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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - इच्छा और वैराग्य के बीच ही बहती है जिँदगी : वर्मा सेशन द लेडी ह कैरीड द मॉन्कि एक्राँस दरिवर सिटी   रिपोर्टर किसी स्त्री की है, वैराग्य भी और इन दोनों के बीच बहती নাণন को कभी कम मत आंकिए। वह साधारण नदी ही असल जिंदगी है। इच्छा की भी को भी बदल सकती है, यहां तक कि पुरुषों  নঙনা  है। हिंदू दृष्टिकोण सबसे अपनी उन पुरुषों को भी जो संन्यासी बनना चाहते संतुलित दृष्टिकोण है। हैं। मेरी यह किताब सिर्फ प्रेम कहानी नहीं  इच्छा कोभी उतनी ही है। इसके भीतर दर्शन है सवाल हैं और मान्यता है जितनी मोक्ष को जीवन को देखने का एक संतुलित नजरिया है। यह बात लेखक पवन के. वर्मा ने जीवन के हैं॰ धर्म अर्थ पुरुषार्थ चार सोमवार को जेएलएफ में अपनी बुक  काम और मोक्ष। க அி इच्छा को द लेडी हू कैरीड द मॉन्क एक्रॉस द रिवर भी उतनी ही मान्यता है जितनी मोक्ष को। पर चर्चा करते हुए कही। उन्होंने कहा कि॰ इच्छा असंतुलित हो तो समस्या, संतुलन  असल में यह किताब इस सवाल के में हो तो जीवन का उपहार है। मेरे बारे में है कि क्या इच्छा से ऊपर उठना  লিব  मोक्ष मरने के बाद नहीं, इसी ही जीवन का अंतिम सत्य है? क्या जीवन में संभव है। अद्वैत दर्शन इच्छा स्वयं भी वैध है ? क्या इन दोनों में इसे चिदानंद कहा गया है पूर्ण  के बीच सामंजस्य संभव है? क्या जागरूकता और आनंद हिंदू दर्शन इसकी अनुमति देता की अवस्था। यह तब है? मेरी समझ में॰ बिल्कुल मिलता है जब मन देता है। जीवन से शांत होता है विचार  शागना नहीं है जीवन  रुकते हैं और भीतर को समझते संतुलन हुए 95 साथ अनुभव ಕಡ 9া जीना है। इच्छा भी उपहार 6 इच्छा और वैराग्य के बीच ही बहती है जिँदगी : वर्मा सेशन द लेडी ह कैरीड द मॉन्कि एक्राँस दरिवर सिटी   रिपोर्टर किसी स्त्री की है, वैराग्य भी और इन दोनों के बीच बहती নাণন को कभी कम मत आंकिए। वह साधारण नदी ही असल जिंदगी है। इच्छा की भी को भी बदल सकती है, यहां तक कि पुरुषों  নঙনা  है। हिंदू दृष्टिकोण सबसे अपनी उन पुरुषों को भी जो संन्यासी बनना चाहते संतुलित दृष्टिकोण है। हैं। मेरी यह किताब सिर्फ प्रेम कहानी नहीं  इच्छा कोभी उतनी ही है। इसके भीतर दर्शन है सवाल हैं और मान्यता है जितनी मोक्ष को जीवन को देखने का एक संतुलित नजरिया है। यह बात लेखक पवन के. वर्मा ने जीवन के हैं॰ धर्म अर्थ पुरुषार्थ चार सोमवार को जेएलएफ में अपनी बुक  काम और मोक्ष। க அி इच्छा को द लेडी हू कैरीड द मॉन्क एक्रॉस द रिवर भी उतनी ही मान्यता है जितनी मोक्ष को। पर चर्चा करते हुए कही। उन्होंने कहा कि॰ इच्छा असंतुलित हो तो समस्या, संतुलन  असल में यह किताब इस सवाल के में हो तो जीवन का उपहार है। मेरे बारे में है कि क्या इच्छा से ऊपर उठना  লিব  मोक्ष मरने के बाद नहीं, इसी ही जीवन का अंतिम सत्य है? क्या जीवन में संभव है। अद्वैत दर्शन इच्छा स्वयं भी वैध है ? क्या इन दोनों में इसे चिदानंद कहा गया है पूर्ण  के बीच सामंजस्य संभव है? क्या जागरूकता और आनंद हिंदू दर्शन इसकी अनुमति देता की अवस्था। यह तब है? मेरी समझ में॰ बिल्कुल मिलता है जब मन देता है। जीवन से शांत होता है विचार  शागना नहीं है जीवन  रुकते हैं और भीतर को समझते संतुलन हुए 95 साथ अनुभव ಕಡ 9া जीना है। इच्छा भी उपहार 6 - ShareChat