Deepak Sharma
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#📒 मेरी डायरी #☝ मेरे विचार #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ like comment share and follow
📒 मेरी डायरी - (शीर्षकःकिरदार) मशहूर होने की हसरत नहीं अब, मगर खुद की नजरों मैं गिरना नहीं है। जो आंच आए सच पर तो लड़ना सिखाया , वो फ़ौलाद जैसा किरदार बनाया (मेरे लेख) 2026-02-12 (शीर्षकःकिरदार) मशहूर होने की हसरत नहीं अब, मगर खुद की नजरों मैं गिरना नहीं है। जो आंच आए सच पर तो लड़ना सिखाया , वो फ़ौलाद जैसा किरदार बनाया (मेरे लेख) 2026-02-12 - ShareChat
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❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - (शीर्षकः प्यार) कभी अपनो की आंखों में ढलना सिखाया , कभी खुद से ही खुद को मिलना सिखाया जो नफ़रत की आंधी में बुझ न सके , वो दीया बन कर दिल में जलना सिखाया। (मेरे लेख) (शीर्षकः प्यार) कभी अपनो की आंखों में ढलना सिखाया , कभी खुद से ही खुद को मिलना सिखाया जो नफ़रत की आंधी में बुझ न सके , वो दीया बन कर दिल में जलना सिखाया। (मेरे लेख) - ShareChat
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✍मेरे पसंदीदा लेखक - (शीर्षकःव्यवहार) लहजा बता देता है, तालीम कैसी, अदब ही तो है, रूह की चाशनी सी। झुकना न समझो कमजोरी अपनी, यही तोह है इंसानियत की कहानी। (मेरे लेख) (शीर्षकःव्यवहार) लहजा बता देता है, तालीम कैसी, अदब ही तो है, रूह की चाशनी सी। झुकना न समझो कमजोरी अपनी, यही तोह है इंसानियत की कहानी। (मेरे लेख) - ShareChat
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❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - (शीर्षकः विचार) शून्यता से उठकर शब्दों का, सैलाब बनते देखा है। बंद आंखों से हकीकत का, ख्वाब बनते देखा है। जैसे बीज से दरख़्त और, चिंगारी से आग बनती है। वैसे ही एक छोटे से विचार से, इंसान को लाजबाव बनते देखा है। (मेरे लेख) 2026-02-09 (शीर्षकः विचार) शून्यता से उठकर शब्दों का, सैलाब बनते देखा है। बंद आंखों से हकीकत का, ख्वाब बनते देखा है। जैसे बीज से दरख़्त और, चिंगारी से आग बनती है। वैसे ही एक छोटे से विचार से, इंसान को लाजबाव बनते देखा है। (मेरे लेख) 2026-02-09 - ShareChat
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❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - शीर्षकः जिंदगी जिंदगी बहुत कुछ सिखा देती है, प्यार विचार किरदार व्यवहार। (लेख दीपक शर्मा) शीर्षकः जिंदगी जिंदगी बहुत कुछ सिखा देती है, प्यार विचार किरदार व्यवहार। (लेख दीपक शर्मा) - ShareChat
शेयर और फ़ॉलो ओर कमेंट शीर्षक: वक्त की मार #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
✍मेरे पसंदीदा लेखक - (शीर्षकःवक्त की मार) उम्मीदों के बाजार में , हर सपना नीलम हुआ, पढ़ा लिखा युवा आज, सड़कों पर बदनाम हुआ। डिग्रियों की फाइलें अब, बोझ सी लगने लगी हैं, पेट की ये आग अब, से बाहर जगने लगी हैं। चूल्हों : सब्जी की मंडी में जाकर अब हाथ कांपते हैं , आमदनी अठम्री है, और खचें आसमान नापते हैं। कुर्सी वाले सो रहे हैं, चैन की गहरी नींद में , गरीब की रात कटती हैं॰ कैलकी फ़िक़ की भीत में। मंजर तुम , या फिर कुर्सी छोड़ दो, बदलो अब ये भूखे पेट की चीखों से, ना अपना नाता तोड़ दो। (लेखक दीपक शर्मा) 2026-02-05 From vivo Notes] (शीर्षकःवक्त की मार) उम्मीदों के बाजार में , हर सपना नीलम हुआ, पढ़ा लिखा युवा आज, सड़कों पर बदनाम हुआ। डिग्रियों की फाइलें अब, बोझ सी लगने लगी हैं, पेट की ये आग अब, से बाहर जगने लगी हैं। चूल्हों : सब्जी की मंडी में जाकर अब हाथ कांपते हैं , आमदनी अठम्री है, और खचें आसमान नापते हैं। कुर्सी वाले सो रहे हैं, चैन की गहरी नींद में , गरीब की रात कटती हैं॰ कैलकी फ़िक़ की भीत में। मंजर तुम , या फिर कुर्सी छोड़ दो, बदलो अब ये भूखे पेट की चीखों से, ना अपना नाता तोड़ दो। (लेखक दीपक शर्मा) 2026-02-05 From vivo Notes] - ShareChat
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लेखक की कलम by दीपक शर्मा #📚कविता-कहानी संग्रह #✍मेरे पसंदीदा लेखक #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
📚कविता-कहानी संग्रह - {शीर्षकः अभ्यास , ज्ञान अभिमान} करो अभ्यास निरंतर, लगाओ पड़ने पर ज्ञान , बन कर जाओ किसी भी पद, पर मत करो अभिमान। हमेशा खुद बड़ों का लो आशीर्वाद , दो सबको सम्मान। ।| डगमगाएं कदम कहीं , तो धैर्य तुम न खोना, संघर्ष की इस राह में , कभी तुम न रोना। जैसे कुंदन का रूप, तपकर ही निखरता है, अंधेरों को चीरकर ही आती है सुनहरी धूप। | जो झुकता है फल आने पर,वही वृक्ष कहलाता महान , परोपकार की भावना ही , बढ़ाती है जग में मान। पद की गरिमा पद से नहीं होती है व्यवहार से जीतो दुनिया को तुम बस, अपने पावन प्यार से।। (लेखक दीपक शर्मा) 2026-02-02 {शीर्षकः अभ्यास , ज्ञान अभिमान} करो अभ्यास निरंतर, लगाओ पड़ने पर ज्ञान , बन कर जाओ किसी भी पद, पर मत करो अभिमान। हमेशा खुद बड़ों का लो आशीर्वाद , दो सबको सम्मान। ।| डगमगाएं कदम कहीं , तो धैर्य तुम न खोना, संघर्ष की इस राह में , कभी तुम न रोना। जैसे कुंदन का रूप, तपकर ही निखरता है, अंधेरों को चीरकर ही आती है सुनहरी धूप। | जो झुकता है फल आने पर,वही वृक्ष कहलाता महान , परोपकार की भावना ही , बढ़ाती है जग में मान। पद की गरिमा पद से नहीं होती है व्यवहार से जीतो दुनिया को तुम बस, अपने पावन प्यार से।। (लेखक दीपक शर्मा) 2026-02-02 - ShareChat