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सबद बुल्ला साहिब #संतो की रचनायें
संतो की रचनायें - सबद ' समुझ मन मानि ले, जोगिया कहल संदेस। रैनि दिवस रबि ससि वहँ नाहीं, तहवाँ 7<344|| जटा भभूत बैराग जोग तप, यह तौ जोगिया न भाय। सुन्न निरंतर जोगी बोलै , आपा उलटि समाय।। आपै जोगी आपै भोगी , आपै सर्ब HII वा जोगिया के दरस परस पर, किया सीस क़ुरबान II गगन मंडल अनहद धुनि बाजै , तहँ जोगिया कै फेर। कह जन बुल्ला वा जोगीबर, सत्त सब्द कै चैर।। बुल्ला साहिब) App] Want Motivational Videos सबद ' समुझ मन मानि ले, जोगिया कहल संदेस। रैनि दिवस रबि ससि वहँ नाहीं, तहवाँ 7<344|| जटा भभूत बैराग जोग तप, यह तौ जोगिया न भाय। सुन्न निरंतर जोगी बोलै , आपा उलटि समाय।। आपै जोगी आपै भोगी , आपै सर्ब HII वा जोगिया के दरस परस पर, किया सीस क़ुरबान II गगन मंडल अनहद धुनि बाजै , तहँ जोगिया कै फेर। कह जन बुल्ला वा जोगीबर, सत्त सब्द कै चैर।। बुल्ला साहिब) App] Want Motivational Videos - ShareChat