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रुबाई सरमद #सूफी काव्य
सूफी काव्य - ঠনাহ" सरमद' ग़म ए- इश्क़ बुलन्हवस रा 7-46< सोज़-एनदिल परवानः मगस रा न-्दहन्द 'ওষ্ নাযন ক্রি যাং আাযন ন-ব্রূনা ईं दौलत ए-सरमद हमः कस रा न-दहन्द भावार्थः - सरमद' ग़म ए इश्क़ बुलऱ्हवस को न दिया mreepilk सोज़-ए-दिल ए-परवानः मगस को न दिया ही पे मिलता है वो दोस्त ঘুড়াবন एक उम्र ये वह है शरफ़ जो ख़ार ओ ख़स को न दिया (सरमद) mee Motivatonat Videos App Want' ঠনাহ" सरमद' ग़म ए- इश्क़ बुलन्हवस रा 7-46< सोज़-एनदिल परवानः मगस रा न-्दहन्द 'ওষ্ নাযন ক্রি যাং আাযন ন-ব্রূনা ईं दौलत ए-सरमद हमः कस रा न-दहन्द भावार्थः - सरमद' ग़म ए इश्क़ बुलऱ्हवस को न दिया mreepilk सोज़-ए-दिल ए-परवानः मगस को न दिया ही पे मिलता है वो दोस्त ঘুড়াবন एक उम्र ये वह है शरफ़ जो ख़ार ओ ख़स को न दिया (सरमद) mee Motivatonat Videos App Want' - ShareChat