#जय श्री राम
श्री राम की उपासना भारतीय अध्यात्म में 'राम' नाम को महामंत्र माना गया है। भगवान शिव के अनुसार, "राम" नाम विष्णु सहस्रनाम के समान फलदायी है। श्री राम की भक्ति से जीवन के चार पुरुषार्थों—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—की प्राप्ति अत्यंत सरल हो जाती है।
यहाँ इसकी विस्तृत व्याख्या दी गई है:
1. धर्म की प्राप्ति (Righteousness)
श्री राम स्वयं "विग्रहवान धर्मः" अर्थात् साक्षात् धर्म के स्वरूप हैं। उनकी उपासना से व्यक्ति के भीतर निम्नलिखित परिवर्तन आते हैं:
* कर्तव्य बोध: राम जी का जीवन एक आदर्श पुत्र, भाई, पति और राजा का है। उनकी भक्ति करने से साधक को अपने सांसारिक कर्तव्यों को धर्मपूर्वक निभाने की शक्ति मिलती है।
* चरित्र निर्माण: उपासना से मन के विकार (काम, क्रोध, लोभ) शांत होते हैं और व्यक्ति सत्य, मर्यादा और अनुशासन के मार्ग पर चलने लगता है, जो धर्म का मूल है।
2. धन की प्राप्ति (Wealth/Prosperity)
श्री राम भगवान विष्णु के अवतार हैं और माता सीता साक्षात् लक्ष्मी स्वरूपा हैं। जहाँ राम का वास होता है, वहाँ लक्ष्मी स्वतः ही निवास करती हैं:
* स्थिर लक्ष्मी: राम जी की भक्ति से प्राप्त धन नीतिगत और न्यायपूर्ण होता है, जो कुल में सुख और शांति लाता है।
* दरिद्रता का नाश: 'रामचरितमानस' के अनुसार, राम नाम के जप से मानसिक और भौतिक दरिद्रता दूर होती है। भक्त हनुमान जी की कृपा भी प्राप्त होती है, जो अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता हैं।
* सफलता: श्री राम की कृपा से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, जिससे व्यापार और करियर में उन्नति होती है।
3. मोक्ष की प्राप्ति (Liberation)
अध्यात्म में "राम" नाम को 'तारक मंत्र' कहा गया है, जो जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाता है:
* अंतिम गति: काशी में भगवान शिव स्वयं मरते हुए प्राणी के कान में 'राम' नाम फूंकते हैं ताकि उसे मोक्ष प्राप्त हो सके।
* माया से मुक्ति: राम की अनन्य भक्ति साधक को संसार के मोह-माया के बंधनों से ऊपर उठा देती है।
* परम पद: गोस्वामी तुलसीदास जी के अनुसार, "राम भगति बिनु मुति न होई।" अर्थात् बिना राम की भक्ति के जीव को परम पद (वैकुंठ या प्रभु के चरणों में स्थान) प्राप्त नहीं हो सकता।
उपासना के सरल उपाय
* नाम जप: निरंतर "राम" या "जय सिया राम" का मानसिक जाप करना।
* रामायण/रामचरितमानस का पाठ: प्रभु के गुणों का गान और उनके आदर्शों को जीवन में उतारना।
* शरणागति: पूर्ण विश्वास रखना कि "प्रभु ही मेरे रक्षक हैं।"
श्री राम की उपासना केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि एक जीवन पद्धति है जो मनुष्य को सांसारिक सुख (धन) देते हुए श्रेष्ठ आचरण (धर्म) की ओर ले जाती है और अंततः ईश्वर में विलीन (मोक्ष) कर देती है।


