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शेयर और फ़ॉलो ओर कमेंट शीर्षक: वक्त की मार #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
✍मेरे पसंदीदा लेखक - (शीर्षकःवक्त की मार) उम्मीदों के बाजार में , हर सपना नीलम हुआ, पढ़ा लिखा युवा आज, सड़कों पर बदनाम हुआ। डिग्रियों की फाइलें अब, बोझ सी लगने लगी हैं, पेट की ये आग अब, से बाहर जगने लगी हैं। चूल्हों : सब्जी की मंडी में जाकर अब हाथ कांपते हैं , आमदनी अठम्री है, और खचें आसमान नापते हैं। कुर्सी वाले सो रहे हैं, चैन की गहरी नींद में , गरीब की रात कटती हैं॰ कैलकी फ़िक़ की भीत में। मंजर तुम , या फिर कुर्सी छोड़ दो, बदलो अब ये भूखे पेट की चीखों से, ना अपना नाता तोड़ दो। (लेखक दीपक शर्मा) 2026-02-05 From vivo Notes] (शीर्षकःवक्त की मार) उम्मीदों के बाजार में , हर सपना नीलम हुआ, पढ़ा लिखा युवा आज, सड़कों पर बदनाम हुआ। डिग्रियों की फाइलें अब, बोझ सी लगने लगी हैं, पेट की ये आग अब, से बाहर जगने लगी हैं। चूल्हों : सब्जी की मंडी में जाकर अब हाथ कांपते हैं , आमदनी अठम्री है, और खचें आसमान नापते हैं। कुर्सी वाले सो रहे हैं, चैन की गहरी नींद में , गरीब की रात कटती हैं॰ कैलकी फ़िक़ की भीत में। मंजर तुम , या फिर कुर्सी छोड़ दो, बदलो अब ये भूखे पेट की चीखों से, ना अपना नाता तोड़ दो। (लेखक दीपक शर्मा) 2026-02-05 From vivo Notes] - ShareChat