत्नशील बने रहें कि प्रभु चरणों में हमारी प्रीति बढ़ती रहे, संत वचनों में विश्वास बढ़ता रहे और प्रभु कथा में अनुराग बढ़ता रहे। प्रयत्नशील अवश्य बनो क्योंकि प्रयास आपको ही करना पड़ेगा सामर्थ्य प्रभु स्वयं देंगे।🖋️
जय श्री राधे कृष्ण
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