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#bhakti #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏 देवी दर्शन🌸 #👉 लोगों के लिए सीख👈
bhakti - f4٠] से प्रश्न पूछा, तब भगवान ने उन्हें एक अमृत नारद मुनि ने जब भगवान कलश लेकर तीनों लोकों की परिक्रमा करने को कहा। तीनों लोकों की परिक्रमा TauT f49] एक बार नारद मुनि ने भगवान ٦ ؟٥  ٤ ने पूछा, इस दौरान मेरा स्मरण कितनी बार किया?' नारद मुनि बोले हे प्रभु मेरा ध्यान केवल  भगवन, इस समय आपका सबसे प्रिय भक्त कौन विष्णु  ೯?'  'ar बोले,   मेरा सबसे प्रिय भक्त कलश पर था, आपका ध्यान कहां कर सकता था। एक किसान है। नारद मुनि निराश मन से बोले   मैं बोले हे नारद, वही भगवान तो आपका बड़ा भक्त हूं॰ फिर आपका सबसे प्रिय मेरा सच्चा प्रिय भक्त है, जो कर्म क्यों नहीं?' भगवान बोले इसका जवाब तुम स्वयं करते हुए भी मेरा स्मरण करे। खोजो। फिर उन्होंने नारद मुनि को एक अमृत से भरा  तुम तो लगातार जप करते हो, पर जब तुम्हें कर्म दिया गया, तब  कलश थमाया और कहा, इस कलश को लेकर तुम्हारे पास मेरे लिए समय ही तीनों लोकों की परिक्रमा कर आओ, लेकिन ध्यान EIEI नहीं था। रहे, एक बूंद भी गिर गई, तो तुम्हारा पुण्य नष्ट हो किसान हर दिन काम करते जाएगा ।' नारद मुनि यात्रा पर निकले।  भी थोड़ा समय निकाल लेता স্থা় fিথ 9্াব মদম্ব নিন্ষাল লনি  तीनों लोकों की परिक्रमा के दौरान उनका पूरा पर था। वे हर जगह ध्यानपूर्वक  है। इसलिए  वह ध्यान कवल कलश भगवान के चरणों में नतमस्तक हो गए। उन्होंने चलते, अमृत को एक बूंद भी गिरने न दी॰ और सुरक्षित लौट आए कहा, आपने मेरा दृष्टिकोण बदल दिया। अंततः भगवान के पास | মাণান f4٠] से प्रश्न पूछा, तब भगवान ने उन्हें एक अमृत नारद मुनि ने जब भगवान कलश लेकर तीनों लोकों की परिक्रमा करने को कहा। तीनों लोकों की परिक्रमा TauT f49] एक बार नारद मुनि ने भगवान ٦ ؟٥  ٤ ने पूछा, इस दौरान मेरा स्मरण कितनी बार किया?' नारद मुनि बोले हे प्रभु मेरा ध्यान केवल  भगवन, इस समय आपका सबसे प्रिय भक्त कौन विष्णु  ೯?'  'ar बोले,   मेरा सबसे प्रिय भक्त कलश पर था, आपका ध्यान कहां कर सकता था। एक किसान है। नारद मुनि निराश मन से बोले   मैं बोले हे नारद, वही भगवान तो आपका बड़ा भक्त हूं॰ फिर आपका सबसे प्रिय मेरा सच्चा प्रिय भक्त है, जो कर्म क्यों नहीं?' भगवान बोले इसका जवाब तुम स्वयं करते हुए भी मेरा स्मरण करे। खोजो। फिर उन्होंने नारद मुनि को एक अमृत से भरा  तुम तो लगातार जप करते हो, पर जब तुम्हें कर्म दिया गया, तब  कलश थमाया और कहा, इस कलश को लेकर तुम्हारे पास मेरे लिए समय ही तीनों लोकों की परिक्रमा कर आओ, लेकिन ध्यान EIEI नहीं था। रहे, एक बूंद भी गिर गई, तो तुम्हारा पुण्य नष्ट हो किसान हर दिन काम करते जाएगा ।' नारद मुनि यात्रा पर निकले।  भी थोड़ा समय निकाल लेता স্থা় fিথ 9্াব মদম্ব নিন্ষাল লনি  तीनों लोकों की परिक्रमा के दौरान उनका पूरा पर था। वे हर जगह ध्यानपूर्वक  है। इसलिए  वह ध्यान कवल कलश भगवान के चरणों में नतमस्तक हो गए। उन्होंने चलते, अमृत को एक बूंद भी गिरने न दी॰ और सुरक्षित लौट आए कहा, आपने मेरा दृष्टिकोण बदल दिया। अंततः भगवान के पास | মাণান - ShareChat