ShareChat
click to see wallet page
search
#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - 4शिवमय हो जाऊँ@ महाकाल की भस्म बनूँ, ओंकार की गूँज हो जाऊँ. सोमनाथ के सागर जैसी, हर बंधन से मुक्त हो जाऊँ।  के वन में गूँजूँ, वैद्यनाथ की शरण में झुकूँ. भीमाशंकर त्र्यंबकेश्वर की गंगा बन, हर जीवन को पावन करूँ। केदार के हिम शिखरों में , निश्चल एक ध्यान बनूँ . रामेश्वर की राह पकड़, सत्य का संधान बनूँ। नागेश्वर के कंठ में उतर , हलाहल सा धैर्य धरूँ , घृष्णेश्वर के दीप समान , अंधकार में प्रकाश भरूँ। मल्लिकार्जुन के शिखर चढूँ, भक्ति का अभिषेक करूँ हर क्षण में शिव को साधकर, ज्योतिर्मय विवेक धरूँ। विश्वनाथ के चरणों में, देहन्मन का भेद मिटे. बारह ज्योतिर्लिंगों की राह चलूँ॰ और शिव में लीन हो जाऊँ ।। @sona_creationa3 4शिवमय हो जाऊँ@ महाकाल की भस्म बनूँ, ओंकार की गूँज हो जाऊँ. सोमनाथ के सागर जैसी, हर बंधन से मुक्त हो जाऊँ।  के वन में गूँजूँ, वैद्यनाथ की शरण में झुकूँ. भीमाशंकर त्र्यंबकेश्वर की गंगा बन, हर जीवन को पावन करूँ। केदार के हिम शिखरों में , निश्चल एक ध्यान बनूँ . रामेश्वर की राह पकड़, सत्य का संधान बनूँ। नागेश्वर के कंठ में उतर , हलाहल सा धैर्य धरूँ , घृष्णेश्वर के दीप समान , अंधकार में प्रकाश भरूँ। मल्लिकार्जुन के शिखर चढूँ, भक्ति का अभिषेक करूँ हर क्षण में शिव को साधकर, ज्योतिर्मय विवेक धरूँ। विश्वनाथ के चरणों में, देहन्मन का भेद मिटे. बारह ज्योतिर्लिंगों की राह चलूँ॰ और शिव में लीन हो जाऊँ ।। @sona_creationa3 - ShareChat