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#बलिदान दिवस #आज जिनकी जयन्ती है #शहीद दिवस #🙏🏻माँ तुझे सलाम #आज जिनकी पुण्यतिथि है
बलिदान दिवस - आऊवा पाली में २४ क्रांतिकारियों को २६ जनवरी १८५८ में दी गई थी फांसी १८५८ में १२० स्वतन्त्रता सेनानियों पर ब्रिटिश अधिकारियों ने किया था সামলা তত ! मात्र दो दिन का नोटिस देकर २४ स्वतन्त्रता सेनानियों को दिया था मृत्यु 43. !! आउवा ( पाली ) मारवाड़ का एक छोटा सा कस्बा आउवा, लेकिन पूरी अंग्रेजी हुकूमत की चूले हिलाने में इस कस्बे का नाम इतना बड़ा है कि जब-जब भी देश में आजादी की पहली अलख जगाने वाली १८५७ की क्रान्ति का जिक्र होगा, आउवा के बलिदान को नही भुलग्राजज हुसूमता जा सकता । इस छोटे से कस्बे में रहने वाले स्वतंत्रता सेनानियों ब्रिटिश हुकूमत ने स्वन्त्रता सेनानियों के की नाक में दम कर रखा था करने के लिए # _२४ _ जनवरी_ १८५८ को १२० सैनिकों गढ़ को ख़त्म को गिरफ्तार किया | # _ २५ जनवरी १८५८ को कोर्ट से २४ स्वतन्त्र सेनानियों को मृत्यु दंड की सजा  गई और उन्हें एक साथ लाइन में सुनाई खडा करके तोप से उड़ा दिया गया | यह पहला ऐसा मामला था जिसमें इतने कम समय में किसी को फांसी दी गई हो | किए थे आउवा के छह गढ़ सुरंग बनाकर ध्वस्त लिए स्वतन्त्रता सेनानियों के गढ़ को तबाह करने के अंग्रेजों ने कई राजाओं के साथ मिलकर आउवा पर हमला किया | लेकिन, हर बार युद्ध में अंग्रेजों को हार का सामना करना पड़ा बताया जाता है कि Rs माता के परम भक्त थे | उनकी कृपा से ளி ठाकुर कुशाल अंग्रेजों की मुंह की खानी पड़ती थी, तब अंग्रेज सरकार ने मूर्ति खण्डित कर आऊवा सहित उससे जुड़े छह किलों को बनाकर ध्वस्त किया सुरंगे मॉक मेशन का सिर काट लटकाया आउवा किले पर fg जब अंग्रेज पूरी तरह विफल रहे तब आउवा पर हमला करने के जोधपुर  उन्होंने के महाराजा की मदद ली जोधपुर के राजा और अंग्रेज  जोधपुर की सरकार ने मिलकर आउवा पर हमला किया उस समय सेना का पॉलिटिकल एजेन्ट मॉक मेसन था | उसने आउवा पर हमला कुशाल की तलवार के आगे टिक नहीं करना चाहा पर युद्ध में काक्लैरत पाया और मॉक मेशन का काट आऊवा के दरवाजे पर लटका हालांकि, कर्नल होम्स के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना ने २४ जनवरी  লিমা १८५८ को आउवा के किले पर अधिकार कर लिया | शहीदों को कोटि कोटि नमन जय हिंद जय भारत आऊवा पाली में २४ क्रांतिकारियों को २६ जनवरी १८५८ में दी गई थी फांसी १८५८ में १२० स्वतन्त्रता सेनानियों पर ब्रिटिश अधिकारियों ने किया था সামলা তত ! मात्र दो दिन का नोटिस देकर २४ स्वतन्त्रता सेनानियों को दिया था मृत्यु 43. !! आउवा ( पाली ) मारवाड़ का एक छोटा सा कस्बा आउवा, लेकिन पूरी अंग्रेजी हुकूमत की चूले हिलाने में इस कस्बे का नाम इतना बड़ा है कि जब-जब भी देश में आजादी की पहली अलख जगाने वाली १८५७ की क्रान्ति का जिक्र होगा, आउवा के बलिदान को नही भुलग्राजज हुसूमता जा सकता । इस छोटे से कस्बे में रहने वाले स्वतंत्रता सेनानियों ब्रिटिश हुकूमत ने स्वन्त्रता सेनानियों के की नाक में दम कर रखा था करने के लिए # _२४ _ जनवरी_ १८५८ को १२० सैनिकों गढ़ को ख़त्म को गिरफ्तार किया | # _ २५ जनवरी १८५८ को कोर्ट से २४ स्वतन्त्र सेनानियों को मृत्यु दंड की सजा  गई और उन्हें एक साथ लाइन में सुनाई खडा करके तोप से उड़ा दिया गया | यह पहला ऐसा मामला था जिसमें इतने कम समय में किसी को फांसी दी गई हो | किए थे आउवा के छह गढ़ सुरंग बनाकर ध्वस्त लिए स्वतन्त्रता सेनानियों के गढ़ को तबाह करने के अंग्रेजों ने कई राजाओं के साथ मिलकर आउवा पर हमला किया | लेकिन, हर बार युद्ध में अंग्रेजों को हार का सामना करना पड़ा बताया जाता है कि Rs माता के परम भक्त थे | उनकी कृपा से ளி ठाकुर कुशाल अंग्रेजों की मुंह की खानी पड़ती थी, तब अंग्रेज सरकार ने मूर्ति खण्डित कर आऊवा सहित उससे जुड़े छह किलों को बनाकर ध्वस्त किया सुरंगे मॉक मेशन का सिर काट लटकाया आउवा किले पर fg जब अंग्रेज पूरी तरह विफल रहे तब आउवा पर हमला करने के जोधपुर  उन्होंने के महाराजा की मदद ली जोधपुर के राजा और अंग्रेज  जोधपुर की सरकार ने मिलकर आउवा पर हमला किया उस समय सेना का पॉलिटिकल एजेन्ट मॉक मेसन था | उसने आउवा पर हमला कुशाल की तलवार के आगे टिक नहीं करना चाहा पर युद्ध में काक्लैरत पाया और मॉक मेशन का काट आऊवा के दरवाजे पर लटका हालांकि, कर्नल होम्स के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना ने २४ जनवरी  লিমা १८५८ को आउवा के किले पर अधिकार कर लिया | शहीदों को कोटि कोटि नमन जय हिंद जय भारत - ShareChat